बापू के विचारों की जीवंत पाठशाला: मोतिहारी का गांधी संग्रहालय

गांधी जयंती पर पुस्तक प्रदर्शनी ने चंपारण सत्याग्रह और गांधी साहित्य से जुड़ने का अवसर दिया

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक

मोतिहारी। चंपारण के किसान संघर्ष और गांधीजी के सत्याग्रह की स्मृतियों को संजोए गांधी संग्रहालय नई पीढ़ी को इतिहास और मानवीय मूल्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है। गांधी जयंती पर यहाँ आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी ने बापू के विचारों को पढ़ने और समझने का अवसर दिया।

जिला सर्वोदय मंडल की ओर से आयोजित ‘गांधी दर्शन स्मृति साहित्य पुस्तक प्रदर्शनी’ में ‘चंपारण में महात्मा गांधी’, ‘चंपारण का सत्याग्रह’, गांधीजी की आत्मकथा तथा सत्याग्रह और चंपारण से संबंधित पुस्तकों की बिक्री हुई। शहर के गांधीजन और बुद्धिजीवियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन के अनुसार, संग्रहालय में चंपारण सत्याग्रह से जुड़ी तस्वीरें और स्मृति-सामग्री प्रदर्शित हैं। परिसर का 48 फीट ऊँचा स्मारक स्तंभ 18 अप्रैल 1917 की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब गांधीजी मोतिहारी की अदालत में उपस्थित हुए थे। यह धरोहर किसानों के अधिकारों के लिए हुए संघर्ष से परिचय कराती है।

किसान राजकुमार शुक्ल के लगातार आग्रह पर गांधीजी चंपारण आए थे। यहाँ तिनकठिया व्यवस्था के तहत किसानों को अपनी जमीन के बीस में से तीन हिस्सों पर नील उगानी पड़ती थी। किसानों की शिकायतों की जाँच और संगठित प्रयासों से इस व्यवस्था को समाप्त करने का रास्ता खुला। गांधीजी की आत्मकथा में दर्ज यह इतिहास साहस, जनभागीदारी और निरंतर प्रयास का महत्व सामने रखता है।

इसी पृष्ठभूमि में संग्रहालय का शैक्षिक महत्व समझ आता है। यहाँ की ऐतिहासिक सामग्री विद्यार्थियों को अपने जिले के अतीत और स्वतंत्रता आंदोलन के संबंध से परिचित करा सकती है। गांधी साहित्य का अध्ययन सत्य, अहिंसा और सार्वजनिक जिम्मेदारी पर विचार करने का अवसर देता है। पुस्तक प्रदर्शनी जैसे आयोजन इस विरासत को पाठकों तक पहुँचाने का उपयोगी माध्यम हैं।

प्रदर्शनी का अवलोकन करने वालों में मछुआरा आयोग के अध्यक्ष लालन सहनी, उप मेयर डॉ. लालबाबू प्रसाद, डॉ. हेना चंद्रा, डॉ. अतुल कुमार, अधिवक्ता रजीव शंकर वर्मा, डॉ. संतोष कुमार, पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार, पूर्व मुख्य पार्षद प्रकाश अस्थाना, अधिवक्ता शम्भू शरण सिंह, कौशल किशोर, साजिद रजा, गुलरेज शहजाद, वीना मिश्रा, दीपक पटेल और दिग्विजय कुमार सहित अन्य गांधीजन एवं बुद्धिजीवी शामिल रहे।

प्रदर्शनी का संचालन राजगुरु और बसन्त कुमार राय ने किया। आयोजन को सफल बनाने में गांधी संग्रहालय के सचिव विनय कुमार सिंह की अहम भूमिका रही।

नियमित अध्ययन भ्रमण, पुस्तक चर्चा और स्थानीय सत्याग्रहियों पर संवाद के माध्यम से इस धरोहर का शैक्षिक उपयोग और बढ़ाया जा सकता है। गांधी संग्रहालय से जुड़ना चंपारण के इतिहास को समझने और उसके मूल्यों को आगे ले जाने का अवसर है।

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