सुरों ने मिटाई सरहदों की दूरी: बीरगंज में संगीत के मंच पर धड़का भारत-नेपाल की दोस्ती का दिल

राजेश पांडेय के गीतों पर झूमा बीरगंज; ICCR और भारतीय महावाणिज्य दूतावास की सांस्कृतिक पहल ने दिया साझा विरासत और आत्मीयता का संदेश

भारत-नेपाल विशेष | चाणक्य न्यूज़ इंडिया
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर श्यामल प्रतीक की रिपोर्ट

रक्सौल/बीरगंज, नेपाल। सरहदें दो देशों की भौगोलिक सीमाएं तय कर सकती हैं, लेकिन संगीत, संस्कृति और सदियों पुराने रिश्तों को बांट नहीं सकतीं। भारत और नेपाल के इसी आत्मीय संबंध की खूबसूरत तस्वीर बीरगंज के आदर्शनगर स्थित टाउन हॉल में देखने को मिली, जहां भारतीय सुरों से सजी एक शाम दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता का संदेश दे गई।

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) और भारत के महावाणिज्य दूतावास, बीरगंज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष लाइट म्यूजिक (सुगम संगीत) कार्यक्रम में प्रसिद्ध भारतीय गायक राजेश पांडेय और उनके सात सदस्यीय दल ने गीत, गजल, भजन और सूफी संगीत की प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महावाणिज्य दूत देवी सहाय मीणा, पर्सा के सांसद हरि पंत, मधेश प्रदेश की प्रांतीय विधानसभा सदस्या वीणा शर्मा और गायक राजेश पांडेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर सशस्त्र पुलिस बल, बीरगंज के सुपरिटेंडेंट (SP) मोहन क्षेत्री की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

समारोह में दोनों देशों के प्रशासनिक, सामाजिक, व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने आयोजन को भारत-नेपाल जनसंपर्क के एक महत्वपूर्ण मंच का स्वरूप दिया।

“भारत-नेपाल के रिश्ते केवल राजनयिक नहीं” — देवी सहाय मीणा

भारत के महावाणिज्य दूत देवी सहाय मीणा ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल राजनयिक रिश्तों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध हैं।

उन्होंने संगीत और संस्कृति को लोगों को जोड़ने का सबसे सहज एवं प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन दोनों देशों के कलाकारों और नागरिकों को एक-दूसरे की संस्कृति को करीब से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों की मित्रता को और अधिक मजबूत करती है।

राजेश पांडेय के सुरों में डूबा बीरगंज

इसके बाद मंच संभाला भारतीय गायक राजेश पांडेय और उनके दल ने।

गीतों से शुरू हुआ संगीत का सफर गजल, भजन और सूफी रचनाओं तक पहुंचा तो पूरा टाउन हॉल तालियों से गूंज उठा। कभी श्रोता संगीत की धुन में खोए नजर आए तो कभी कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन करते रहे।

यह केवल एक संगीत कार्यक्रम नहीं रह गया था—मंच पर भारतीय कलाकार थे, सामने नेपाली और भारतीय संगीतप्रेमी और दोनों के बीच संवाद की भाषा थी संगीत।

यही दृश्य भारत-नेपाल के जनस्तरीय संबंधों की वास्तविक ताकत को सामने रखता दिखाई दिया।

जहां रिश्तों को पासपोर्ट की जरूरत नहीं

भारत और नेपाल का संबंध दक्षिण एशिया में अपनी अलग पहचान रखता है। दोनों देशों के बीच धर्म, संस्कृति, भाषा, परंपराओं, पर्व-त्योहारों और पारिवारिक संबंधों की ऐसी अनेक साझा कड़ियां हैं जो सदियों से लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती आई हैं।

विशेषकर रक्सौल-बीरगंज क्षेत्र में यह रिश्ता प्रतिदिन दिखाई देता है। सीमा के दोनों तरफ रहने वाले लोगों के लिए एक-दूसरे के शहर में आना-जाना केवल अंतरराष्ट्रीय आवाजाही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन का हिस्सा है।

ऐसे में संगीत और संस्कृति से जुड़े आयोजन people-to-people diplomacy को और मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में भारत विकास परिषद शाखा-रक्सौल के सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल कुमार सर्राफ, पूनम सर्राफ, महागढ़ीमाई नगरपालिका के मेयर उपेंद्र यादव, बीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरि गौतम, उपाध्यक्ष माधव राजपाल, पिया सिंह, गुड्डी जोशी, प्रसिद्धि आनंद सिंह, अभिषेक चौधरी, राधेश्याम खेतान और जयप्रकाश खेतान सहित स्थानीय गणमान्य नागरिक, कला एवं संगीत प्रेमी तथा भारत-नेपाल मैत्री से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

भारतीय महावाणिज्य दूतावास के वाणिज्यदूत मनीष दास के साथ अजय जैन, चंदन श्रीवास्तव एवं अन्य सहकर्मियों की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

— श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर
चाणक्य न्यूज़ इंडिया

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