सीमा के प्रहरी, भविष्य के निर्माता

जब सशस्त्र सीमा बल ने बच्चों को दिखाई सीमा की हकीकत, तब जागा राष्ट्रसेवा का नया संकल्प

भारत–नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की भी एक महत्वपूर्ण प्रयोगशाला बन चुकी है। इस सोच को साकार करने का कार्य 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), मोतिहारी लगातार कर रही है।

27 जुलाई 2026 को कमांडेंट श्री प्रफुल्ल कुमार के मार्गदर्शन में राजकीय मध्य विद्यालय, झरोखर के विद्यार्थियों को भारत–नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। यह केवल एक भ्रमण नहीं था, बल्कि बच्चों को देश की सीमाओं, सुरक्षा व्यवस्था और राष्ट्रसेवा के वास्तविक स्वरूप से परिचित कराने की प्रेरणादायी पहल थी।

सीमा स्तंभ पर पहुंचकर विद्यार्थियों ने जाना कि सीमाओं की रक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति से होती है। एसएसबी के अधिकारियों ने बच्चों को बल के इतिहास, कार्यशैली और भर्ती प्रक्रिया की जानकारी दी, ताकि भविष्य में अधिक से अधिक युवा देश सेवा के लिए प्रेरित हो सकें।

इस दौरान विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन, नशामुक्त भारत अभियान, मानव तस्करी से बचाव, सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता तथा साइबर और सामाजिक जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों ने अधिकारियों से कई प्रश्न पूछे और सीमा सुरक्षा व्यवस्था को निकट से समझा।

सिर्फ सुरक्षा नहीं, समाज सेवा भी

71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल का कार्य केवल सीमा की निगरानी तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती गांवों में यह बल लगातार सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक कार्यक्रम चला रहा है।

इन पहलों में प्रमुख हैं—

विद्यालयों में जागरूकता अभियान।

मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष जनजागरण।

नशामुक्त भारत अभियान।

पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण।

स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता।

महिलाओं और युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम।

खेल, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रभक्ति आधारित गतिविधियां।

ग्रामीणों के साथ नियमित संवाद एवं विश्वास निर्माण कार्यक्रम।

इन प्रयासों का उद्देश्य केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि सीमावर्ती समाज को जागरूक, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना है।

सीमाओं पर भरोसे का मजबूत रिश्ता

आज सीमावर्ती गांवों के अनेक बच्चे एसएसबी को केवल सुरक्षा बल के रूप में नहीं, बल्कि एक प्रेरक संस्था के रूप में देखते हैं। ग्रामीणों के बीच विश्वास बढ़ाने, युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और समाज को अपराध तथा मानव तस्करी जैसी चुनौतियों से बचाने में एसएसबी की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक विकास को साथ लेकर चलने की यह सोच आने वाले समय में एक सशक्त, जागरूक और सुरक्षित सीमा समाज के निर्माण की आधारशिला बन सकती है।

प्रभावशाली समापन

सीमा पर तैनात जवान केवल देश की सरहदों की रक्षा नहीं करते, बल्कि वे सीमावर्ती समाज के भविष्य को भी संवार रहे हैं। बच्चों में राष्ट्रभक्ति, युवाओं में सेवा का संकल्प और ग्रामीणों में सुरक्षा का विश्वास जगाकर सशस्त्र सीमा बल यह साबित कर रहा है कि एक सशक्त सीमा केवल चौकियों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों से बनती है।

— विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक

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