बाढ़ में घिरे परिवारों का सहारा बनी एसएसबी, बचाव के साथ भोजन और उपचार की व्यवस्था

बगहा की 21वीं वाहिनी के दो त्वरित प्रतिक्रिया दलों ने नावों से चलाया अभियान, महिलाओं-बच्चों सहित ग्रामीणों को सुरक्षित पहुँचाया

श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर

बगहा। सीमा की चौकसी के साथ संकट में नागरिकों की सहायता का संकल्प निभा रही सशस्त्र सीमा बल की 21वीं वाहिनी, बगहा ने पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान चलाया। जवानों ने महिलाओं, बच्चों तथा अन्य ग्रामीणों को नावों से सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया। प्रभावित परिवारों के लिए सामुदायिक रसोई, आपात चिकित्सा शिविर और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था भी की गई।

एसएसबी की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, झंडूटोला, चकदवा और आसपास के इलाकों में नावों के साथ दो त्वरित प्रतिक्रिया दल उतारे गए। इन दलों ने बाढ़ में घिरे ग्रामीणों को निकालने के साथ उनके सामान को भी सुरक्षित पहुँचाने में सहायता की। लोगों की सुरक्षा और उनकी आवश्यक वस्तुओं को बचाने का प्रयास अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

आपदा में सुरक्षित ठिकाने तक पहुँचना राहत की पहली जरूरत होती है। इसके बाद परिवारों के सामने भोजन और उपचार की चिंता रहती है। एसएसबी के राहत कार्यों में इन जरूरतों का भी ध्यान रखा गया। सामुदायिक रसोई के माध्यम से भोजन की व्यवस्था की गई, जबकि आपात चिकित्सा शिविर और जरूरी दवाओं से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई गई।

इस अभियान में बचाव और राहत को एक साथ आगे बढ़ाया गया। नावों से लोगों को सुरक्षित निकालने से लेकर भोजन और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तक, बल की गतिविधियाँ प्रभावित परिवारों की तत्काल जरूरतों पर केंद्रित रहीं।

एसएसबी ने बताया कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के साथ निकट समन्वय जारी है। आपदा के बीच बचाव दलों और प्रशासन का यह तालमेल प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुँचाने का महत्वपूर्ण आधार है।

बगहा की 21वीं वाहिनी का यह प्रयास सशस्त्र सीमा बल के ध्येय ‘सेवा, सुरक्षा, बंधुत्व’ को जमीन पर उतारता दिखाई देता है। सीमा पर सतर्कता और संकट के समय नागरिकों की सहायता—जवानों की ये जिम्मेदारियाँ सीमावर्ती समाज के साथ उनके सहयोग और विश्वास के संबंध को मजबूत करती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *