हरसिद्धि से तीन नाबालिग छात्राओं के लापता होने के बाद तत्काल एक्शन में आई मोतिहारी पुलिस; अज्ञात नंबर से मिले सुराग को तकनीकी अनुसंधान से जोड़ा, लोकेशन मिली तो गोरखपुर पहुंच गई टीम
पूर्वी चंपारण में एसपी स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में तकनीक, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई पर आधारित पुलिसिंग लगातार दिखा रही असर
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
मोतिहारी, पूर्वी चंपारण | चाणक्य न्यूज़ इंडिया
तीन नाबालिग छात्राएं अचानक घर से लापता हो जाती हैं। शुरुआती खोजबीन में कोई ठोस सुराग नहीं मिलता। परिवार परेशान है और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—तीनों बच्चियों को जल्द से जल्द सुरक्षित तलाशना।
लेकिन फिर एक अज्ञात मोबाइल नंबर से आया फोन पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल देता है। पुलिस उस एक सुराग को तकनीकी अनुसंधान से जोड़ती है, मोबाइल की लोकेशन निकालती है और समय गंवाए बिना टीम को गोरखपुर रवाना कर देती है।
नतीजा—करीब 36 घंटे के भीतर तीनों नाबालिग छात्राएं सकुशल बरामद।
हरसिद्धि थाना क्षेत्र की यह घटना केवल तीन बच्चियों की सुरक्षित घर वापसी की कहानी नहीं है। यह पूर्वी चंपारण में विकसित हो रही उस पुलिसिंग व्यवस्था की भी तस्वीर प्रस्तुत करती है, जिसमें सूचना पर त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीकी अनुसंधान, विशेष टीम का गठन और अधिकारियों की जवाबदेही को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस व्यवस्था के केंद्र में पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात, आईपीएस का नेतृत्व दिखाई देता है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी वर्तमान में स्वर्ण प्रभात को पूर्वी चंपारण का पुलिस अधीक्षक बताती है।
सूचना मिलते ही विशेष टीम, फिर शुरू हुआ मिशन
हरसिद्धि थाना क्षेत्र से तीन नाबालिग छात्राओं के लापता होने की सूचना पुलिस तक पहुंचते ही मामले को गंभीरता से लिया गया।
पुलिस अधीक्षक के स्तर से विशेष टीम गठित की गई। आसपास के रेलवे स्टेशनों, बसों, संभावित यात्रा मार्गों और छात्राओं के परिचितों से जानकारी जुटाई गई। शुरुआती पड़ताल में कोई निर्णायक सुराग नहीं मिलने के बावजूद पुलिस टीम ने खोज अभियान बंद नहीं किया।
इसी दौरान लापता छात्राओं में से एक ने अपने पिता को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन किया।
उस समय पिता थाने में मौजूद थे।
यहीं से पुलिस ऑपरेशन ने तेजी पकड़ ली।
एक नंबर, तकनीकी लोकेशन और सीधे गोरखपुर
अज्ञात नंबर की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान शुरू किया। संबंधित नंबर की लोकेशन निकाली गई और जैसे ही उसका संकेत गोरखपुर की ओर मिला, पुलिस टीम को तत्काल रवाना कर दिया गया।
पुलिस की यही त्वरित प्रतिक्रिया इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुई।
गोरखपुर पहुंची टीम ने रेलवे स्टेशन के आसपास कार्रवाई करते हुए तीनों नाबालिग छात्राओं को सकुशल बरामद कर लिया।
मामले में 24 वर्षीय चंदन कुमार नामक युवक को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस उसकी भूमिका तथा पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
अवनीश कुमार, प्रीतम कुमार और सशस्त्र बल की अहम भूमिका
इस ऑपरेशन को धरातल पर सफल बनाने वाली पुलिस टीम में अवनीश कुमार, प्रीतम कुमार तथा हरसिद्धि थाना के सशस्त्र बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मोबाइल लोकेशन मिलने के बाद टीम ने समय को सबसे अहम माना। दूसरे राज्य में जाकर तीनों बच्चियों को सुरक्षित बरामद करना पुलिस के समन्वय और त्वरित कार्रवाई का परिणाम रहा।
स्वर्ण प्रभात की पुलिसिंग में ‘रिस्पॉन्स टाइम’ पर जोर
पूर्वी चंपारण में एसपी स्वर्ण प्रभात की कार्यशैली में एक पैटर्न लगातार दिखाई देता है—घटना की सूचना के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया का समय कम करना, थाना स्तर की जिम्मेदारी तय करना और तकनीकी साधनों का ज्यादा इस्तेमाल।
