मानव तस्करी के खिलाफ एकजुट हुआ समाज, जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार: सिविल जज नितिन त्रिपाठी

विश्व मानव तस्करी निरोध दिवस पर मोतिहारी में विचार गोष्ठी, प्रशासन, न्यायपालिका और सामाजिक संगठनों ने लिया मानव तस्करी मुक्त समाज बनाने का संकल्प

मोतिहारी, 30 जुलाई | विशेष संवाददाता

विश्व मानव तस्करी निरोध दिवस के अवसर पर गुरुवार को श्रम संसाधन कार्यालय के सभागार में नेत्रिका फाउंडेशन एवं मानव सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रभावशाली जागरूकता एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका, प्रशासन, सामाजिक संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने मानव तस्करी जैसी संगठित और गंभीर सामाजिक चुनौती पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके विरुद्ध जनभागीदारी को सबसे प्रभावी हथियार बताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पूर्वी चंपारण के सचिव एवं सिविल जज श्री नितिन त्रिपाठी ने कहा कि मानव तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता और मानवाधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि तस्कर अक्सर रोजगार, बेहतर शिक्षा, विवाह और सुनहरे भविष्य का झांसा देकर महिलाओं, बच्चों एवं आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। बाद में इन्हें जबरन श्रम, यौन शोषण, बाल विवाह, भिक्षावृत्ति और अन्य अवैध गतिविधियों में धकेल दिया जाता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगे अथवा किसी को झूठे प्रलोभन देकर बाहर ले जाने का प्रयास किया जा रहा हो तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें। उन्होंने कहा कि जागरूक समाज ही मानव तस्करी जैसी कुरीति को जड़ से समाप्त कर सकता है।

श्रम अधीक्षक सत्य प्रकाश ने कहा कि विश्व मानव तस्करी निरोध दिवस केवल एक दिवस नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का स्मरण कराने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन के लिए भी सहयोग करे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। नेत्रिका फाउंडेशन के निदेशक डॉ. कमलेश कुमार ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन नीरज कुमार ने किया।

इस अवसर पर पूर्व नवोदय विद्यालय के प्राचार्य जगत नारायण प्रसाद, डॉ. मंजर नसीम, संगीता चित्रांश, सुजीत कुमार सिंह, डॉ. स्नेहा एस. चौरसिया, अरुण कुमार श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता विनय कुमार, दिग्विजय कुमार, श्यामल प्रतीक एवं उमेश साह सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सभी ने इस बात पर बल दिया कि मानव तस्करी की रोकथाम केवल कानून के भरोसे संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज, प्रशासन, न्यायपालिका, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है।

कार्यक्रम में माहेर रक्सौल, डंकन हॉस्पिटल, प्रथम, लायंस क्लब, सिटीजन फोरम एवं भारत विकास परिषद सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और मानव तस्करी के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

विशेष टिप्पणी

भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे पूर्वी चंपारण जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मानव तस्करी की चुनौती लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम न केवल लोगों को सतर्क करते हैं, बल्कि प्रशासन और समाज के बीच विश्वास एवं सहभागिता को भी मजबूत करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्येक नागरिक सजग रहे और समय पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दे, तो मानव तस्करी जैसी संगठित आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

— श्यामल प्रतीक
विशेष संवाददाता | चाणक्य न्यूज़ इंडिया

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