‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ के तहत 71वीं वाहिनी की पहल; मुख्यालय, समवायों, विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और गांवों में चला सफाई अभियान
विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
मोतिहारी। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर सशस्त्र सीमा बल की 71वीं वाहिनी ने श्रमदान के जरिए स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। 1 अक्टूबर 2026 को वाहिनी मुख्यालय से लेकर समवायों के कार्यक्षेत्र में स्थित विद्यालयों, सरकारी संस्थानों और गांवों तक सफाई अभियान चलाया गया। अधिकारियों और जवानों ने एक साथ श्रमदान किया तथा आमजन को स्वच्छता अपनाने के लिए जागरूक किया। सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले बल की यह पहल समाज के साथ उसके जुड़ाव को भी सामने लाती है।
वाहिनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बल मुख्यालय के निर्देश पर ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के अंतर्गत ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ श्रमदान गतिविधि आयोजित की गई। इसमें वाहिनी मुख्यालय और सभी समवायों के साथ उनके कार्यक्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक परिसर शामिल रहे। बलकर्मियों ने परिसरों और आसपास के क्षेत्रों की साफ-सफाई करते हुए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण बनाए रखने का संदेश दिया।
इस अभियान में अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी और जवान सभी श्रमदान में सहभागी बने। सार्वजनिक कार्य में इस तरह की साझा भागीदारी का अपना महत्व है। जब नेतृत्व स्वयं किसी काम में हाथ बंटाता है, तो सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश व्यवहार में दिखाई देता है। स्वच्छता जैसे विषय पर यह उदाहरण लोगों को अपने आसपास की सफाई के प्रति सजग होने के लिए प्रेरित कर सकता है।
श्रमदान के साथ अभियान का दूसरा प्रमुख पक्ष जनजागरूकता रहा। आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संदेश दिया गया। साफ परिसर बनाए रखने के लिए नियमित देखभाल और लोगों का सहयोग जरूरी है। इसी सोच के साथ पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना और स्वच्छ वातावरण को साझा जिम्मेदारी के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना रखा गया।
विद्यालयों को अभियान के दायरे में शामिल करना भी विशेष महत्व रखता है। स्कूल बच्चों के सीखने और आदतें विकसित करने के स्थान हैं। वहां स्वच्छता का व्यवहारिक उदाहरण आसपास की जिम्मेदारी समझने में मदद कर सकता है। ऐसे प्रयासों की उपयोगिता तब और बढ़ती है, जब विद्यालय की दैनिक गतिविधियों में साफ-सफाई और परिसर की देखभाल को नियमित स्थान मिले।
इसी तरह सरकारी संस्थानों और गांवों में स्वच्छता की निरंतरता सामुदायिक सहयोग से जुड़ी है। सार्वजनिक स्थानों का उपयोग अनेक लोग करते हैं; उनकी सफाई बनाए रखने में भी सभी की भूमिका होती है। एसएसबी का यह श्रमदान स्थानीय स्तर पर इसी सहभागिता को प्रोत्साहित करने का अवसर देता है। अभियान का व्यापक संदेश अपने आसपास के वातावरण के प्रति सजग रहने और सार्वजनिक सुविधाओं की देखभाल में योगदान देने का है।
सुरक्षा बल और नागरिक समाज के बीच ऐसे अवसर संवाद और सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ाते हैं। स्वच्छता एक ऐसा साझा विषय है, जिससे विद्यालय, संस्थान और गांव सभी जुड़े हैं। इस विषय पर बलकर्मियों का श्रमदान सेवा की उस सामाजिक भूमिका को रेखांकित करता है, जिसमें अनुशासन, सहयोग और नागरिक जिम्मेदारी साथ दिखाई देते हैं।
अब इस पहल की सार्थकता स्वच्छता के संदेश को रोजमर्रा के व्यवहार में आगे बढ़ाने में है। नियमित सफाई, सार्वजनिक परिसरों की देखभाल और लोगों की सक्रिय भागीदारी से ऐसे प्रयास स्थायी असर छोड़ सकते हैं। 71वीं वाहिनी का ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ श्रमदान इसी दिशा में एक प्रेरक पहल है—स्वच्छता की शुरुआत अपने आसपास से होती है और उसकी निरंतरता सबकी भागीदारी से।
