AAI की ट्रैफिक पोटेंशियल स्टडी दूसरे चरण में; पर्यटन, उद्योग, व्यापार और भारत-नेपाल सीमा की आर्थिक गतिविधियों को मिल सकती है नई ताकत
श्यामल प्रतीक | रक्सौल अनुमंडल संवाददाता
चाणक्य न्यूज़ इंडिया
रक्सौल/मोतिहारी, 21 अगस्त। लंबे समय से हवाई सेवा की उम्मीद लगाए रक्सौल और आसपास के क्षेत्र के लिए एयरपोर्ट के विकास की दिशा में गतिविधियां आगे बढ़ी हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) रक्सौल हवाई अड्डे की संभावित यात्री क्षमता, आवश्यक सुविधाओं और माल ढुलाई यानी कार्गो की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन कर रहा है। ट्रैफिक पोटेंशियल स्टडी का पहला चरण पूरा हो चुका है और अब दूसरे चरण का सर्वे जारी है।
सचिव, सिविल विमानन विभाग, बिहार से प्राप्त पत्र के आलोक में शुक्रवार को पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव की अध्यक्षता में मोतिहारी समाहरणालय स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सभागार में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण मुख्यालय नई दिल्ली और कोलकाता एयरपोर्ट के अधिकारियों के साथ प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, उद्योग, पर्यटन, परिवहन, रेलवे, शिक्षा और व्यापार क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।
एयरपोर्ट ही नहीं, पूरे क्षेत्र की क्षमता का हो रहा अध्ययन
AAI नई दिल्ली के सहायक महाप्रबंधक कुमार आशीष ने बैठक में बताया कि रक्सौल एयरपोर्ट के विकास को लेकर क्षेत्र की ट्रैफिक क्षमता का समुचित अध्ययन कराया जा रहा है। प्रथम चरण का सर्वे पूरा किया जा चुका है, जबकि दूसरे चरण में एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख राजमार्गों सहित विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों से डेटा जुटाया जा रहा है।
अध्ययन का दायरा केवल संभावित हवाई यात्रियों की संख्या तक सीमित नहीं है। एयरपोर्ट के कैचमेंट एरिया में उद्योग, पर्यटन, रेलवे, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP), सड़क परिवहन, शिक्षा, उद्योग एवं वाणिज्य निकाय, बस ऑपरेटर और वाल्मीकि टाइगर रिजर्व सहित अन्य पर्यटन स्थलों से संबंधित आंकड़े और जानकारी भी जुटाई जा रही है।
यात्री के साथ कार्गो की संभावना भी अहम
बैठक में रक्सौल एयरपोर्ट के लिए संभावित यात्री संख्या, यात्री सुविधाओं, भविष्य की जरूरतों और माल ढुलाई की संभावनाओं पर व्यापक विमर्श हुआ। कार्गो की संभावनाओं का अध्ययन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि रक्सौल भारत-नेपाल सीमा पर व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
हवाई संपर्क विकसित होने की स्थिति में इसका प्रभाव केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। बैठक में हितधारकों ने माना कि बेहतर एयर कनेक्टिविटी से पर्यटन, उद्योग, व्यापार और निवेश को गति मिलने के साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना बनेगी।
प्रशासन ने दिया पूर्ण सहयोग का भरोसा
जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने स्पष्ट किया कि रक्सौल एयरपोर्ट के विकास के लिए जिला प्रशासन से जिस भी स्तर पर सहयोग की आवश्यकता होगी, उसे तत्परता के साथ उपलब्ध कराया जाएगा।
बैठक में उप विकास आयुक्त, NHAI के परियोजना निदेशक, 47वीं वाहिनी SSB रक्सौल एवं 71वीं वाहिनी SSB पिपराकोठी के कमांडेंट, जिला उद्योग केंद्र, पर्यटन एवं शिक्षा विभाग, राज्य कर विभाग, नगर परिषद रक्सौल, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, रेलवे, ICP रक्सौल, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज और बस ऑनर्स संगठन सहित विभिन्न हितधारकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक के अंत में AAI के अधिकारियों ने ट्रैफिक पोटेंशियल स्टडी में पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
रक्सौल की नजर अब सर्वे के निष्कर्ष पर
AAI की मौजूदा ट्रैफिक पोटेंशियल स्टडी रक्सौल एयरपोर्ट की भावी संभावनाओं को आंकड़ों के आधार पर समझने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सर्वे के निष्कर्ष यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि क्षेत्र में यात्री और कार्गो ट्रैफिक की वास्तविक क्षमता कितनी है और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हवाई अड्डे के विकास की संभावनाएं कैसी हैं।
