नेपाल से भारतीय क्षेत्र में लाई जा रही 30 बोतल नेपाली शराब बरामद; नाबालिग की कथित संलिप्तता ने बढ़ाई मामले की संवेदनशीलता—सीमा सुरक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही SSB
विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
भारत–नेपाल सीमा/मोतिहारी।
भारत और नेपाल के बीच खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा दोनों देशों के सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की पहचान है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोनों देशों के नागरिक वैध आवश्यकताओं के लिए सीमा से आवाजाही करते हैं। ऐसे में इस खुली व्यवस्था की सुरक्षा करते हुए सामान्य नागरिकों की सहज आवाजाही को बनाए रखना सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक विशेष जिम्मेदारी है।
इसी जिम्मेदारी के बीच 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), मोतिहारी की लगातार सतर्कता एक बार फिर सामने आई है। समवाय कोरैया की पेट्रोलिंग पार्टी ने सीमा क्षेत्र में गश्त के दौरान नेपाल से भारतीय क्षेत्र की ओर लाई जा रही नेपाली ब्रांड ‘कस्तूरी’ शराब की 30 बोतलें बरामद कीं।
इस कार्रवाई का संवेदनशील पहलू यह है कि मामले में पकड़ा गया व्यक्ति करीब 15 वर्ष का किशोर बताया गया है। इसलिए प्रकरण को केवल शराब बरामदगी के रूप में देखने के बजाय बाल संरक्षण और नाबालिगों को अवैध गतिविधियों से बचाने के दृष्टिकोण से भी देखना महत्वपूर्ण है।
श्यामपुर मार्ग पर सतर्क पेट्रोलिंग का परिणाम
प्राप्त जानकारी के अनुसार 71वीं वाहिनी SSB के समवाय कोरैया की पेट्रोलिंग पार्टी सीमा क्षेत्र में नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान श्यामपुर मार्ग की ओर सफेद प्लास्टिक का बोरा लेकर नेपाल से भारत की तरफ आते एक संदिग्ध किशोर पर जवानों की नजर पड़ी।
बताया गया कि रोकने का प्रयास किए जाने पर उसने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क जवानों ने उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान बोरे से नेपाली ब्रांड ‘कस्तूरी’ शराब की 30 बोतलें, प्रत्येक 300 मिलीलीटर, बरामद होने की बात सामने आई।
आवश्यक कार्रवाई के बाद किशोर एवं बरामद सामग्री को आगे की विधिक प्रक्रिया के लिए संबंधित पुलिस को सौंप दिया गया।
सतर्कता का महत्व केवल एक बरामदगी तक सीमित नहीं
71वीं वाहिनी की यह कार्रवाई बताती है कि भारत–नेपाल की खुली सीमा पर नियमित पेट्रोलिंग कितनी महत्वपूर्ण है।
सीमा क्षेत्र में मुख्य चेक पोस्ट के अतिरिक्त अनेक ग्रामीण संपर्क मार्ग और पगडंडियां हैं। इनका उपयोग दोनों देशों के सीमावर्ती नागरिक दशकों से सामान्य सामाजिक एवं पारिवारिक आवाजाही के लिए करते आए हैं। इसी भौगोलिक संरचना के कारण सुरक्षा व्यवस्था में निरंतर गश्त, स्थानीय सूचना तंत्र और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऐसे में छोटी दिखने वाली अवैध गतिविधि को समय रहते रोकना भी सीमा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
नाबालिग की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण
इस घटना में एक विशेष पहलू नाबालिग की कथित संलिप्तता है।
यदि कोई बच्चा किसी अवैध गतिविधि में पाया जाता है, तो मामला केवल कानून-प्रवर्तन का नहीं रहता, बल्कि बाल संरक्षण का विषय भी बन जाता है। बच्चे की परिस्थितियों, उसके संपर्क में रहे लोगों और उसे इस स्थिति तक पहुंचाने वाले संभावित कारणों की जांच सक्षम एजेंसियों द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना महत्वपूर्ण है।
इसी कारण किशोर की पहचान, उसके परिवार तथा अन्य पहचान योग्य विवरण सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं।
यह दृष्टिकोण अपराध के विरुद्ध कार्रवाई और बच्चे के अधिकारों की सुरक्षा—दोनों के बीच आवश्यक संतुलन स्थापित करता है।
