युवाओं का भरोसा ही देश की ताकत

विशेष आलेख | श्यामल प्रतीक
रक्सौल, पूर्वी चंपारण।

युवाओं की मेहनत में उनके परिवार की उम्मीदें और देश का भविष्य बसता है। जब अवसर अनिश्चित हों और समस्याओं की सुनवाई न हो, तो भरोसा कमजोर पड़ सकता है। इसलिए युवाओं को समान अवसर, सम्मान और स्पष्ट दिशा देना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता बिमल सर्राफ ने भी युवाओं की अपेक्षाओं को समझने, पारदर्शिता बढ़ाने और संवाद मजबूत करने की आवश्यकता रेखांकित की है।

शासन की सफलता का पैमाना योजनाओं से लोगों को मिलने वाला वास्तविक लाभ होना चाहिए। समयबद्ध परीक्षाएं, निष्पक्ष चयन, उपयोगी कौशल प्रशिक्षण और शिकायतों पर ठोस कार्रवाई युवाओं का विश्वास बढ़ा सकती है। हर घोषणा के साथ स्पष्ट समयसीमा और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

युवाओं के सवालों में व्यवस्था सुधारने के सुझाव भी हो सकते हैं। उनकी बात सुनना और कार्रवाई का परिणाम बताना लोकतांत्रिक विश्वास को मजबूत करता है। परिवार, शिक्षण संस्थान और मीडिया भी सही जानकारी तथा मार्गदर्शन देकर इसमें योगदान दे सकते हैं।

युवाओं को अवसर में निष्पक्षता, व्यवहार में सम्मान और व्यवस्था में जवाबदेही मिलेगी, तभी उनकी ऊर्जा देश की प्रगति को नई ताकत देगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *