कृषि एवं उद्यान विभाग, टोंक द्वारा संचालित वंदे गंगा जन-जागरण अभियान के अंतर्गत क्षेत्र में जल संरक्षण एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणाली (सोलर पंप) स्थापित करने वाले प्रगतिशील किसानों का सम्मान किया गया तथा किसानों को जल एवं ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने उन किसानों के खेतों का अवलोकन किया, जिन्होंने ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) प्रणाली को अपनाकर खेती में नवाचार किया है। निरीक्षण के दौरान किसानों को सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से 40 से 60 प्रतिशत तक जल की बचत संभव है। यह प्रणाली पानी को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी रुकती है और फसलों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रहती है। अधिकारियों ने बताया कि टपक सिंचाई के माध्यम से घुलनशील उर्वरकों का भी प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचने से उनकी वृद्धि बेहतर होती है तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में वृद्धि होती है। इसके अलावा खेतों में खरपतवार कम उगने से श्रम और लागत में भी कमी आती है, जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए अधिकाधिक किसानों से सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा सौर ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों को अपनाने का आह्वान किया गया। किसानों ने भी जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उद्यान विभाग के कृषि पर्यवेक्षक दुर्गाशंकर सैनी, सहायक कृषि अधिकारी अलीगढ़ राकेश कुमार साहू सहित क्षेत्र के अनेक प्रगतिशील किसान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, ऊर्जा बचत एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने का प्रभावी संदेश दिया गया।

वंदे गंगा जन-जागरण अभियान के तहत ड्रिप सिंचाई प्रणाली का अवलोकन, जल संरक्षण का दिया संदेश
