भगवान सदैव करते हैं अपने भक्तों की रक्षा: पंडित घनश्याम ओझा
भाटपार रानी तहसील क्षेत्र के ग्राम भिंगारी बाजार में चल रहे भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार की रात कथा व्यास पंडित घनश्याम ओझा ने श्रोताओं को गोवर्धन लीला की कथा का रसपान कराया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की गोवर्धन लीला द्वापर युग में इंद्र के अहंकार को तोड़ने और प्रकृति के प्रेम को दर्शाने की कथा है। श्री कृष्ण ने इंद्र पूजा रोककर व्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा, जिससे क्रोधित होकर इंद्र ने भयंकर बारिश की इन्द्र के कोप से व्रजवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने खेल-खेल में गोवर्धन पर्वत को अपनी बाई हाथ की छोटी उंगली पर उठा लिया। ब्रज के सभी लोग गोवर्धन के नीचे शरण लेकर सुरक्षित हो गए। सात दिनों तक मूसलाधार बारिश हुई लेकिन श्रीकृष्ण के प्रभाव से गोवर्धन के नीचे किसी को भी भूख, प्यास या कष्ट नहीं हुआ। अंत में इंद्र को अपने भूल का एहसास हुआ और उन्होंने श्री कृष्ण से माफी मांगी। कथा व्यास ने कहा कि यह कथा हमें यह संदेश देती है कि अहंकार का अंत निश्चित है और ईश्वर सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा व्यास ने धर्म, सत्य और कर्तव्य पालन का संदेश देते हुए समाज में नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। कथा में प्रमुख रूप से मुख्य यजमान वीर बहादुर सिंह, ऊषा किरण,जिला पंचायत अध्यक्ष पंडित गिरीश चंद्र तिवारी,अजय कुमार दुबे, जयनाथ कुशवाहा, जगदीश नारायण मिश्रा, संतोष पटेल, सुरेश तिवारी, विशंभर पांडेय, अनिल शाही,शशि रंजन तिवारी,अर्जुन वर्मा, धर्मेंद्र सिंह,टन्नू राय, सुरेंद्र सिंह टुनटुन, अजीत शाही,अभय प्रताप सिंह, बृजेन्द्र सिंह, जितेंद्र सिंह, सर्वेंद्र सिंह, अमरेन्द्र सिंह, सरोज सिंह, भावना सिंह, हेमलता सिंह, अनिता सिंह, देवव्रत सिंह सहित तमाम श्रोता उपस्थित थे।

संजय कुमार गुप्ता जिला ब्यूरो चाणक्य न्यूज़ देवरिया
