श्रद्धा से पर्यटन तक: भाठाधाम को वर्षभर धार्मिक–पर्यटन केंद्र बनाने की कवायद तेज

सांसद रामाकांत चौरसिया ने संसद में मुद्दा उठाने का दिया भरोसा, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर बनी सहमति

वीरगंज/रक्सौल

पर्सा राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र बाबा दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर (रामभौड़ी भाठाधाम) को वर्षभर संचालित धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। श्रावण मेले की पूर्व संध्या पर आयोजित विचार-विमर्श एवं संवाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, मेला समिति और स्थानीय नागरिकों ने भाठाधाम के समग्र विकास का साझा संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम में प्रतिनिधि सभा सदस्य रामाकांत चौरसिया ने मेले को केवल श्रावण माह तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष संचालित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण उनकी प्राथमिकता है तथा स्थानीय नागरिकों एवं मेला समिति द्वारा रखी गई मांगों को आगामी संसद अधिवेशन में प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।

बैठक में सड़क संपर्क, पेयजल, शौचालय, स्नान घाट, सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष चर्चा हुई। उद्देश्य यह है कि भाठाधाम को नेपाल के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की श्रेणी में स्थापित किया जा सके।

मेला संरक्षण एवं निर्माण समिति के अध्यक्ष अलखदेव चौधरी ने बताया कि श्रावण माह के दौरान नेपाल के विभिन्न जिलों के साथ-साथ भारत से भी लाखों श्रद्धालु बाबा दूधेश्वरनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं समिति के अध्यक्ष गेनालाल पटेल ने कहा कि यदि सभी जनप्रतिनिधियों का समन्वित सहयोग मिले तो भाठाधाम अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।

स्थानीय युवा नेता शिवकुमार शाह तेली ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगातार आधारभूत ढांचे में सुधार किया जा रहा है। उनका कहना था कि समन्वित प्रयासों से भाठाधाम को चितवन के प्रसिद्ध सौराहा की तरह एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है।

मेला समिति के सदस्य मनोज यादव ने बताया कि वर्तमान में मेला मुख्य रूप से श्रावण माह, महाशिवरात्रि, माघ शुक्ल पंचमी तथा वैशाख के विशेष अवसरों पर आयोजित होता है। उन्होंने वर्षभर धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के संचालन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि चारकोसे जंगल, वन्यजीव, पवित्र नदी, पहाड़ी प्राकृतिक सौंदर्य और हाथी सफारी जैसी संभावनाएँ इस क्षेत्र को एक विशिष्ट पर्यटन केंद्र बना सकती हैं।

कार्यक्रम में मेला समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय नागरिकों तथा लगभग 150 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भाठाधाम के सुनियोजित विकास के पक्ष में अपनी राय रखी।

चाणक्य न्यूज़ इंडिया विश्लेषण

यदि केंद्र, प्रांत और स्थानीय सरकार मिलकर दीर्घकालिक पर्यटन एवं धार्मिक विकास नीति लागू करती हैं, तो भाठाधाम न केवल नेपाल का एक प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा, बल्कि भारत–नेपाल धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर सकता है।

— रिपोर्ट: श्यामल प्रतीक
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | रक्सौल अनुमंडल संवाददाता

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