वर्ष 2025 के ‘सैन्य लैंगिक समानता अधिवक्ता पुरस्कार’ से सम्मानित; लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के दौरान महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने में निभाई अहम भूमिका
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता श्यामल प्रतीक की खास रिपोर्ट
रक्सौल। भारतीय सेना की मेजर अभिलाषा बराक ने संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतारेस ने उन्हें वर्ष 2025 के ‘सैन्य लैंगिक समानता अधिवक्ता पुरस्कार’ (Military Gender Advocate of the Year Award) से सम्मानित किया है।
मेजर अभिलाषा बराक लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल, लेबनान (UNIFIL) के साथ सेवा दे रही हैं। उन्हें यह सम्मान संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लैंगिक-संवेदनशील दृष्टिकोण को बढ़ावा देने तथा महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा (Women, Peace and Security Agenda) को आगे बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। भारतीय सैनिक, सैन्य पर्यवेक्षक, पुलिस अधिकारी और चिकित्सा दल दुनिया के विभिन्न संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में शांति स्थापना और नागरिक सुरक्षा के लिए सेवाएं देते रहे हैं। मेजर अभिलाषा बराक की यह उपलब्धि इस गौरवशाली परंपरा में भारतीय महिला सैन्य नेतृत्व की मजबूत उपस्थिति को भी दर्शाती है।
आधुनिक शांति स्थापना अब केवल युद्धविराम की निगरानी या सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी, स्थानीय समुदायों का विश्वास, नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक समावेशन को भी स्थायी शांति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।
इसी दिशा में मेजर अभिलाषा बराक का योगदान विशेष महत्व रखता है। उन्होंने अपने कार्य के माध्यम से यह संदेश मजबूत किया है कि सैन्य पेशेवर दक्षता के साथ मानवीय संवेदनशीलता और लैंगिक दृष्टिकोण भी शांति अभियानों की सफलता के लिए आवश्यक हैं।
महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा का उद्देश्य संघर्ष और शांति निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना है। इसके तहत महिलाओं को सुरक्षा, शांति वार्ता, पुनर्निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने पर जोर दिया जाता है।
मेजर अभिलाषा बराक को मिला यह सम्मान भारतीय महिला अधिकारियों के लिए भी प्रेरणादायक माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि भारतीय महिला अधिकारी अंतरराष्ट्रीय सैन्य और शांति अभियानों में नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम हैं।
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल अत्यंत संवेदनशील परिस्थितियों में कार्य करता है। ऐसे मिशन में उच्च स्तर के अनुशासन, संयम, समन्वय और पेशेवर क्षमता की आवश्यकता होती है। मेजर अभिलाषा बराक को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उनके नेतृत्व और कार्यक्षमता की वैश्विक पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की पहचान लंबे समय से एक जिम्मेदार और विश्वसनीय सहयोगी देश के रूप में रही है। मेजर अभिलाषा बराक की उपलब्धि ने इस प्रतिष्ठा को और मजबूत किया है।
उनका यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सेना, महिला नेतृत्व और विश्व शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
