सरहद की रखवाली के साथ संस्कारों की पाठशाला: SSB की नई पीढ़ी ने रंगों में उकेरा ‘मेरा भारत महान’

47वीं वाहिनी SSB रक्सौल की सराहनीय पहल—‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत बच्चों के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

रक्सौल। सरहद की सुरक्षा केवल सीमा पर चौकसी तक सीमित नहीं होती। देश की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण पक्ष आने वाली पीढ़ी के भीतर राष्ट्र के इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों और कर्तव्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी है। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात 47वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), रक्सौल ने स्वतंत्रता दिवस से पहले इसी सोच को एक रचनात्मक पहल के रूप में सामने रखा।

आगामी स्वतंत्रता दिवस और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत 10 अगस्त को 47वीं वाहिनी परिसर में बलकार्मिकों के बच्चों के लिए ‘मेरा भारत महान’ विषय पर चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई।

बच्चों की कल्पना में दिखा भारत

चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों को अपनी कल्पना और रंगों के माध्यम से भारत के प्रति भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अवसर मिला। वहीं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें भारतीय इतिहास और देश से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के प्रति अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता कराना नहीं, बल्कि बच्चों को देशभक्ति की भावना और भारतीय इतिहास से जोड़ना था। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले आयोजित कार्यक्रम ने बच्चों के लिए राष्ट्रप्रेम को सीखने और अभिव्यक्त करने का एक रचनात्मक मंच उपलब्ध कराया।

सीमा प्रहरी की भूमिका सुरक्षा से कहीं आगे

भारत-नेपाल की खुली सीमा पर तैनात SSB के जवान सीमा सुरक्षा की चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक जागरूकता, जनसंपर्क और विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी बल की भागीदारी लगातार दिखाई देती है।

47वीं वाहिनी की यह पहल इसी व्यापक भूमिका का एक सकारात्मक उदाहरण है। एक ओर जवान सीमा पर राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात हैं, तो दूसरी ओर उनके परिवारों के बीच देश के इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

तिरंगा सिर्फ अभियान नहीं, जिम्मेदारी का संदेश

‘हर घर तिरंगा’ अभियान के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि राष्ट्रीय ध्वज केवल स्वतंत्रता दिवस के आयोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की एकता, स्वतंत्रता और गौरव का प्रतीक है।

ऐसे कार्यक्रमों की सार्थकता इसी में है कि नई पीढ़ी स्वतंत्रता दिवस को केवल एक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के इतिहास और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के अवसर के रूप में देखे।

47वीं वाहिनी SSB रक्सौल का यह प्रयास एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—सरहद पर देश की रक्षा करने वाले हाथ जब नई पीढ़ी को इतिहास, तिरंगे और राष्ट्र के मूल्यों से जोड़ते हैं, तब सुरक्षा के साथ राष्ट्र-निर्माण की नींव भी मजबूत होती है।

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