शिक्षक दिवस पर प्रकृति बनी शिक्षक: नन्हे हाथों ने रोपे पौधे, बैरिया से उठी हरियाली बचाने की मुहिम

मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग से नेत्रिका फाउंडेशन व पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की पहल; ‘पर्यावरण की पाठशाला’ में बच्चों ने सीखा—पौधा लगाना ही नहीं, उसे बचाना भी हमारी जिम्मेदारी

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
कोटवा, पूर्वी चंपारण

शिक्षक दिवस पर कहीं गुरुजनों का सम्मान हो रहा था, कहीं बच्चे अपने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त कर रहे थे। लेकिन पूर्वी चंपारण के कोटवा प्रखंड स्थित राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बैरिया में इस खास दिन की तस्वीर कुछ अलग थी।

यहां कक्षा की चारदीवारी से बाहर प्रकृति खुद एक शिक्षक की भूमिका में नजर आई।

बच्चों के हाथों में किताब-कॉपी के साथ पौधे थे और सामने था एक बड़ा संदेश—आज लगाया गया एक पौधा आने वाले कल की सांसों की सुरक्षा बन सकता है।

विद्यालय में लगी ‘पर्यावरण की पाठशाला’

मोतिहारी वन प्रमंडल, मोतिहारी के सहयोग से नेत्रिका फाउंडेशन एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के बैनर तले शिक्षक दिवस के अवसर पर विद्यालय में ‘पर्यावरण की पाठशाला सह पौधरोपण कार्यक्रम’ आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में विद्यालय के इको क्लब के सदस्यों के साथ छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। बच्चों ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया।

नन्हे हाथों ने संभाली हरियाली की जिम्मेदारी

पौधरोपण का यह कार्यक्रम केवल पौधे जमीन में लगाने तक सीमित नहीं रहा। इसके पीछे बच्चों को प्रकृति के करीब लाने और कम उम्र से ही उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने की सोच दिखाई दी।

जब कोई बच्चा अपने हाथों से पौधा लगाता है, उसे बढ़ते हुए देखता है और उसकी देखभाल करता है, तब पर्यावरण संरक्षण उसके लिए केवल किताब का अध्याय नहीं रह जाता—वह उसके जीवन का अनुभव बन जाता है।

इसी सोच के साथ ‘पर्यावरण की पाठशाला’ ने बच्चों को प्रकृति और हरियाली से जोड़ने का प्रयास किया।

कक्षा से बाहर भी होती है जीवन की पढ़ाई

स्कूल बच्चों को अक्षर ज्ञान देता है, लेकिन पर्यावरण की रक्षा जैसे विषय उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा भी दिखाते हैं।

पेड़, पानी, मिट्टी और स्वच्छ हवा का महत्व आने वाली पीढ़ी जितनी जल्दी समझेगी, पर्यावरण संरक्षण की नींव उतनी ही मजबूत होगी।

बैरिया के इस विद्यालय में शिक्षक दिवस पर हुआ आयोजन इसी विचार को जमीन पर उतारता दिखाई दिया—गुरु से ज्ञान और प्रकृति से जीवन का पाठ।

इको क्लब के बच्चों की भागीदारी बनी खास

कार्यक्रम में इको क्लब के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी विशेष रही। छात्र-छात्राओं ने पौधरोपण में हिस्सा लेकर यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार, वन विभाग या सामाजिक संगठनों का काम नहीं है।

इस अभियान में विद्यालय, शिक्षक, बच्चे, परिवार और समाज—सभी की भागीदारी जरूरी है।

विद्यालय परिसर में रोपे गए ये पौधे आने वाले दिनों में कितने बड़े वृक्ष बनेंगे, यह उनकी देखभाल पर निर्भर करेगा; लेकिन बच्चों के मन में पर्यावरण के प्रति पैदा हुई चेतना इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि कही जा सकती है।

विद्यालय परिवार का रहा महत्वपूर्ण सहयोग

कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार चौधरी एवं विद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजन से जुड़े लोगों ने प्रधानाध्यापक और पूरे विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।

मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग तथा नेत्रिका फाउंडेशन और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की इस पहल ने शिक्षक दिवस को एक अलग संदेश दिया।

बैरिया के बच्चों ने पौधे रोपकर शायद एक छोटी शुरुआत की है, लेकिन संदेश बहुत बड़ा है—जिस धरती से हमें जीवन मिला है, उसकी हरियाली को बचाना भी हमारी ही जिम्मेदारी है।

और शिक्षक दिवस पर इससे बेहतर पाठ शायद ही कोई हो सकता है—प्रकृति को बचाइए, क्योंकि इसी से भविष्य बचेगा।

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