मोतिहारी पुलिस स्वयं अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर अपनी व्यवस्था को “Next-Gen Smart Police” के रूप में प्रस्तुत करती है। पुलिस की वेबसाइट पर ‘Sentinel’ नामक उन्नत स्मार्ट पुलिस मैनेजमेंट एवं इन्वेस्टिगेशन सिस्टम का भी उल्लेख है, जिसे स्वर्ण प्रभात की निगरानी में विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिसिंग केवल कार्यालय से निर्देश देने तक सीमित नहीं दिखाई देती। मई 2026 में एसपी स्वर्ण प्रभात ने आधी रात को बंजरिया थाना क्षेत्र में स्वयं सुरक्षा और रात्रि गश्ती व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया था तथा गश्त को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए थे।
यानी संदेश थाना स्तर तक स्पष्ट है—सूचना मिली है तो कार्रवाई दिखाई भी देनी चाहिए।
बच्चियों की बरामदगी के मामलों में पहले भी दिखी तेजी
यह पहला मौका नहीं है जब पूर्वी चंपारण पुलिस ने नाबालिग लड़कियों की तलाश में कम समय में बड़ी कार्रवाई की हो।
इसी वर्ष जून में शिकारगंज थाना क्षेत्र से लापता हुई चार नाबालिग लड़कियों को पुलिस ने करीब 36 घंटे के भीतर सकुशल बरामद किया था और एक आरोपी को गिरफ्तार किया था।
एक अन्य कार्रवाई में एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर हरसिद्धि थाना क्षेत्र में अवैध आर्केस्ट्रा संचालकों के खिलाफ अभियान के दौरान तीन नाबालिग लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराने की खबर भी सामने आई थी।
इन मामलों को एक साथ देखने पर यह संकेत मिलता है कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े संवेदनशील मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया पूर्वी चंपारण पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।
सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं, अपने पुलिसकर्मियों पर भी जवाबदेही
किसी जिले में मजबूत पुलिसिंग का अर्थ केवल अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होता। पुलिस बल के भीतर अनुशासन और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
स्वर्ण प्रभात के कार्यकाल में पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई के उदाहरण सामने आए हैं। मई 2026 में कोर्ट परिसर में बंदियों से कथित अवैध मुलाकात कराने के मामले में 10 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। वहीं जून में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के लिए विशेष कॉल और व्हाट्सएप व्यवस्था शुरू किए जाने की खबर सामने आई।
इससे पुलिस नेतृत्व की वह कार्यशैली सामने आती है जिसमें अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस तंत्र के भीतर जवाबदेही स्थापित करने का प्रयास भी शामिल है।
तीन बेटियों की सुरक्षित वापसी—सबसे महत्वपूर्ण सफलता
हरसिद्धि की तीन छात्राओं के मामले में पुलिस की सबसे बड़ी उपलब्धि किसी गिरफ्तारी से भी पहले उनकी सकुशल बरामदगी है।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में शुरुआती घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में अज्ञात नंबर से आए फोन को तत्काल जांच की कड़ी बनाना, तकनीकी लोकेशन निकालना, विशेष टीम को दूसरे राज्य तक भेजना और बच्चियों को सुरक्षित वापस लाना पुलिस की कार्यप्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
प्रारंभिक पूछताछ में छात्राओं द्वारा पारिवारिक नाराजगी के कारण घर छोड़ने की बात सामने आई है। वहीं गिरफ्तार युवक की भूमिका और छात्राओं के गोरखपुर तक पहुंचने की परिस्थितियों की पुलिस जांच जारी है।
बदलती पुलिसिंग की एक और मिसाल
पूर्वी चंपारण जैसे विशाल जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था आसान जिम्मेदारी नहीं है। भारत-नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा, लंबा ग्रामीण क्षेत्र, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे नेटवर्क पुलिस के सामने अलग-अलग चुनौतियां खड़ी करते हैं।
ऐसे जिले में पुलिस की सफलता का एक बड़ा पैमाना यह भी है कि संकट में फंसे व्यक्ति तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंचती है।
हरसिद्धि से गोरखपुर तक चले इस ऑपरेशन ने इसी व्यवस्था की परीक्षा ली—और तीन नाबालिग छात्राओं की सकुशल वापसी इसका परिणाम बनी।
एसपी स्वर्ण प्रभात के नेतृत्व में त्वरित प्रतिक्रिया, तकनीकी अनुसंधान और टीम आधारित कार्रवाई की जो कार्यसंस्कृति विकसित होती दिखाई दे रही है, यह मामला उसकी एक प्रभावशाली मिसाल बनकर सामने आया है।
और अंततः किसी भी पुलिसिंग की सबसे बड़ी उपलब्धि आंकड़े नहीं, बल्कि वह क्षण होता है जब लापता बच्चा सुरक्षित अपने परिवार तक वापस पहुंचता है।
चाणक्य न्यूज़ इंडिया के लिए
श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता
