सरहद की चौकसी के साथ सेहत की पहरेदारी: सेनुवरिया में SSB बना सीमावर्ती ग्रामीणों का ‘स्वास्थ्य साथी’

47वीं वाहिनी SSB के निःशुल्क चिकित्सा शिविर में 225 ग्रामीणों का उपचार; महिलाओं-बच्चों की बड़ी भागीदारी, मानसून में जलजनित व मच्छरजनित बीमारियों से बचाव का दिया संदेश

विशेष कवर स्टोरी |श्यामल प्रतिक

रक्सौल/भारत–नेपाल सीमा।
सरहद की सुरक्षा केवल सीमा स्तंभों की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने तक सीमित नहीं होती। सीमावर्ती आबादी के बीच विश्वास कायम करना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना भी सीमा प्रबंधन का महत्वपूर्ण मानवीय पक्ष है।

भारत–नेपाल सीमा पर तैनात 47वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए सीमावर्ती सेनुवरिया गांव में एक दिवसीय निःशुल्क चिकित्सा एवं परामर्श शिविर आयोजित किया।

शिविर में 225 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की गई और जरूरत के अनुसार निःशुल्क दवाएं एवं चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया गया।

यह आयोजन ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब मानसून के दौरान सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

225 ग्रामीणों तक पहुंची चिकित्सा सेवा

47वीं वाहिनी SSB की ‘एच कंपनी’ द्वारा आयोजित शिविर में कमांडेंट (मेडिकल) डॉ. निशि कान्त के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने ग्रामीणों की जांच की।

लाभार्थियों में—

65 पुरुष, 75 महिलाएं और 85 बच्चे शामिल रहे।

यानी शिविर में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय परामर्श तथा दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

डायबिटीज से ब्लड प्रेशर तक—कई स्वास्थ्य समस्याओं की जांच

शिविर में सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ग्रामीणों में पाई जाने वाली विभिन्न मौसमी और पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं पर भी ध्यान दिया गया।

चिकित्सकों ने मधुमेह, उच्च एवं निम्न रक्तचाप, चर्म रोग, सर्दी-खांसी, बुखार और आंखों से संबंधित समस्याओं की जांच की। बुजुर्ग ग्रामीणों में घुटने और कमर दर्द जैसी शिकायतों को भी देखा गया।

मरीजों को केवल दवा देने तक कार्यक्रम सीमित नहीं रहा, बल्कि चिकित्सकों ने उन्हें बीमारी से बचाव, समय पर उपचार और आवश्यक सावधानियों की जानकारी भी दी।

मानसून में बीमारी का खतरा—SSB ने गांव में ही पहुंचाया जागरूकता अभियान

लगातार बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दूषित पानी, जलजमाव और मच्छरों से होने वाली बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

इसे देखते हुए चिकित्सा टीम ने मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रति ग्रामीणों को विशेष रूप से जागरूक किया।

लोगों को स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने, घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की जानकारी दी गई।

इलाज के साथ भरोसे की भी बन रही डोर

भारत–नेपाल सीमा से लगे अनेक गांव भौगोलिक और संसाधन संबंधी चुनौतियों का सामना करते हैं। ऐसे क्षेत्रों में जब सीमा की सुरक्षा करने वाला बल स्वास्थ्य, जागरूकता और जनकल्याण के कार्यक्रमों के माध्यम से सीधे ग्रामीणों तक पहुंचता है, तो इसका प्रभाव केवल तत्काल चिकित्सा सहायता तक सीमित नहीं रहता।

इससे सुरक्षा बल और सीमावर्ती नागरिकों के बीच संवाद एवं विश्वास भी मजबूत होता है।

सीमा प्रबंधन की दृष्टि से यह विश्वास महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्थानीय नागरिक सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों को सबसे बेहतर जानते हैं। सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय सीमा क्षेत्र को अधिक सुरक्षित और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।

हर महीने स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की पहल

कमांडेंट (मेडिकल) डॉ. निशि कान्त ने कहा कि बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों तक बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि भविष्य में प्रत्येक माह इस प्रकार के चिकित्सा शिविर आयोजित करने की योजना है, ताकि भारत–नेपाल सीमा से सटे गांवों के जरूरतमंद लोगों को नियमित अंतराल पर निःशुल्क चिकित्सा परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी मिल सके।

जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी बने अभियान का हिस्सा

चिकित्सा शिविर में SSB के इंस्पेक्टर उत्तम कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी सुधीर कुमार, आरक्षी मनोज कुमार, आलोक कुमार और राहुल कुमार सहित बल के अन्य कर्मियों ने सहयोग किया।

स्थानीय स्तर पर सेनुवरिया के मुखिया तबरेज आलम तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय सेनुवरिया के प्रधानाध्यापक नवल किशोर कुशवाहा सहित गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने SSB की इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे स्वास्थ्य शिविर नियमित रूप से आयोजित किए जाने की अपेक्षा जताई।

सरहद पर बंदूक के साथ मरहम भी

भारत–नेपाल सीमा पर SSB की पहचान देश की सीमाओं की सुरक्षा करने वाले बल के रूप में है। लेकिन सेनुवरिया का यह स्वास्थ्य शिविर उसकी भूमिका का दूसरा मानवीय चेहरा भी सामने लाता है।

एक ओर जवान सीमा की निगरानी कर रहे हैं, दूसरी ओर चिकित्सकीय टीम गांवों में पहुंचकर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद परिवारों की सेहत की चिंता कर रही है।

यही कारण है कि सेनुवरिया में लगा यह शिविर महज 225 लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण का आंकड़ा नहीं, बल्कि सीमा और सीमावर्ती समाज के बीच मजबूत होते विश्वास की कहानी भी है।

सरहद सुरक्षित हो और सरहद पर रहने वाला समाज भी स्वस्थ रहे—सेनुवरिया में 47वीं वाहिनी SSB की पहल इसी संदेश को मजबूत करती दिखाई दी।

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