गाँव-गाँव स्वास्थ्य की रोशनी पहुँचा रहे हैं डॉ. मनीष कुमार, आरोग्य चैरिटेबल ट्रस्ट का 17वाँ निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भरतमही में संपन्न
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल, 28 जुलाई।
चिकित्सा केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। जब कोई चिकित्सक अपने अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकलकर ग्रामीणों के बीच पहुँचता है, उनके स्वास्थ्य की चिंता करता है और बिना किसी आर्थिक अपेक्षा के उपचार एवं जागरूकता का अभियान चलाता है, तब वह केवल डॉक्टर नहीं रहता—वह समाज के विश्वास का आधार बन जाता है।
रक्सौल के आरोग्य चैरिटेबल ट्रस्ट हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. मनीष कुमार इसी सोच के साथ लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में चल रहा “फ्री हेल्थ कैंप महाअभियान–2026” आज हजारों ग्रामीण परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुका है।
इसी अभियान के अंतर्गत मंगलवार को भरतमही गाँव में 17वाँ निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं जन-जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। यह केवल स्वास्थ्य जांच का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास था कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा उनके गाँव तक भी पहुँच सकती है।
शिविर में 29 मरीजों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। 14 लोगों की ब्लड शुगर जांच, सभी मरीजों का रक्तचाप परीक्षण तथा आवश्यकता अनुसार ईसीजी सहित चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया गया। गंभीर रोगों की आशंका वाले मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए उचित मार्गदर्शन भी दिया गया।
महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष पहल
इस शिविर का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान रहा।
डॉ. मनीष कुमार ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल कई मामलों में बिना पर्याप्त चिकित्सकीय आवश्यकता के बच्चेदानी (Uterus) निकालने की सर्जरी कर दी जाती है, जबकि हर मरीज के लिए यह आवश्यक नहीं होती। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की सर्जरी का निर्णय केवल विशेषज्ञ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की विस्तृत जांच और सलाह के बाद ही लिया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि अनावश्यक ऑपरेशन से कई महिलाओं में समय से पहले रजोनिवृत्ति, हार्मोनल असंतुलन, हड्डियों की कमजोरी, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
इलाज के साथ स्वास्थ्य शिक्षा भी
शिविर में मधुमेह, उच्च रक्तचाप, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।
स्वच्छता को लेकर भी विशेष अभियान चलाया गया। खुले में शौच, दूषित पेयजल और गंदगी से फैलने वाले दस्त, टाइफाइड, हैजा तथा अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया गया। स्वच्छ वातावरण और व्यक्तिगत साफ-सफाई को स्वस्थ जीवन की पहली शर्त बताया गया।
सेवा की निरंतर यात्रा
लगातार आयोजित हो रहे इन निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों ने यह सिद्ध कर दिया है कि आरोग्य चैरिटेबल ट्रस्ट का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की स्थायी संस्कृति विकसित करना है।
डॉ. मनीष कुमार का मानना है कि—
«”एक डॉक्टर की वास्तविक पहचान केवल ऑपरेशन थिएटर या क्लिनिक तक सीमित नहीं होती। जब समाज का अंतिम व्यक्ति भी बिना भय और बिना आर्थिक बोझ के उपचार पा सके, तभी चिकित्सा सेवा अपने उद्देश्य को प्राप्त करती है। हमारा प्रयास है कि कोई भी ग्रामीण केवल जानकारी के अभाव या आर्थिक कठिनाई के कारण उपचार से वंचित न रहे।”»
‘हर घर हो स्वास्थ्य, हर घर हो निरोग’ का संकल्प
आरोग्य चैरिटेबल ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 के दौरान यह अभियान और अधिक गाँवों तक पहुँचाया जाएगा। संस्था का लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि समाज एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ सके।
ग्रामीण भारत की सच्ची तस्वीर तभी बदलेगी, जब स्वास्थ्य सेवाएँ अस्पतालों से निकलकर लोगों के दरवाजे तक पहुँचें। आरोग्य चैरिटेबल ट्रस्ट का यह अभियान उसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल बनता जा रहा है।
विशेष रिपोर्ट: श्यामल प्रतीक
