मुख्य गेट तोड़कर घर खंगाला; FSL और डॉग स्क्वॉड जांच में जुटे—दो माह से बंद मकान की जानकारी चोरों तक कैसे पहुंची, बड़ा सवाल
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
आदापुर/पूर्वी चंपारण। आदापुर थाना क्षेत्र में चोरों के बढ़ते दुस्साहस ने पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब अज्ञात चोरों ने शिवहर की पूर्व सांसद रामा देवी और पूर्व मंत्री श्याम बिहारी प्रसाद के भेड़िहरी स्थित पैतृक आवास को निशाना बनाकर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चोर मुख्य गेट तोड़कर घर में दाखिल हुए और अंदर के कमरों व सामान को खंगाल डाला। मकान करीब दो महीने से बंद बताया जा रहा है, क्योंकि पूर्व मंत्री इलाज के सिलसिले में परिवार के साथ दिल्ली में हैं।
ऐसे में इस वारदात का सबसे अहम पहलू यह है कि अपराधियों को मकान के लंबे समय से बंद होने की जानकारी कैसे मिली? क्या वारदात से पहले घर की रेकी की गई थी या अपराधियों को परिवार की गतिविधियों की पहले से जानकारी थी? पुलिस जांच में इन सवालों की तह तक पहुंचना महत्वपूर्ण होगा।
सुबह टूटा मिला मुख्य गेट, तब सामने आई वारदात
रविवार सुबह सफाईकर्मी भिखारी पटेल परिसर की सफाई के लिए पहुंचे तो मुख्य गेट टूटा हुआ मिला। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस को इसकी सूचना दी गई।
आदापुर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल को सुरक्षित किया और जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए FSL टीम और डॉग स्क्वॉड की सहायता ली जा रही है। घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के साथ आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और संदिग्ध गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।
चोरों का बढ़ता हौसला, आदापुर पुलिस के सामने चुनौती
आदापुर थाना क्षेत्र में चोरी को लेकर सामने आ रही घटनाओं और अब एक पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री के पैतृक आवास तक चोरों के पहुंच जाने से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।
सवाल यह है कि आखिर चोरों का हौसला इतना कैसे बढ़ रहा है? रात्रि गश्ती कितनी प्रभावी है? बंद पड़े मकानों की निगरानी और संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस का सूचना तंत्र कितना मजबूत है?
यह घटना आदापुर पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती भी है। आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ यदि किसी सक्रिय गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी होगा।
रेकी या संगठित गिरोह? जांच से खुलेगा राज
चोरों ने इसी मकान को क्यों चुना, क्या पहले रेकी की गई थी, घटना में कितने लोग शामिल थे और चोरी के पीछे किसी गिरोह की भूमिका है या नहीं—इन सभी बिंदुओं पर जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल किसी गिरोह अथवा व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पुलिस जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
कितनी संपत्ति चोरी हुई, अभी स्पष्ट नहीं
घर से कितनी नकदी, आभूषण अथवा अन्य सामान चोरी हुआ है, इसका सटीक आकलन अभी सामने नहीं आया है। परिवार के सदस्यों के लौटने और सामान का मिलान करने के बाद ही वास्तविक नुकसान स्पष्ट हो सकेगा।
आदापुर इंस्पेक्टर रंजय कुमार के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। FSL और डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई है तथा आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
अब निगाह खुलासे पर
पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री के पैतृक आवास में हुई चोरी को सामान्य वारदात मानकर छोड़ना आसान नहीं होगा। घटना का शीघ्र खुलासा और आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—दो महीने से बंद मकान की जानकारी चोरों तक कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे पहले से की गई रेकी थी?
इस सवाल का जवाब न केवल इस चोरी की परतें खोल सकता है, बल्कि आदापुर क्षेत्र में सक्रिय अपराधियों के तौर-तरीकों के बारे में भी महत्वपूर्ण सुराग दे सकता है।
