अध्याय–2 : जब टोलोलिंग की चोटी पर तिरंगा फिर लहराया…

कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से

ऑपरेशन विजय की पहली निर्णायक जीत जिसने पूरे युद्ध की दिशा बदल दी

“कभी-कभी एक पहाड़ की चोटी पर मिली जीत, पूरे राष्ट्र के आत्मविश्वास को नई ऊँचाई दे देती है। टोलोलिंग ऐसी ही एक चोटी थी।”

13 जून 1999…

द्रास की बर्फीली वादियों में रात अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे था। दुश्मन लगभग 16,000 फीट की ऊँचाई से भारतीय सैनिकों पर लगातार गोलाबारी कर रहा था। नीचे से ऊपर चढ़ना लगभग असंभव माना जा रहा था।

लेकिन भारतीय सैनिकों ने असंभव को ही अपना लक्ष्य बना लिया।

कई दिनों तक लगातार संघर्ष, भारी गोलाबारी और कठिन पर्वतीय चढ़ाई के बाद भारतीय सेना ने टोलोलिंग पर पुनः कब्ज़ा कर लिया। यह ऑपरेशन विजय की पहली बड़ी सामरिक सफलता थी, जिसने पूरे कारगिल युद्ध का रुख बदल दिया। इसके बाद भारतीय सेना का मनोबल नई ऊँचाइयों पर पहुँचा और आगे की निर्णायक लड़ाइयों—पॉइंट 5140, टाइगर हिल और पॉइंट 4875—का मार्ग प्रशस्त हुआ।

टोलोलिंग क्यों था इतना महत्वपूर्ण?

टोलोलिंग से पाकिस्तान समर्थित घुसपैठिए राष्ट्रीय राजमार्ग NH-1A पर नज़र रख सकते थे। यही मार्ग श्रीनगर को लेह और लद्दाख से जोड़ता था।

यदि यह मार्ग बाधित होता, तो भारतीय सेना की रसद, हथियार और सैनिकों की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती थी।

इसलिए टोलोलिंग केवल एक पहाड़ी नहीं थी, बल्कि भारत की सामरिक जीवनरेखा की रक्षा का प्रतीक बन गई।

वीरों का अदम्य साहस

इस अभियान में भारतीय सेना के अनेक अधिकारियों और जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।

उनका उद्देश्य केवल एक थ|

“भारत की एक-एक इंच भूमि को दुश्मन से मुक्त कराना।”

उनके साहस और नेतृत्व ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय सैनिक किसी भी परिस्थिति में पीछे हटना नहीं जानते।

टोलोलिंग की जीत का प्रभाव

टोलोलिंग पर विजय के बाद पूरे देश में विश्वास की नई लहर दौड़ गई।

युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं लड़ा जा रहा था, बल्कि हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रभक्ति की भावना प्रज्वलित हो चुकी थी।

यही वह क्षण था जब पूरे भारत को विश्वास हो गया—

“विजय अब दूर नहीं।”
श्रद्धांजलि

“उन वीरों को शत-शत नमन, जिन्होंने हिमालय की चोटियों पर अपने रक्त से तिरंगे की आन, बान और शान को अमर कर दिया।”

अगला अध्याय (भाग–3):

“टाइगर हिल: वह रात जब भारतीय शेर बादलों को चीरकर दुश्मन के गढ़ तक पहुँच गए”

✍️ विशेष श्रृंखला: कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से

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