मैत्री पुल पर साथ बढ़े हाथ, भारत–नेपाल की दोस्ती ने दिया स्वच्छता का संदेश

47वीं वाहिनी एसएसबी की पहल पर नेपाल एपीएफ और स्थानीय नागरिकों ने किया संयुक्त श्रमदान; साफ-सफाई के साथ आपसी सौहार्द और साझा जिम्मेदारी की मिसाल

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर

रक्सौल,- भारत–नेपाल सीमा के मैत्री पुल पर स्वच्छता के लिए उठे हाथों ने दोनों देशों की मित्रता का सुंदर संदेश दिया। भारत के सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), नेपाल के एपीएफ बल सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर पुल तथा उसके आसपास सघन साफ-सफाई की। इस संयुक्त प्रयास में पड़ोसी देश के प्रति सद्भाव, सार्वजनिक स्थानों की देखभाल और समाज के लिए साथ काम करने की भावना दिखाई दी।

“स्वच्छता ही सेवा” अभियान और “एक दिन, एक घंटा, एक साथ” विशेष स्वच्छता कार्यक्रम के तहत 47वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, रक्सौल ने अपने कार्यक्षेत्र में इस अभियान का आयोजन किया। इसमें एसएसबी के बलकार्मिकों के साथ नेपाल के एपीएफ सदस्यों की भागीदारी ने कार्यक्रम को भारत–नेपाल सहयोग की एक सकारात्मक तस्वीर बना दिया। स्थानीय नागरिकों ने भी श्रमदान में हिस्सा लेकर स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

मैत्री पुल पर हुआ यह आयोजन अपने स्थान और सहभागिता, दोनों कारणों से विशेष रहा। जिस पुल का नाम ही मित्रता का परिचय देता है, उसकी साफ-सफाई के लिए दोनों देशों के बल सदस्य एक साथ जुटे। साझा श्रमदान ने मैत्री के भाव को व्यवहार में उतारा। साथ काम करने की यह भावना बताती है कि पड़ोसी देशों के संबंधों को मजबूती देने में सार्वजनिक हित के छोटे, ठोस प्रयास भी सार्थक भूमिका निभा सकते हैं।

भारत–नेपाल के रिश्तों में सीमावर्ती समाज का आत्मीय जुड़ाव महत्वपूर्ण स्थान रखता है। साझा सांस्कृतिक परंपराओं, पारिवारिक संबंधों और लोगों के बीच मेलजोल से इस मित्रता को जीवन मिलता है। मैत्री पुल पर आयोजित स्वच्छता अभियान उसी आत्मीयता की स्थानीय अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया। दोनों देशों के बलकर्मियों और नागरिकों की सहभागिता ने स्वच्छ वातावरण के लिए मिलकर काम करने का उदाहरण प्रस्तुत किया।

इस पहल में 47वीं वाहिनी एसएसबी की सामाजिक भागीदारी भी दिखाई दी। सीमा पर तैनात बल के जवान जब नागरिकों के साथ सार्वजनिक स्थल की सफाई में जुटते हैं, तो सेवा और सहयोग का संदेश सीधे समाज तक पहुँचता है। नेपाल एपीएफ की भागीदारी ने इस संदेश को और विस्तार दिया। स्वच्छता के साझा उद्देश्य ने दोनों देशों के बल सदस्यों तथा स्थानीय लोगों को एक ही प्रयास में जोड़ दिया।

अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी स्थानीय नागरिक रहे। सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने में लोगों की रोजमर्रा की आदतों और सहभागिता की बड़ी भूमिका होती है। नागरिकों का स्वयं श्रमदान करना इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने का व्यावहारिक तरीका है। मैत्री पुल पर उनकी भागीदारी ने यह दिखाया कि सामुदायिक प्रयास में सुरक्षा बल और समाज साथ आ सकते हैं।

“एक दिन, एक घंटा, एक साथ” का भाव इस आयोजन में सामूहिक सहभागिता के रूप में दिखाई दिया। अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निभाने वाले लोग एक सार्वजनिक उद्देश्य के लिए साथ आए। पुल और आसपास की साफ-सफाई के साथ कार्यक्रम ने साझा स्थानों के प्रति अपनापन और उनकी देखभाल का संदेश दिया। इस भावना को दैनिक व्यवहार में बनाए रखना ऐसे अभियानों की उपयोगिता को आगे बढ़ा सकता है।

मैत्री पुल की यह पहल सीमावर्ती क्षेत्र से निकली एक सकारात्मक कहानी है, जिसमें भारत–नेपाल की मित्रता को संयुक्त श्रमदान के माध्यम से व्यक्त किया गया। 47वीं वाहिनी एसएसबी, नेपाल एपीएफ और स्थानीय नागरिकों का साथ आना आपसी सम्मान तथा सहयोग की भावना का उदाहरण बना। पुल पर की गई सफाई का संदेश उसके आसपास से आगे तक जाता है—जिस स्थान से लोग जुड़ते हैं, उसकी देखभाल भी साझा जिम्मेदारी है।

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