जाली नोटों के नेटवर्क पर 71वीं वाहिनी का प्रहार, ₹88 हजार की संदिग्ध FICN के साथ दो धराए

खुफिया सूचना को कार्रवाई में बदला; 71वीं वाहिनी SSB और बिहार पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन ने सीमा क्षेत्र में फिर दिखाई सतर्कता

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल/पूर्वी चंपारण।

भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में जाली भारतीय मुद्रा का नेटवर्क आर्थिक अपराध के साथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इसी चुनौती के बीच 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, मोतिहारी ने अपने खुफिया तंत्र की सक्रियता और बिहार पुलिस के साथ बेहतर समन्वय का परिचय देते हुए एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है।

20 अगस्त की रात 71वीं वाहिनी को मिली खुफिया सूचना के आधार पर बिहार पुलिस के साथ चलाए गए संयुक्त अभियान में ₹88 हजार मूल्य की संदिग्ध जाली भारतीय मुद्रा (FICN) बरामद की गई। इस दौरान दो व्यक्तियों को पकड़ा गया तथा एक मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

71वीं वाहिनी की खुफिया सूचना बनी ऑपरेशन की बुनियाद

इस कार्रवाई की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 71वीं वाहिनी का खुफिया तंत्र रहा। वाहिनी को सूचना मिली थी कि मोतिहारी की ओर से संदिग्ध जाली भारतीय मुद्रा ले जाई जा रही है। सूचना को तत्काल लखौरा पुलिस के साथ साझा किया गया।

इसके बाद SI/GD रिषभ सिंह रावत के नेतृत्व में SSB और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर मोतिहारी–लखौरा मार्ग पर कार्रवाई की गई।

जांच के दौरान ₹500 मूल्यवर्ग के कुल 176 संदिग्ध नोट मिले, जिनकी कुल अंकित कीमत ₹88,000 है। प्रारंभिक जांच में कई नोटों पर समान क्रम संख्या सहित संदिग्ध विशेषताएं मिलने के कारण उनके FICN होने का संदेह जताया गया है। नोटों के जाली होने की अंतिम पुष्टि विधिसम्मत विशेषज्ञ जांच के बाद होगी।

सीमा से 15 किलोमीटर अंदर तक निगरानी का संदेश

इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू घटनास्थल भी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार जब्ती अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 15 किलोमीटर भारत की ओर मोतिहारी–लखौरा मार्ग पर हुई।

यह दर्शाता है कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा रेखा या सीमा स्तंभ तक सीमित नहीं रह सकती। संगठित अपराध के नेटवर्क को रोकने के लिए उसके संभावित मार्ग, कूरियर, संपर्क और वितरण तंत्र पर खुफिया निगरानी उतनी ही आवश्यक है।

इस दृष्टि से 71वीं वाहिनी की कार्रवाई इंटेलिजेंस आधारित सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आती है।

पहले भी सामने आ चुके हैं नेटवर्क

पूर्वी चंपारण और भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में जाली मुद्रा से जुड़े मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। मई 2026 में मोतिहारी के निकट एक कथित अंतरराष्ट्रीय जाली मुद्रा नेटवर्क से जुड़े आरोपी की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी। पुलिस के अनुसार उससे जुड़े पुराने मामले में नेपाली नागरिक सहित आठ लोगों की गिरफ्तारी और नकली भारतीय तथा नेपाली मुद्रा की बरामदगी हुई थी।

ऐसे मामलों की पृष्ठभूमि में 71वीं वाहिनी की ताजा कार्रवाई को केवल ₹88 हजार की बरामदगी के आंकड़े तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। अब जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि संदिग्ध नोटों का वास्तविक स्रोत क्या था, वे कहां पहुंचाए जाने थे और पकड़े गए लोगों के संपर्कों के पीछे कोई व्यापक नेटवर्क मौजूद है या नहीं।

विशेष टिप्पणी

“जाली भारतीय मुद्रा के खिलाफ लड़ाई केवल नकली नोट पकड़ने की कार्रवाई नहीं है। यह देश की आर्थिक सुरक्षा और मुद्रा व्यवस्था में नागरिकों के विश्वास की रक्षा से जुड़ा विषय है। भारत-नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता, सामाजिक संबंध और साझा विरासत की पहचान है, लेकिन इसी सहज व्यवस्था का आपराधिक नेटवर्क दुरुपयोग न कर सकें, इसके लिए मजबूत खुफिया तंत्र अत्यंत आवश्यक है। 71वीं वाहिनी SSB, मोतिहारी द्वारा सूचना विकसित कर बिहार पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में बदलना इसी सतर्कता का सकारात्मक उदाहरण है।”

₹88 हजार की बरामदगी से आगे नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती

किसी भी FICN मामले में केवल बरामद रकम ही पूरी कहानी नहीं होती। वास्तविक सफलता उस स्रोत और नेटवर्क तक पहुंचने में होती है जहां से संदिग्ध मुद्रा चली और जिन लोगों तक उसे पहुंचाया जाना था।

यही कारण है कि वर्तमान मामले में पकड़े गए व्यक्तियों के पूर्व और अग्रिम संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, मोतिहारी की यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश देती है—सरहद की सुरक्षा केवल सीमा पर खड़े होकर नहीं, बल्कि खुफिया सूचना, अंतर-एजेंसी समन्वय और अपराध के नेटवर्क की कड़ियों को समय रहते पहचानकर भी की जाती है।

सीमा क्षेत्र में FICN जैसी गंभीर चुनौती के बीच 71वीं वाहिनी की सक्रियता और बिहार पुलिस के साथ उसका समन्वय सुरक्षा व्यवस्था का सकारात्मक पक्ष है।

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