सीमा सुरक्षा से आगे SSB की सामाजिक भूमिका
71वीं वाहिनी SSB की भूमिका को केवल अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई तक सीमित करके देखना इसकी जिम्मेदारियों की अधूरी तस्वीर होगी।
सीमावर्ती क्षेत्रों में SSB के जवान स्थानीय नागरिकों के बीच रहते और काम करते हैं। सीमा की निगरानी के साथ बल द्वारा समय-समय पर मानव तस्करी एवं बाल सुरक्षा के प्रति जागरूकता, नशा विरोधी अभियान, स्वास्थ्य एवं नागरिक कल्याण कार्यक्रम, पौधारोपण, युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम तथा महिलाओं के कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता की जाती रही है।
इस प्रकार सीमा पर SSB की उपस्थिति का महत्व दो स्तरों पर दिखाई देता है—एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध गतिविधियों की रोकथाम, दूसरी तरफ सीमावर्ती नागरिकों के साथ विश्वास एवं सहयोग का संबंध।
मानव तस्करी और नशे के विरुद्ध जागरूकता भी महत्वपूर्ण
भारत–नेपाल सीमा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बच्चों और युवाओं को मानव तस्करी, नशे तथा अन्य अवैध गतिविधियों से बचाने के लिए केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए समुदाय की भागीदारी और जागरूकता भी आवश्यक है।
इसी संदर्भ में SSB द्वारा सीमावर्ती गांवों और शिक्षण संस्थानों में आयोजित जागरूकता गतिविधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब सुरक्षा बल स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं के साथ संवाद स्थापित करते हैं, तो इसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षा व्यवस्था का सहभागी बनाना भी होता है।
भारत–नेपाल मैत्री और सुरक्षित सीमा—दोनों महत्वपूर्ण
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा दोनों देशों के विशिष्ट संबंधों का प्रतीक है। सीमा के दोनों ओर रहने वाले परिवारों के बीच रिश्तेदारी, व्यापार, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं।
इसलिए सीमा प्रबंधन का उद्देश्य सामान्य नागरिकों के इन संबंधों को बाधित करना नहीं, बल्कि ऐसी अवैध गतिविधियों को रोकना है जो इसी खुली व्यवस्था का दुरुपयोग करती हैं।
यहां SSB की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है—मैत्रीपूर्ण सीमा की प्रकृति को बनाए रखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करना।
श्यामल प्रतीक का विश्लेषण
भारत–नेपाल सीमा की सुरक्षा को केवल जब्ती और गिरफ्तारी के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। वास्तविक प्रभाव उस निरंतर उपस्थिति, गश्त, सूचना तंत्र और स्थानीय समुदाय से समन्वय में दिखाई देता है, जिसके कारण संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान संभव होती है।
श्यामपुर मार्ग पर 30 बोतल नेपाली शराब की बरामदगी संख्या के लिहाज से भले बड़ी न लगे, लेकिन एक नाबालिग की कथित संलिप्तता इसे संवेदनशील बनाती है। ऐसी कार्रवाई संभावित रूप से कमजोर किशोरों को अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने से रोकने की आवश्यकता को भी सामने लाती है।
71वीं वाहिनी SSB की भूमिका इसलिए केवल सीमा की निगरानी करने वाले सुरक्षा बल की नहीं है। सीमावर्ती समाज में उसकी मौजूदगी सुरक्षा, जागरूकता, नागरिक सहयोग और विश्वास निर्माण से भी जुड़ी है।
भारत–नेपाल की खुली सीमा पर यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है—
> सीमा सुरक्षित रहे, दोनों देशों के नागरिकों के पारंपरिक संबंध सहज बने रहें और अवैध गतिविधियों के लिए इस खुली व्यवस्था का दुरुपयोग न होने पाए।
71वीं वाहिनी की सतर्क पेट्रोलिंग की यह कार्रवाई इसी व्यापक जिम्मेदारी का एक उदाहरण है।
— विशेष कवर स्टोरी
श्यामल प्रतीक
भारत–नेपाल सीमा | सुरक्षा एवं सामाजिक सरोकार
