सरहद के प्रहरी बने आत्मनिर्भरता के सारथी

सीमा की चौकसी के साथ बेटियों के हाथों में हुनर, 71वीं वाहिनी SSB की पहल से खुली स्वरोजगार की राह

विशेष कवर स्टोरी | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

मोतिहारी/झरोखर। सरहद की सुरक्षा केवल सीमा स्तंभों की निगरानी और गश्त तक सीमित नहीं होती। सीमा तब और मजबूत होती है, जब उसके आसपास बसे गांव सुरक्षित हों, समाज जागरूक हो और वहां की महिलाएं एवं युवतियां आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें। भारत-नेपाल सीमा पर तैनात 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) इसी सोच को अपने सामाजिक सरोकारों के माध्यम से जमीन पर उतारती दिखाई दे रही है।

इसी कड़ी में 12 अगस्त 2026 को समवाय मुख्यालय जमुनिया द्वारा झरोखर पंचायत के पंचायत सरकार भवन, पिठवा में सीमावर्ती महिलाओं एवं युवतियों के लिए आयोजित 30 दिवसीय निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया।

30 दिनों में मिला हुनर, अब आत्मनिर्भरता की ओर कदम

9 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक चले प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र की महिलाओं एवं युवतियों को सिलाई का व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था, ताकि वे भविष्य में इसे स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकें।

समापन समारोह उप कमांडेंट राकेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि झरोखर पंचायत की वार्ड सदस्य सविता देवी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

प्रशिक्षण पूरा करने वाली सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। साथ ही उन्हें प्रशिक्षण के दौरान अर्जित कौशल को केवल प्रमाण-पत्र तक सीमित न रखकर उसे स्वरोजगार और आजीविका का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

जब वर्दी समाज के बीच विश्वास का रिश्ता बनाती है

SSB की प्राथमिक जिम्मेदारी देश की सीमाओं की सुरक्षा है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय और विश्वास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

महिला कौशल विकास जैसे कार्यक्रम इसी सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करते हैं। एक महिला को मिला हुनर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। उसका लाभ परिवार और आसपास के समाज तक पहुंच सकता है।

यही कारण है कि सीमावर्ती बेटियों के हाथों में हुनर देना केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और अवसर से जोड़ने की एक पहल भी है।

‘श्री अन्न’ से स्वास्थ्य और पोषण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को मोटे अनाज यानी ‘श्री अन्न’ के उपयोग और उनके पोषण संबंधी लाभों के बारे में भी जागरूक किया गया।

इससे आयोजन का दायरा सिलाई प्रशिक्षण से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, पोषण और जन-जागरूकता तक पहुंचा।

‘हर घर तिरंगा’ से राष्ट्रप्रेम का आह्वान

आगामी स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए समारोह में ‘वन्दे मातरम् (चरण-3)’ एवं ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया।

नागरिकों को अपने घरों पर सम्मानपूर्वक तिरंगा फहराने तथा राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गया।

सरहद की मजबूती में समाज की भागीदारी

भारत-नेपाल की खुली सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास का रिश्ता विशेष महत्व रखता है। जब सुरक्षा बल गांवों तक पहुंचकर कौशल विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और राष्ट्रीय जागरूकता जैसे विषयों से लोगों को जोड़ते हैं, तो सुरक्षा और समाज के बीच साझेदारी और मजबूत होती है।

71वीं वाहिनी SSB की यह पहल इसी व्यापक भूमिका की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है—एक तरफ सीमा की चौकसी और दूसरी तरफ सीमावर्ती महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए हुनर से जोड़ने का प्रयास।

सरहद के प्रहरी, आत्मनिर्भरता के सारथी

समापन समारोह के साथ 30 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जरूर पूरा हो गया, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता की कहानी अब लिखी जानी है। जब प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं और युवतियां अपने हुनर को रोजगार में बदलेंगी, तभी इस पहल का वास्तविक उद्देश्य जमीन पर दिखाई देगा।

सीमा पर तैनात जवान देश की सरहद की रक्षा करते हैं, लेकिन जब वही बल सीमावर्ती गांवों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करता है, तो वर्दी और समाज के बीच भरोसे का रिश्ता और गहरा होता है।

श्यामल प्रतीक की कलम से

“सरहद की असली मजबूती केवल चौकसी में नहीं, बल्कि उसके आसपास बसे समाज के विश्वास और सामर्थ्य में भी होती है। जब सीमा की कोई बेटी अपने हाथों के हुनर से आत्मनिर्भर बनने की राह पकड़ती है, तो वह केवल अपना भविष्य नहीं संवारती—वह अपने परिवार और समाज के लिए भी नई संभावना पैदा करती है। 71वीं वाहिनी SSB की यह पहल उन प्रयासों को समर्पित है, जिनमें वर्दी सुरक्षा के साथ समाज की साथी बनकर सामने आती है।”

— श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

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