सात बोरों में छिपाकर रखी गई 768 पीस नेपाली शराब बरामद; 230.4 लीटर की खेप जब्त, तीन संदिग्ध फरार
खास रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता | चाणक्य न्यूज़ इंडिया
रक्सौल, पूर्वी चंपारण।
भारत-नेपाल सीमा पर शराब तस्करी के खिलाफ लगातार बढ़ती पुलिसिया सख्ती के बीच तस्कर भी अपने तौर-तरीके और रास्ते बदलते नजर आ रहे हैं। मुख्य सड़कों और पारंपरिक मार्गों पर निगरानी मजबूत होने के बाद अब नदी किनारे, पगडंडियों और सुनसान सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल तस्करी के वैकल्पिक रास्ते के रूप में किए जाने के संकेत सामने आ रहे हैं।
रक्सौल थाना पुलिस की ताजा कार्रवाई भी इसी बदलते पैटर्न की ओर इशारा करती है। पुलिस ने अहिरवा टोला स्थित सरिसवा नदी के किनारे छापेमारी कर सात प्लास्टिक के बोरों में छिपाकर रखी गई 768 पीस नेपाली देशी शराब, जिसकी कुल मात्रा करीब 230.4 लीटर बताई गई है, बरामद की है।
यह बरामदगी किसी मुख्य सड़क या सामान्य चेकिंग प्वाइंट से नहीं, बल्कि नदी किनारे से हुई है। ऐसे में पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या सरिसवा नदी और आसपास के सुनसान रास्तों का इस्तेमाल नियमित रूप से शराब की खेप सीमा पार कराने के लिए किया जा रहा था।
गुप्त सूचना पर पुलिस ने बिछाया जाल
रक्सौल थानाध्यक्ष रमेश कुमार महतो के अनुसार, संध्या गश्ती के दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि नेपाल से सरिसवा नदी के रास्ते अवैध शराब की खेप अहिरवा टोला क्षेत्र में लाई जाने वाली है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सत्यापन और कार्रवाई के लिए पुलिस टीम गठित की गई। टीम में जितेन्द्र कुमार, दीनदयाल प्रसाद, हरेश कुमार सिंह एवं अजय कुमार को शामिल किया गया।
पुलिस टीम ने अहिरवा टोला पहुंचकर सरिसवा नदी के किनारे इलाके में घेराबंदी करते हुए छापेमारी शुरू की। तलाशी के दौरान नदी किनारे सात प्लास्टिक के बोरे संदिग्ध अवस्था में रखे मिले।
बोरों की जांच करने पर उनमें भारी मात्रा में नेपाली शराब बरामद हुई। पुलिस ने सभी बोरे जब्त कर थाना लाया और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
पुलिस पहुंची तो तीन संदिग्ध फरार
पुलिस के अनुसार, छापेमारी की भनक लगते ही मौके पर मौजूद तीन संदिग्ध अंधेरे का फायदा उठाकर नेपाल की ओर भागने में सफल रहे।
हालांकि पुलिस का कहना है कि तीनों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
नाकेबंदी बढ़ी तो बदल रहे तस्करी के रास्ते
भारत-नेपाल की खुली सीमा के कई हिस्सों में मुख्य मार्गों के अलावा नदी, खेत, ग्रामीण पगडंडियां और कम आवाजाही वाले रास्ते भी मौजूद हैं। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की लगातार कार्रवाई के बाद ऐसे रास्तों के इस्तेमाल की आशंका बढ़ जाती है।
अहिरवा टोला में सरिसवा नदी किनारे हुई बरामदगी इसी चुनौती को सामने लाती है। तस्कर यदि रास्ते बदल रहे हैं तो पुलिस भी अपनी रणनीति बदलते हुए ऐसे इलाकों तक पहुंच रही है, जहां सामान्य मार्गों की तुलना में आवाजाही और निगरानी कम रहती है।
हालांकि इस बरामदगी के पीछे किसी बड़े या संगठित सीमा-पार नेटवर्क की भूमिका है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
तस्करों की नई चाल, पुलिस के सामने नई चुनौती
सीमा क्षेत्र में शराब तस्करी के खिलाफ अभियान अब केवल सड़क पर वाहनों और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। नदी किनारे और ग्रामीण रास्तों की निगरानी भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनती जा रही है।
सरिसवा नदी से हुई इस बरामदगी के बाद अब कई सवाल जांच के केंद्र में हैं—शराब की यह खेप किसके लिए लाई गई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था, फरार आरोपियों के साथ और कौन लोग जुड़े हैं और क्या इस नदी मार्ग का इस्तेमाल पहले भी तस्करी के लिए किया जाता रहा है?
इन सवालों के जवाब आरोपियों की गिरफ्तारी और आगे की जांच के बाद सामने आ सकते हैं।
रक्सौल पुलिस का कहना है कि सरिसवा नदी समेत पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ गश्ती और छापेमारी अभियान लगातार जारी है।
फिलहाल मामले में अग्रतर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
