“जिसने गोलियों से छलनी शरीर के साथ भी तिरंगे तक पहुँचने का रास्ता बनाया”

कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से

आज के वीर

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव, परमवीर चक्र

“यह श्रृंखला भारत माँ के उन अमर और अमिट वीरों को समर्पित है, जिन्होंने कारगिल की बर्फीली चोटियों पर अपने साहस से इतिहास लिखा। ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव का पराक्रम आने वाली हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”

जब टाइगर हिल ने एक योद्धा को अमर होते देखा…

कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर कब्ज़ा भारतीय सेना के लिए सबसे कठिन अभियानों में से एक था। दुश्मन लगभग 16,000 फीट की ऊँचाई पर मजबूत बंकरों में बैठा था और भारतीय सैनिकों पर लगातार गोलियाँ बरसा रहा था। सामने सीधी खड़ी चट्टानें थीं, नीचे गहरी खाइयाँ और ऊपर दुश्मन की घातक गोलीबारी।

ऐसी परिस्थिति में 18 ग्रेनेडियर्स की घातक प्लाटून को आगे बढ़ने का आदेश मिला।

उस प्लाटून में सबसे आगे थे ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव।

जब शरीर छलनी हुआ, लेकिन हौसला नहीं टूटा

टाइगर हिल पर चढ़ाई के दौरान ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव ने अपने साथियों के लिए रस्सी बाँधकर रास्ता बनाया। जैसे ही वे ऊपर पहुँचे, दुश्मन ने उन पर भीषण गोलीबारी शुरू कर दी।

उनके शरीर में कई गोलियाँ लगीं। सामान्य परिस्थितियों में शायद कोई भी सैनिक वहीं गिर जाता, लेकिन योगेन्द्र सिंह यादव ने हार नहीं मानी।

घायल अवस्था में भी वे दुश्मन के बंकर तक पहुँचे और निकट से हमला कर कई दुश्मन सैनिकों को निष्क्रिय कर दिया। उनके इस अदम्य साहस ने भारतीय सैनिकों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खोल दिया।

टाइगर हिल पर विजय की नींव उसी क्षण रखी जा चुकी थी।

परमवीर का सम्मान

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव के अद्वितीय साहस, नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण के लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान “परमवीर चक्र” प्रदान किया गया।

वे कारगिल युद्ध के उन महान योद्धाओं में हैं, जिनका नाम भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

कारगिल हमें क्या सिखाता है?

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव हमें बताते हैं कि—

> “साहस का अर्थ भय का समाप्त हो जाना नहीं, बल्कि भय के बावजूद अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखना है।”

उनकी कहानी हमें यह विश्वास दिलाती है कि राष्ट्र के लिए समर्पित एक सैनिक की इच्छाशक्ति किसी भी पर्वत से ऊँची और किसी भी दुश्मन से अधिक शक्तिशाली होती है।

श्रद्धांजलि

“कारगिल की चोटियाँ आज भी उस वीर की पदचाप सुनती हैं, जिसने घायल होने के बाद भी आगे बढ़ना नहीं छोड़ा। जब भी टाइगर हिल पर तिरंगा लहराता है, ऐसा लगता है मानो वह ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव और उनके साथियों के अदम्य साहस को सलाम कर रहा हो।”

अंतिम शब्द…
“इतिहास केवल किताबों में नहीं लिखा जाता, कभी-कभी वह बर्फ से ढकी चट्टानों पर खून की बूंदों से भी लिखा जाता है। टाइगर हिल आज भी उस वीर की कहानी सुनाती है जिसने अपने शरीर की परवाह किए बिना अपने साथियों के लिए विजय का मार्ग बनाया।”
“जब भी भारत का तिरंगा गर्व से लहराता है, उसमें ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव जैसे वीरों का साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम भी लहराता है। आने वाली पीढ़ियाँ शायद उस युद्ध की गोलियों की आवाज़ न सुन सकें, लेकिन यदि वे इन वीरों की कहानियाँ पढ़ेंगी, तो उन्हें समझ आएगा कि भारत की आज़ादी और सम्मान किन कंधों पर सुरक्षित है।”

✍️ श्यामल प्रतीक

रक्सौल अनुमंडल संवाददाता, चाणक्य न्यूज़ इंडिया

विशेष ऐतिहासिक श्रृंखला

“कारगिल: श्यामल प्रतीक की नज़र से”

“वीरता, बलिदान और भारत की अमर विजय की अनकही दास्तान”

“यह श्रृंखला उन अमर वीरों को समर्पित है जिन्होंने अपने आज का बलिदान देकर हमारे कल को सुरक्षित किया।”

🇮🇳 जय हिन्द! | वन्दे मातरम्! | भारत माता की जय! 🇮🇳

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