डीएम सौरभ सुमन यादव का प्रशासनिक एक्शन मोड: औचक निरीक्षण से मचा हड़कंप, पारदर्शिता और समयबद्ध जनसेवा पर सख्त निर्देश

केंद्रीय मेडिकल कॉलेज के लिए 25 एकड़ और केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए 5 एकड़ भूमि शीघ्र उपलब्ध कराने का आदेश; जर्जर भवनों से कार्यालय हटाने और जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर

मोतिहारी | विशेष संवाददाता

पूर्वी चम्पारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने गुरुवार को मोतिहारी अंचल कार्यालय, प्रखंड कार्यालय तथा आरटीपीएस (RTPS) कार्यालय का औचक निरीक्षण कर प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। अचानक हुए निरीक्षण से कार्यालयों में हलचल मच गई और अधिकारी-कर्मचारी तत्काल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कार्यालयों की कार्यप्रणाली, अभिलेखों के रख-रखाव, जनसुविधाओं, लंबित मामलों तथा भवनों की स्थिति का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से सीधे संवाद कर विभिन्न योजनाओं एवं जनसेवा से जुड़े कार्यों की प्रगति की जानकारी ली।

डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आम जनता से जुड़े सभी मामलों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह सेवा उपलब्ध कराना है तथा किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्रीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 25 एकड़ तथा प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए 5 एकड़ भूमि शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाने और किसी भी प्रकार की शिथिलता से बचने की सख्त हिदायत दी।

कार्यालयों के निरीक्षण में कुछ भवनों की जर्जर स्थिति सामने आने पर जिलाधिकारी ने ऐसे भवनों में संचालित कार्यालयों को सुरक्षित एवं उपयुक्त भवनों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसके साथ ही कार्यालय परिसर की साफ-सफाई, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रख-रखाव तथा जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष बल देते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक आवेदन और शिकायत का निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण को प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और जनकेंद्रित शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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