सरहद के प्रहरी, समाज के साथी: 71वीं वाहिनी SSB ने राष्ट्रभक्ति के साथ जगाई सामाजिक चेतना

‘वंदे मातरम्’ से गूंजे सीमावर्ती विद्यालय—हर घर तिरंगा, शिक्षा, स्वच्छता, नशामुक्ति और मोबाइल के सदुपयोग तक पहुंचा जागरूकता का संदेश

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

मोतिहारी। भारत-नेपाल की खुली सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), मोतिहारी इन दिनों केवल सरहद की चौकसी ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती समाज को राष्ट्रभक्ति, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने की दिशा में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ और आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 10 अगस्त को कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में वाहिनी के कार्यक्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में ‘वंदे मातरम् (चरण-3)’ अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए।

विद्यालय परिसरों में जब छात्र-छात्राओं, ग्रामीणों और SSB के जवानों के बीच सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ के स्वर गूंजे, तो यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति कर्तव्य का संदेश देने का माध्यम बन गया।

बच्चों से गांव तक पहुंचा ‘हर घर तिरंगा’ का संदेश

कार्यक्रम के दौरान SSB ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया। विद्यार्थियों और ग्रामीणों को राष्ट्रध्वज के सम्मान, उसकी गरिमा तथा राष्ट्रीय एकता के महत्व के प्रति जागरूक किया गया।

इस पहल का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में बच्चों और युवाओं के बीच राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मूल्यों की समझ विकसित करना सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

SSB की चौपाल में शिक्षा से नशामुक्ति तक की बात

71वीं वाहिनी की पहल केवल राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। गांवों में स्थानीय लोगों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ विलेज मीटिंग आयोजित कर सीधे संवाद स्थापित किया गया।

इस दौरान शिक्षा, स्वच्छता, नशामुक्ति और मोबाइल फोन के सदुपयोग जैसे विषयों पर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। युवाओं और विद्यार्थियों को मोबाइल फोन को शिक्षा, ज्ञान और सकारात्मक संवाद का माध्यम बनाने तथा इसके दुरुपयोग से बचने के लिए प्रेरित किया गया।

यह पहल बताती है कि सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बल और स्थानीय समाज के बीच मजबूत संवाद केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

सीमा की सुरक्षा के साथ विश्वास का रिश्ता

भारत-नेपाल की खुली सीमा अपने आप में विशिष्ट है। यहां सुरक्षा के साथ दोनों देशों के नागरिकों के बीच सदियों पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध भी जुड़े हुए हैं। ऐसे क्षेत्र में SSB की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहती।

ग्रामीणों से संवाद, विद्यालयों में जागरूकता, राष्ट्रीय अभियानों में जनभागीदारी और सामाजिक विषयों पर चर्चा जैसे प्रयास सुरक्षा बल और सीमावर्ती नागरिकों के बीच विश्वास एवं सहयोग का सेतु मजबूत करते हैं।

71वीं वाहिनी द्वारा लगातार समाज के बीच पहुंचकर किए जा रहे ऐसे प्रयास SSB के उस मानवीय पक्ष को सामने रखते हैं, जिसमें वर्दी के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ सामाजिक सरोकार भी दिखाई देता है।

कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में सकारात्मक पहल

कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की भावना को मजबूत करने की शुरुआत नई पीढ़ी और समाज के बीच जागरूकता से भी होती है।

विद्यालयों के बच्चों को ‘वंदे मातरम्’ और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों से जोड़ना तथा गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर संवाद करना इसी व्यापक सोच का हिस्सा दिखाई देता है।

जब सरहद का प्रहरी समाज के बीच पहुंचता है…

सीमा पर मुस्तैद जवान जब गांव की चौपाल और विद्यालय के बच्चों के बीच पहुंचकर शिक्षा, स्वच्छता, नशामुक्ति और राष्ट्रप्रेम की बात करता है, तो वर्दी और आम नागरिक के बीच दूरी कम होती है और भरोसा बढ़ता है।

71वीं वाहिनी SSB, मोतिहारी की यह पहल इसी भरोसे की तस्वीर पेश करती है—जहां एक ओर जवान देश की सीमा की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी और सीमावर्ती समाज में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक बदलाव की भावना को मजबूत करने का प्रयास भी कर रहे हैं।

सीमा की चौकसी से आगे बढ़कर समाज से संवाद—यही तस्वीर SSB को ‘सरहद का प्रहरी’ होने के साथ ‘समाज का साथी’ भी बनाती है।

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