स्कूलों से तैयार हो रही ‘हरित पीढ़ी’: पर्यावरण की पाठशाला बन रही बदलाव की मुहिम

मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग से दी गुरुकुलम में पौधरोपण; डॉ. कमलेश कुमार और पर्यावरणविद् विनय कुमार की पहल विद्यालयों तक पहुंचा रही प्रकृति संरक्षण का संदेश

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

मोतिहारी। पर्यावरण को बचाने की लड़ाई केवल बड़े सम्मेलनों, सरकारी योजनाओं और एक दिन के पौधरोपण से नहीं जीती जा सकती। इसकी असली शुरुआत उस नई पीढ़ी से होगी, जिसके हाथों में आने वाले कल की जिम्मेदारी है। इसी सोच को विद्यालयों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से चल रही ‘पर्यावरण की पाठशाला’ अब पर्यावरणीय जागरूकता की एक निरंतर मुहिम का रूप ले रही है।

इसी कड़ी में मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग तथा नेत्रिका फाउंडेशन एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के बैनर तले दी गुरुकुलम, मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण में पर्यावरण की पाठशाला सह पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेत्रिका फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार एवं डॉ. स्नेहा एस. चौरसिया ने भाग लिया। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने के महत्व से अवगत कराया गया। विद्यालय परिसर में पौधे लगाकर बच्चों को संदेश दिया गया कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा, जब पौधे की देखभाल कर उसे वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखा जाए।

एक कार्यक्रम नहीं, लगातार आगे बढ़ती मुहिम

‘पर्यावरण की पाठशाला’ की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी निरंतरता है। नेत्रिका फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार और पर्यावरणविद् विनय कुमार पिछले कुछ समय से विद्यालयों और बच्चों को केंद्र में रखकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहे हैं।

इससे पहले भी विद्यालयों में पौधरोपण और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की पहल की गई है। उद्देश्य केवल परिसर में पौधे लगाना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर यह समझ विकसित करना है कि पेड़, जल, मिट्टी और स्वच्छ वातावरण की रक्षा उनके भविष्य की रक्षा से सीधे जुड़ी है।

डॉ. कमलेश कुमार और पर्यावरणविद् विनय कुमार की पहल इस विचार को आगे बढ़ाती है कि पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा यदि बचपन से मिले, तो आने वाली पीढ़ी प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी के रूप में देखेगी।

किताबों के साथ प्रकृति की भी पाठशाला

आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, घटती हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव ने पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक आवश्यकता बना दिया है। ऐसे में विद्यालयों में बच्चों को व्यावहारिक रूप से पौधरोपण और संरक्षण से जोड़ना पर्यावरण शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

जब कोई बच्चा अपने हाथों से पौधा लगाता है और उसे बढ़ते हुए देखता है, तो उसके भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का रिश्ता भी विकसित होता है। यही रिश्ता भविष्य में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील समाज की नींव बन सकता है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के निदेशक अभिषेक कुमार, प्राचार्य पिंकी राय, प्रबंधक सुभेन्दु कुमार सहित पूरे विद्यालय परिवार का सहयोग रहा।

संदेश साफ है—पौधा लगाएं, वृक्ष बचाएं

‘पर्यावरण की पाठशाला’ का संदेश पौधरोपण से एक कदम आगे है—पौधा लगाना शुरुआत है, उसे वृक्ष बनाना जिम्मेदारी।

यदि प्रत्येक विद्यालय अपने विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण की इस जिम्मेदारी से जोड़ सके और प्रत्येक बच्चा लगाए गए पौधे को वृक्ष बनने तक संभालने का संकल्प ले, तो आज की छोटी-सी पहल आने वाले वर्षों में बड़े पर्यावरणीय बदलाव की बुनियाद बन सकती है।

क्योंकि पर्यावरण की सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार कानूनों से ही नहीं, जागरूक और जिम्मेदार नई पीढ़ी से भी तैयार होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *