ब्रह्माकुमारी बहनों ने पुलिसकर्मियों, एसएसबी जवानों और लैंड पोर्ट अधिकारियों को बांधा रक्षा सूत्र; पवित्रता, ईश्वरीय प्रेम और सर्वकल्याण का दिया संदेश
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल। भारत-नेपाल सीमा के रक्सौल में रक्षाबंधन का पर्व इस बार केवल भाई-बहन के पारंपरिक रिश्ते तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘अलौकिक रक्षाबंधन’ के रूप में सेवा, सुरक्षा, पवित्रता और मानवीय मूल्यों का सुंदर संदेश लेकर सामने आया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय से जुड़ी बीके भारती बहन, बीके रीता बहन, बीके उमा बहन और बीके रीना बहन ने समाज और राष्ट्र की सुरक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों एवं सुरक्षाकर्मियों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुखद, सुरक्षित और सेवामय जीवन की कामना की।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने पुलिस अधिकारियों, सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महिला एवं पुरुष जवानों तथा लैंड पोर्ट रक्सौल के अधिकारियों को तिलक लगाकर और राखी बांधकर अलौकिक रक्षाबंधन का आध्यात्मिक संदेश दिया। तस्वीरों में भी इस आयोजन का आत्मीय स्वरूप दिखाई देता है—एक ओर वर्दी में देश और सीमा की सुरक्षा करने वाले प्रहरी हैं, तो दूसरी ओर आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से शांति और सद्भाव का संदेश देती ब्रह्माकुमारी बहनें।
राखी के पांच संदेश—जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प
इस अलौकिक रक्षाबंधन के माध्यम से पांच महत्वपूर्ण भावनाओं को केंद्र में रखा गया—‘पवित्रता का रक्षा सूत्र’, ‘ईश्वरीय प्रेम का बंधन’, ‘विकारों से मुक्ति का संकल्प’, ‘शिव बाबा की याद का बंधन’ और ‘सर्व की रक्षा, सर्व का कल्याण।’
ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक अवधारणा में रक्षाबंधन केवल कलाई पर धागा बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि मनुष्य को अपने विचार, व्यवहार और कर्म को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देने वाला अवसर भी है। रक्षा सूत्र व्यक्ति को आत्मसंयम, सकारात्मकता, प्रेम, शांति और मानवीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने का प्रतीक माना जाता है।
जो हमारी रक्षा करते हैं, उनके लिए भी मंगलकामना
इस आयोजन की सबसे विशेष तस्वीर तब सामने आई, जब सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों की कलाई पर ब्रह्माकुमारी बहनों ने राखी बांधी। जो जवान दिन-रात सीमा की निगरानी और नागरिकों की सुरक्षा में खड़े रहते हैं, उनके लिए रक्षा सूत्र के माध्यम से मंगलकामना करना आयोजन को भावनात्मक आयाम देता है।
इसी तरह पुलिस एवं लैंड पोर्ट के अधिकारियों के साथ रक्षाबंधन मनाकर यह संदेश दिया गया कि कर्तव्य और आध्यात्मिकता एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। जिम्मेदारी के साथ यदि संवेदना, शांति और सकारात्मक सोच जुड़ जाए तो सेवा का अर्थ और व्यापक हो जाता है।
‘सर्व की रक्षा, सर्व का कल्याण’
बीके भारती बहन, बीके रीता बहन, बीके उमा बहन और बीके रीना बहन ने अलौकिक रक्षाबंधन के माध्यम से समाज में प्रेम, भाईचारे, पवित्रता और शांति की भावना मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मूल भाव यही रहा कि रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति, परिवार या संबंध की नहीं, बल्कि हर मनुष्य की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण की भावना होनी चाहिए।
रक्सौल की भारत-नेपाल सीमा पर मनाया गया यह अलौकिक रक्षाबंधन मानो एक संदेश छोड़ गया—
> “कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र कुछ समय दिखाई देता है, लेकिन यदि उसका संकल्प मन में उतर जाए तो वह जीवनभर मनुष्य के विचार और कर्म की रक्षा कर सकता है। यही अलौकिक रक्षाबंधन की वास्तविक सुंदरता है—पवित्रता का संकल्प, परमात्मा का स्मरण और सर्व के कल्याण की भावना।”
