दक्षिण सूडान में UN के नीले झंडे तले भारतीय सैनिकों की सेवा और भारतीय सैन्य नेतृत्व—देश के लिए गर्व की एक वैश्विक कहानी
श्यामल प्रतीक की कलम से
दुनिया जब संघर्ष, हिंसा और मानवीय संकटों से जूझती है, तब शांति की रक्षा केवल समझौतों और कूटनीतिक दस्तावेजों से नहीं होती। कभी-कभी इसके लिए हजारों किलोमीटर दूर से आए उन सैनिकों को जमीन पर खड़ा होना पड़ता है, जिनका उस धरती से कोई निजी स्वार्थ नहीं होता—लेकिन वहां रहने वाले इंसानों की जिंदगी बचाना उनका कर्तव्य बन जाता है।
दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन—UNMISS—इसी भावना का एक जीवंत उदाहरण है।
संयुक्त राष्ट्र के नीले झंडे के नीचे विभिन्न देशों के शांतिरक्षक नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करने के प्रयासों में जुटे हैं।
और एक भारतीय होने के नाते मेरे लिए गर्व की बात यह है कि इस वैश्विक शांति प्रयास में भारत केवल एक सहभागी देश नहीं है। भारतीय सैनिकों ने जमीन पर शांति की रक्षा की है और भारतीय सैन्य नेतृत्व ने इस विशाल बहुराष्ट्रीय शांति सेना की कमान भी संभाली है।
भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल मोहन सुब्रमण्यम ने जुलाई 2022 से 2026 तक UNMISS के Force Commander के रूप में हजारों बहुराष्ट्रीय शांतिरक्षकों का नेतृत्व किया। यह केवल एक भारतीय सैन्य अधिकारी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं थी; यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता, अनुशासन और नेतृत्व पर जताए गए विश्वास का प्रतीक भी था।
हमें अपने देश पर गर्व होना चाहिए कि भारत के सैनिक संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में केवल सेवा देने नहीं जाते—भारत ने इन अभियानों को नेतृत्व भी दिया है।
दक्षिण सूडान में भारतीय Blue Helmets की भूमिका बंदूक और सैन्य चौकियों तक सीमित नहीं है। संघर्ष से प्रभावित इलाकों में गश्त, नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता पहुंचाने वाले संगठनों के लिए सुरक्षित वातावरण और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास निर्माण—शांतिरक्षकों की जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
जब भारत का कोई सैनिक अपने घर, परिवार और मातृभूमि से हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका की धरती पर किसी अनजान नागरिक की सुरक्षा के लिए खड़ा होता है, तब उसकी वर्दी पर लगा तिरंगा केवल उसकी राष्ट्रीय पहचान नहीं रहता—वह भारत के मानवीय मूल्यों का संदेशवाहक बन जाता है।
यही कारण है कि मैं United Nations Peacekeeping को केवल एक सैन्य अभियान के रूप में नहीं देखता। मेरे लिए यह दुनिया के उस सामूहिक संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और देशों से आए सैनिक एक ही उद्देश्य के लिए खड़े होते हैं—मानव जीवन की रक्षा और शांति की स्थापना।
और जब इस वैश्विक प्रयास में भारत के सैनिक अग्रिम पंक्ति में दिखाई देते हैं, तथा भारत का एक जनरल बहुराष्ट्रीय शांतिरक्षकों का नेतृत्व करता है, तब यह प्रत्येक भारतीय के लिए सम्मान और गर्व का विषय बन जाता है।
भारत ने दुनिया को केवल युद्धभूमि में अपनी सैन्य क्षमता नहीं दिखाई है; भारत ने यह भी दिखाया है कि एक शक्तिशाली सेना का सर्वोच्च गौरव केवल युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि शांति की रक्षा करने में भी है।
दक्षिण सूडान की धरती से आती भारतीय Blue Helmets की तस्वीरें इसलिए मेरे लिए सिर्फ सैनिकों की तस्वीरें नहीं हैं। उनमें मैं उस भारत को देखता हूं जो अपनी सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर भी मानवता के साथ खड़ा है।
क्योंकि शांति की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती,
मानवता की कोई सीमा नहीं होती।
और जब संयुक्त राष्ट्र का नीला हेलमेट, भारतीय सैनिक की वर्दी और उसके कंधे पर तिरंगा एक साथ दिखाई देते हैं, तब दुनिया के सामने एक संदेश बहुत स्पष्ट हो जाता है—
“भारत केवल अपनी सीमाओं का प्रहरी नहीं, विश्व शांति का भी एक विश्वसनीय प्रहरी है।”
यह हमारे सैनिकों का सम्मान है।
यह भारतीय सेना की प्रतिष्ठा है।
और सबसे बढ़कर—यह भारत के लिए गर्व की बात है।
जय हिंद 🇮🇳 | शांति के लिए भारत 🇺🇳
— श्यामल प्रतीक
Chanakya News India
