सरहद पर तिरंगे की छांव में सजा आज़ादी का उत्सव

71वीं वाहिनी SSB ने बच्चों और ग्रामीणों संग मनाया 80वां स्वतंत्रता दिवस, देशभक्ति के साथ नशामुक्त समाज का दिया संदेश

श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
चाणक्य न्यूज़ इंडिया

भारत-नेपाल सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्र में 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव केवल तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सामाजिक चेतना और नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनाने के संकल्प का खूबसूरत संगम बन गया।

15 अगस्त 2026 को 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) की G समवाय द्वारा जवानों एवं स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता के साथ पूरे सम्मान और उत्साह से ध्वजारोहण किया गया। तिरंगे को सलामी देते हुए जवानों और ग्रामीणों ने स्वतंत्रता सेनानियों तथा राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया।

ध्वजारोहण के उपरांत 71वीं वाहिनी SSB के कार्यक्षेत्र (AOR) स्थित विद्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में बल के अधिकारियों एवं जवानों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में करीब 300 छात्र-छात्राएं, 15 शिक्षक और 100 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। बच्चों और ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी ने समारोह को एक जीवंत सामुदायिक उत्सव में बदल दिया।

बच्चों की प्रस्तुतियों में दिखा देशप्रेम

विद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीतों पर नृत्य एवं गायन प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रप्रेम से भर दिया। बच्चों की प्रस्तुतियों में आजादी का उल्लास था तो साथ ही देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी दिखाई दिया।

समारोह का विशेष आकर्षण SSB के नशामुक्ति अभियान की थीम पर प्रस्तुत जागरूकता नाटक रहा। विद्यालय स्टाफ के सहयोग से बच्चों ने नाटक के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों और नशामुक्त समाज की आवश्यकता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। इस प्रस्तुति ने स्वतंत्रता के अर्थ को सामाजिक बुराइयों से मुक्ति की भावना से भी जोड़ दिया।

इंस्पेक्टर अमित कुमार ने बच्चों को समझाया तिरंगे का महत्व

इस अवसर पर इंस्पेक्टर अमित कुमार ने छात्र-छात्राओं को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सशस्त्र सीमा बल की विभिन्न जिम्मेदारियों एवं सामाजिक सरोकारों की जानकारी दी।

उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रीय ध्वज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को तिरंगे के सम्मान, राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने के लिए प्रेरित किया।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने वाले बच्चों को उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया, जबकि समारोह में उपस्थित सभी लोगों के बीच मिठाइयां वितरित की गईं।

विद्यालय के प्रधानाचार्य आकाश मिश्रा एवं विनय तिवारी ने SSB के कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी विद्यालय और बल के संयुक्त प्रयास से सामाजिक, शैक्षणिक एवं राष्ट्रहित से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा व्यक्त की।

विशेष उल्लेख — वर्दी का अनुशासन, बच्चों के बीच अपनापन

स्वतंत्रता दिवस के इस आयोजन में इंस्पेक्टर अमित कुमार की मौजूदगी केवल एक SSB अधिकारी की औपचारिक उपस्थिति तक सीमित नहीं रही। बच्चों के बीच जाकर उनसे संवाद करना, उन्हें राष्ट्रीय ध्वज का महत्व समझाना और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करना उनकी भूमिका को एक अलग मानवीय आयाम देता दिखाई दिया।

सरहद पर तैनात जवान की पहली पहचान देश की सुरक्षा से होती है, लेकिन जब वही वर्दी विद्यालय के प्रांगण में बच्चों के बीच खड़ी होकर उन्हें राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती है, तब उसकी भूमिका सीमा की चौकसी से कहीं आगे बढ़ जाती है।

इंस्पेक्टर अमित कुमार इसी भूमिका का प्रतिनिधित्व करते नजर आए—जहां सीमा की सुरक्षा के साथ सीमावर्ती समाज और नई पीढ़ी से विश्वास का रिश्ता बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें तिरंगे से जुड़ी भावना समझाना यह संदेश देता है कि SSB केवल सरहद की निगरानी करने वाला बल नहीं, बल्कि सीमावर्ती समाज के भविष्य से जुड़ा एक भरोसेमंद साथी भी है।

सीमा की सुरक्षा से समाज की चेतना तक

भारत-नेपाल की खुली सीमा पर SSB की जिम्मेदारी केवल सीमा की निगरानी और सुरक्षा तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों में बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों के साथ इस प्रकार के कार्यक्रम सुरक्षा बल और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

स्वतंत्रता दिवस का यह समारोह इसी भावना की एक तस्वीर बनकर सामने आया—एक ओर वर्दी में खड़े सीमा के प्रहरी थे और दूसरी ओर हाथों में तिरंगा थामे देश का भविष्य।

विशेष टिप्पणी | श्यामल प्रतीक की कलम से

मेरी नजर में सरहद की असली ताकत केवल वहां तैनात हथियारों और चौकियों में नहीं होती, बल्कि उस विश्वास में भी होती है जो सीमा के प्रहरी और सीमावर्ती समाज के बीच बनता है।

इस आयोजन में इंस्पेक्टर अमित कुमार को बच्चों के बीच देखकर मुझे SSB की उसी मानवीय भूमिका की झलक दिखाई देती है। सीमा की रक्षा करने वाले हाथ जब किसी बच्चे को उसकी प्रतिभा के लिए पुरस्कार देते हैं और वही आवाज उसे देश, तिरंगे और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझाती है, तब सुरक्षा का अर्थ कहीं अधिक व्यापक हो जाता है।

वर्दी और बच्चों के बीच यदि दूरी की जगह विश्वास पैदा हो, तो उसका प्रभाव केवल एक समारोह तक सीमित नहीं रहता। वह बच्चे की स्मृतियों और सोच में लंबे समय तक जीवित रहता है।

आजादी के इस पर्व पर शायद इससे खूबसूरत तस्वीर और क्या होगी कि सरहद के प्रहरी और गांव के बच्चे एक ही तिरंगे के नीचे खड़े हों—एक देश की सीमाओं का भविष्य संभाल रहा हो और दूसरा देश का भविष्य बनने की तैयारी कर रहा हो।

यही तिरंगे की ताकत है, यही सरहद का विश्वास है और यही आजादी की सबसे खूबसूरत तस्वीर है।

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