अमित शाह–सुधन गुरुङ की मुलाकात में सुरक्षा, व्यापार और आपदा सहयोग पर संवाद; रिश्तों की आत्मीयता को जनहित के ठोस कामों से जोड़ने पर जोर
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
नई दिल्ली/रक्सौल। भारत और नेपाल की मित्रता का सबसे जीवंत रूप सीमा के दोनों ओर बसे लोगों के जीवन में दिखाई देता है। रक्सौल से वीरगंज तक बाजारों की चहल-पहल, परिवारों का आना-जाना और सांस्कृतिक अपनापन इस रिश्ते को रोज नई ऊर्जा देते हैं। पीढ़ियों से चले आ रहे इसी विश्वास को और मजबूत करने का संकल्प नई दिल्ली में भारत के गृह मंत्री अमित शाह और नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुङ की मुलाकात में सामने आया।
13 अक्टूबर 2026 को पहले बिम्सटेक गृह मंत्री सम्मेलन के अवसर पर हुई इस बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को शांति, सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। सीमा प्रबंधन में समन्वय, सीमापार अपराधों पर नियंत्रण, आपदा की तैयारी और राहत कार्यों में सहयोग बैठक के प्रमुख विषय रहे।
इस संवाद में मित्रता के साथ एक-दूसरे के सम्मान का भाव भी महत्वपूर्ण रहा। गुरुङ ने संप्रभु समानता, पारस्परिक विश्वास और सम्मान के आधार पर सहयोग बढ़ाने की बात रखी। अमित शाह ने भारत–नेपाल के करीबी संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों की यह भावना भविष्य के सहयोग को जनहित से जोड़ने का आधार बन सकती है।
नेपाल में हाल की बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारत की समय पर सहायता के लिए गुरुङ ने आभार व्यक्त किया। संकट में पहुँची मदद रिश्तों की गहराई को सबसे सहज ढंग से सामने लाती है। किसी प्रभावित परिवार तक राहत पहुँचना, बचाव का रास्ता खुलना और मुश्किल समय में पड़ोसी का साथ मिलना उस विश्वास को मजबूत करता है, जिस पर वर्षों की मित्रता टिकी होती है।
आगे की चुनौतियों को देखते हुए आपदा से पहले की तैयारी और बेहतर तालमेल का महत्व भी बढ़ जाता है। गुरुङ ने बिम्सटेक क्षेत्र में हिमालय से समुद्री इलाकों तक काम कर सकने वाले संयुक्त आपदा कार्यदल का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया बाकी है। यदि इसे व्यावहारिक रूप मिलता है, तो क्षेत्रीय सहयोग को नई क्षमता मिल सकती है।
सीमा पर सुरक्षा का प्रश्न सीधे आम लोगों के जीवन से जुड़ा है। रक्सौल–वीरगंज जैसे क्षेत्रों के लिए बेहतर समन्वय की सार्थकता होगी कि अपराधी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो, सामान्य यात्रियों को सुविधा मिले और व्यापारियों का भरोसा बना रहे। मानव तस्करी, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और संगठित अपराध के विरुद्ध सहयोग दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा में योगदान दे सकता है।
बातचीत में नेपाली उद्योगपतियों और व्यापारियों की कठिनाइयों को भी जगह मिली। गुरुङ ने भारतीय बाजार तक पहुँच में आने वाली तकनीकी बाधाएँ, विशेषकर भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS के प्रमाणन से जुड़ी समस्या उठाई। इस मुद्दे पर भारतीय पक्ष की प्रतिक्रिया को नेपाल ने सकारात्मक बताया है। समाधान का औपचारिक आदेश या समयसीमा अभी सामने नहीं आई है। अब संबंधित विभागों के स्तर पर आगे की कार्रवाई इस संवाद को व्यापारिक राहत में बदल सकती है।
इसी अवसर पर सात देशों के बिम्सटेक सम्मेलन में अपनाए गए दिल्ली घोषणापत्र ने आतंकवाद, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर अपराध के विरुद्ध क्षेत्रीय सहयोग का संकल्प दोहराया। इसमें उन तस्करी पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया है, जिन्हें डिजिटल ठगी के केंद्रों में अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है। पीड़ितों की सुरक्षित वापसी, संरक्षण और पुनर्वास में सहयोग इस पहल को मानवीय अर्थ दे सकता है।
भारत–नेपाल की मित्रता की मजबूती सीमा के दोनों ओर मिलने वाले भरोसे से भी पहचानी जाएगी। व्यापारिक कठिनाइयों का समाधान, सुरक्षित और सुविधाजनक आवाजाही तथा आपदा में समय पर सहायता उस भरोसे को लोगों के दैनिक जीवन में उतारने के रास्ते हैं।
दिल्ली की इस मुलाकात ने सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। अब जरूरत संवाद की भावना को ऐसे कामों में बदलने की है, जिनका लाभ सीमा के दोनों ओर के परिवार महसूस कर सकें।
रक्सौल और वीरगंज के लिए दोस्ती की सबसे सुंदर तस्वीर वही है, जिसमें पड़ोसी की खुशहाली अपनी खुशी बने और उसकी कठिनाई में मदद का हाथ आगे बढ़े। साझा सरहद पर यही अपनापन भारत–नेपाल संबंधों की सबसे बड़ी ताकत है।
