विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस पर मोतिहारी में एसएसबी–पुलिस–एनजीओ का साझा मंथन
एसपी स्वर्ण प्रभात बोले— “जागरूक समाज और समन्वित कार्रवाई ही मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ सकती है”
विशेष संवाददाता | चाणक्य न्यूज़ इंडिया
मोतिहारी | 29 जुलाई
भारत–नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मानव तस्करी जैसी संगठित चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस के अवसर पर मोतिहारी पुलिस द्वारा पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात (IPS) की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारी (CWPO), विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों तथा विषय विशेषज्ञों ने भाग लेकर मानव तस्करी की रोकथाम के लिए संयुक्त रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला में 71वीं वाहिनी एसएसबी, मोतिहारी की ओर से निरीक्षक (GD) अमित कुमार एवं उपनिरीक्षक (GD) ऋषभ सिंह रावत ने भाग लिया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत–नेपाल सीमा पर मानव तस्करी, बाल तस्करी तथा अन्य सीमापार अपराधों की रोकथाम के लिए एसएसबी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि एसएसबी केवल सीमा की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती गांवों, विद्यालयों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाकर बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को मानव तस्करी के खतरों से भी अवगत कराती है। पुलिस, गैर-सरकारी संगठनों तथा अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़ितों के बचाव, संरक्षण और पुनर्वास के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।
मानव तस्करी विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं निरीक्षक अमित कुमार
कार्यक्रम के दौरान निरीक्षक (GD) अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी के विरुद्ध लड़ाई केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और समय पर सूचना देना भी उतना ही आवश्यक है। भारत–नेपाल सीमा पर तैनाती के दौरान वे सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों, विद्यालयों में बाल सुरक्षा अभियानों तथा विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वित कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर सतर्क निगरानी, स्थानीय लोगों का सहयोग और संस्थागत समन्वय मानव तस्करी रोकने की सबसे प्रभावी रणनीति है।
स्वर्ण प्रभात की प्राथमिकता— सुरक्षित बचपन, सुरक्षित सीमा
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात (IPS) ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि मानव तस्करी केवल पुलिस का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने 71वीं वाहिनी एसएसबी द्वारा सीमावर्ती विद्यालयों में बच्चों को जागरूक करने, ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम करने तथा सीमा पर सघन निगरानी रखने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूकता, त्वरित सूचना, एजेंसियों के बीच समन्वय और संवेदनशील पुलिसिंग है। उन्होंने सभी थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल सुरक्षा एवं मानव तस्करी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कार्यशाला में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों एवं विषय विशेषज्ञों ने मानव तस्करी से संबंधित कानूनी प्रावधानों, पीड़ितों के अधिकारों, पुनर्वास की प्रक्रिया तथा पूर्वी चंपारण में चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी साझा की। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सीमा सुरक्षा बल, पुलिस, सामाजिक संगठन और स्थानीय समुदाय के बीच मजबूत समन्वय से ही मानव तस्करी के नेटवर्क को प्रभावी ढंग से ध्वस्त किया जा सकता है।
मानव तस्करी रोकने में एसएसबी की प्रमुख भूमिका
– भारत–नेपाल सीमा पर 24 घंटे सतर्क निगरानी।
– सीमावर्ती विद्यालयों एवं गांवों में नियमित जागरूकता अभियान।
– संदिग्ध सीमापार गतिविधियों की पहचान एवं जांच।
– पुलिस, बाल संरक्षण इकाइयों एवं एनजीओ के साथ संयुक्त कार्रवाई।
– पीड़ितों के बचाव, संरक्षण एवं पुनर्वास में सक्रिय सहयोग
— रिपोर्ट: श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता | चाणक्य न्यूज़ इंडिया
