वेल्स में नेपाली सेना का स्वर्णिम परचम, लगातार तीसरे साल जीता स्वर्ण

‘सूर्यकिरण’ और परस्पर सैन्य सम्मान की परंपरा से गहरे हैं भारत–नेपाल के रिश्ते

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक

काठमांडू। वेल्स की दुर्गम पहाड़ियों में नेपाली सैनिकों के हौसले, अनुशासन और सैन्य कौशल ने एक बार फिर स्वर्णिम छाप छोड़ी है। ब्रिटेन के ब्रेकन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘कैंब्रियन पैट्रोल 2026’ में नेपाली सेना ने स्वर्ण पदक हासिल किया है। यह उसका पाँचवाँ स्वर्ण पदक और लगातार तीसरे वर्ष मिली सफलता है। इससे पहले नेपाली सेना 2017, 2019, 2024 और 2025 में भी स्वर्ण जीत चुकी है।

रिपब्लिका की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाली दल ने 7 और 8 अक्टूबर को अभ्यास में भाग लिया। आयोजक ब्रिटिश सेना के मुताबिक, पूरे आयोजन की अवधि 2 से 13 अक्टूबर है। इस वर्ष 140 पेट्रोल दलों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें 35 अंतरराष्ट्रीय दल शामिल हैं।

कैंब्रियन पैट्रोल में सैनिकों की शारीरिक क्षमता के साथ नेतृत्व, धैर्य और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता की भी परीक्षा होती है। चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके में करीब 48 घंटे के भीतर 40 मील, यानी लगभग 64 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी होती है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, सैनिक करीब 31.75 किलोग्राम सैन्य साजोसामान लेकर चलते हैं। रास्ते में हथियार संचालन, टोही, सूचनाएँ जुटाने और घायलों की देखभाल तथा सुरक्षित निकासी जैसे कार्य पूरे करने होते हैं।

भारत–नेपाल मैत्री के दृष्टिकोण से देखें तो यह उपलब्धि दोनों देशों के बीच मौजूद सम्मान और साझा सैन्य विरासत की याद भी दिलाती है। सांस्कृतिक निकटता और पारिवारिक संबंधों से जुड़े इन पड़ोसियों की मित्रता सैन्य सहयोग में भी दिखाई देती है। दोनों देश एक-दूसरे के थलसेनाप्रमुखों को मानद जनरल की रैंक प्रदान करते हैं। भारतीय सेना में नेपाल के गोरखा सैनिकों की सेवा भी इस ऐतिहासिक संबंध का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

‘सूर्यकिरण’ जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास इस रिश्ते को व्यावहारिक मजबूती देते हैं। भारत और नेपाल के सैनिक इन अभ्यासों में अनुभव साझा करते हैं तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिलकर काम करने का अभ्यास करते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियानों, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे विषयों पर सहयोग दोनों सेनाओं के बीच तालमेल और पेशेवर समझ बढ़ाता है।

नेपाली सेना का यह स्वर्ण उसके सैनिकों की मेहनत और तैयारी का सम्मान है। मैत्री की भावना से देखें तो पड़ोसी की उपलब्धि का आदर करना भी रिश्तों को सहेजने का एक सुंदर तरीका है। नेपाल की इस सफलता को सम्मान देना भारत–नेपाल के बीच आपसी विश्वास और सद्भाव को आगे बढ़ाने का संदेश है।

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