सरहद के रखवालों की कलाई पर बच्चों का रक्षा सूत्र: 71वीं वाहिनी SSB में रक्षाबंधन बना भावनाओं का उत्सव

घर-परिवार से दूर कर्तव्य निभाने वाले जवानों के बीच पहुंचे स्कूली बच्चे; राखी बांधकर जताया सम्मान, सुरक्षा बल और समाज के आत्मीय रिश्ते की दिखी खूबसूरत तस्वीर

श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल संवाददाता
चाणक्य न्यूज़ इंडिया

मोतिहारी। सरहद की निगहबानी करने वाले हाथों पर जब बच्चों ने स्नेह और विश्वास का रक्षा सूत्र बांधा, तो 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), मोतिहारी का मुख्यालय कुछ समय के लिए एक बड़े परिवार के आंगन जैसा नजर आया। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित समारोह में बच्चों और जवानों के बीच दिखे आत्मीय रिश्ते ने पूरे माहौल को भावनात्मक बना दिया।

कार्यक्रम में सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल, मोतिहारी तथा शिवदेनीराम इंटरनेशनल स्कूल, चकिया के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों ने एसएसबी जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और देश तथा सीमा की सुरक्षा में उनके योगदान के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त की।

जिन हाथों में सीमा की सुरक्षा, उन्हीं पर सजा रक्षा सूत्र

समारोह का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया, जब छात्र-छात्राएं एक-एक कर जवानों के पास पहुंचे और उनकी कलाई पर राखी बांधी। बच्चों के हाथों बंधा रक्षा सूत्र जवानों के प्रति समाज के स्नेह, सम्मान और विश्वास की अभिव्यक्ति बन गया।

देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए कई त्योहार ड्यूटी और जिम्मेदारियों के बीच गुजरते हैं। ऐसे में बच्चों का उनके बीच पहुंचकर रक्षाबंधन मनाना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वर्दी के पीछे मौजूद उस इंसान के प्रति समाज के अपनत्व का संदेश भी बना, जो अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखता है।

वर्दी और समाज के बीच मजबूत हुई विश्वास की डोर

रक्षाबंधन का यह आयोजन सुरक्षा बल और समाज के बीच मजबूत रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर पेश करता नजर आया। बच्चों ने राखी के माध्यम से जवानों के प्रति सम्मान जताया तो जवानों ने भी उन्हें स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम ने नई पीढ़ी को यह संदेश भी दिया कि देश की सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान, विश्वास और सहयोग की भावना बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार ने बताया रक्षाबंधन का व्यापक संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए 71वीं वाहिनी के कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, सुरक्षा, स्नेह और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि जब देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात जवानों की कलाई पर बच्चे राखी बांधते हैं, तो इससे जवानों का मनोबल बढ़ता है और समाज के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव और अधिक मजबूत होता है।

बच्चों को अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्रसेवा का संदेश

कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार ने छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए देश की एकता, अखंडता और प्रगति में युवा पीढ़ी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने बच्चों से जीवन में अनुशासन, जिम्मेदारी और सेवा की भावना को अपनाने का आह्वान किया।

वहीं छात्र-छात्राओं ने भी देश की सीमाओं की सुरक्षा में सदैव तत्पर रहने वाले एसएसबी जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की। जवानों के साथ रक्षाबंधन मनाने का अवसर बच्चों के लिए भी गौरव और खुशी का अनुभव बना।

सीमा की चौकसी के साथ सामाजिक सरोकार

भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा, अवैध गतिविधियों पर निगरानी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में सशस्त्र सीमा बल की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके साथ ही 71वीं वाहिनी समय-समय पर विद्यालयों, युवाओं और सीमावर्ती समुदायों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत करती रही है।

रक्षाबंधन का यह आयोजन इसी जुड़ाव की भावनात्मक तस्वीर बनकर सामने आया—जहां एक ओर वर्दी में कर्तव्य और देश की सुरक्षा का संकल्प था, वहीं दूसरी ओर बच्चों के हाथों बांधा गया रक्षा सूत्र समाज के विश्वास, सम्मान और अपनत्व का प्रतीक बना।

अधिकारी, शिक्षक और बलकर्मी रहे मौजूद

कार्यक्रम में सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल की प्रधानाध्यापिका मौसमी चटर्जी के साथ प्रतिमा आचार्य, रेखा कुमारी, नेहा कुमारी और राहुल सिंह सहित विद्यालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। वहीं 71वीं वाहिनी के अधिकारीगण, अधीनस्थ अधिकारी एवं बलकर्मियों ने भी समारोह में भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और समाज तथा सुरक्षा बल के बीच आपसी सौहार्द, विश्वास, भाईचारे और अपनत्व को और मजबूत करने का संदेश दिया।

राखी की छोटी-सी डोर, संदेश बहुत बड़ा

71वीं वाहिनी मुख्यालय में बच्चों द्वारा जवानों की कलाई पर बांधा गया रक्षा सूत्र उस आत्मीय रिश्ते का प्रतीक बना, जिसमें एक तरफ देश और सीमा की सुरक्षा का संकल्प है तो दूसरी तरफ जवानों के प्रति समाज का सम्मान और विश्वास। सरहद पर खड़ा जवान देश की सुरक्षा करता है और देश का स्नेह उसके हौसले को मजबूती देता है—रक्षाबंधन के इस आयोजन ने इसी भावना को जीवंत कर दिया।

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