चाणक्य न्यूज़ इंडिया | स्मृति शेष
1972 और 1977 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए रामप्रीत राय का मोतिहारी में निधन; सादगी और व्यवहार कुशलता के लिए याद किए जाएंगे टिकुलिया के वरिष्ठ नेता
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
आदापुर (पूर्वी चम्पारण)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और आदापुर के पूर्व विधायक रामप्रीत राय का शुक्रवार देर शाम मोतिहारी के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लगभग 80 वर्ष के थे। आदापुर प्रखंड के टिकुलिया गांव के निवासी राय ने सत्तर के दशक में लगातार दो बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। उनके निधन की खबर से राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में शोक है।
परिवार के लिए यह अपने प्रियजन को खोने का दुख है। वहीं, उन्हें अभिभावक मानने वाले लोगों के लिए एक परिचित सहारा छिन जाने का एहसास। रामप्रीत राय का नाम आदापुर के उस राजनीतिक इतिहास से जुड़ा था, जिसकी यादें आज भी क्षेत्र के बुजुर्गों और पुराने कार्यकर्ताओं के पास हैं। अब उन यादों में उनकी उपस्थिति होगी, लेकिन उनसे मिलकर बात करने का अवसर नहीं होगा।
दो बार मिला जनता का विश्वास
रामप्रीत राय 1972 और 1977 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में आदापुर से निर्वाचित हुए थे। 1972 में उन्हें 25,931 मत मिले और उन्होंने 8,541 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। पांच वर्ष बाद, 1977 में क्षेत्र के मतदाताओं ने उन्हें फिर चुना। उस चुनाव में उन्हें 14,784 मत मिले और उनकी जीत का अंतर 2,793 मत रहा।
दो चुनावों में मिली यह जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन का प्रमुख अध्याय थी। आदापुर की जनता ने उन्हें अपनी बात विधानसभा तक पहुंचाने का अवसर दिया। उनके निधन पर याद किए जा रहे जीवन में ये दोनों जनादेश एक खास स्थान रखते हैं। वे उस दौर के प्रतिनिधि थे, जिसकी राजनीतिक यात्रा को याद करते समय आदापुर में उनका नाम भी सामने आता है।
सादगी और अपनापन बने पहचान
स्थानीय लोगों के लिए रामप्रीत राय की पहचान उनके सरल स्वभाव, प्रखर व्यक्तित्व और व्यवहार कुशलता से जुड़ी रही। उनके समर्थक उन्हें एक ऐसे बुजुर्ग के रूप में देखते थे, जिनसे समय-समय पर मार्गदर्शन मिलता था। यही अपनापन उनके प्रति लोगों के सम्मान का आधार बना।
अपने विधायक कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र के विकास और आम लोगों के मुद्दों को उठाया। उनके निधन के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका के साथ उनका मानवीय पक्ष भी याद किया जा रहा है। जिन लोगों के लिए वे अभिभावक थे, उनके दुख में लंबे समय के परिचय और आत्मीयता का वियोग शामिल है।
विभिन्न दलों के नेताओं ने जताया शोक
कांग्रेस के आदापुर प्रखंड अध्यक्ष अनिल प्रसाद गुप्ता ने उनके निधन की जानकारी साझा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी शोक प्रकट किया है। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों के लिए यह खबर दुखद है। संवेदनाओं में एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि के प्रति सम्मान और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति दिखाई देती है।
स्वर्गीय राय अपने पीछे पुत्र, पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के इस दुख में क्षेत्र के लोग भी साझेदार हैं। अंतिम विदाई के समय उनके साथ बिताए क्षण और उनसे मिले मार्गदर्शन की स्मृतियां उनके चाहने वालों के पास रहेंगी।
टिकुलिया से विधानसभा तक की उनकी यात्रा अब आदापुर की स्मृतियों का हिस्सा है। चुनावी अभिलेखों में उनका नाम दो बार निर्वाचित विधायक के रूप में दर्ज है। उन्हें करीब से जानने वाले लोग उनके स्वभाव और अपनेपन को याद करेंगे। रामप्रीत राय का जाना उन लोगों के लिए उस आवाज का मौन हो जाना है, जिससे वे सलाह और आत्मीयता की उम्मीद रखते थे।
