सरहद पर साझा पहरा: SSB और APF नेपाल की कदमताल से मजबूत हो रही भारत-नेपाल सीमा

71वीं वाहिनी SSB और APF नेपाल की संयुक्त गश्ती ने दिया स्पष्ट संदेश—खुली सीमा दोस्ती की पहचान, अपराध के लिए नहीं बनेगी रास्ता

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
मोतिहारी | भारत-नेपाल सीमा

भारत और नेपाल के बीच की सरहद सिर्फ दो देशों को अलग करने वाली सीमा रेखा नहीं है। यह सदियों पुराने रिश्तों, साझा संस्कृति, व्यापार और लोगों के आपसी जुड़ाव की पहचान भी है। लेकिन इसी खुली सीमा का फायदा उठाकर तस्करी और सीमा पार अपराध की कोशिश करने वाले तत्व सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बने रहते हैं।

इसी चुनौती के सामने अब भारत की 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB), मोतिहारी और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल (APF) की साझा रणनीति दिखाई दे रही है। दोनों देशों के जवान एक साथ सीमा पर उतर रहे हैं, सूचनाएं साझा कर रहे हैं और संवेदनशील रास्तों पर संयुक्त निगरानी बढ़ा रहे हैं।

एक सरहद—दो देशों के जवान, लक्ष्य एक

5 सितंबर को 71वीं वाहिनी SSB और APF नेपाल के जवानों ने संयुक्त गश्ती अभियान चलाया। 71वीं वाहिनी के कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में बी-समवाय जमुनिया के कार्यक्षेत्र में उप निरीक्षक गगन सिंह के नेतृत्व में भारतीय और नेपाली सुरक्षा बलों के जवानों ने सीमावर्ती इलाकों की संयुक्त निगरानी की।

यह गश्ती महज जवानों की नियमित आवाजाही नहीं थी। इसके केंद्र में अवैध आवागमन, तस्करी, संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों के खिलाफ बेहतर समन्वय की रणनीति रही।

पगडंडियों से संवेदनशील रास्तों तक साझा निगरानी

भारत-नेपाल की खुली सीमा पर मुख्य रास्तों के अलावा कई छोटे रास्ते और पगडंडियां हैं। ऐसे में प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए जमीनी निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

संयुक्त गश्ती के दौरान SSB और APF के जवानों ने ऐसे रास्तों और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी। संभावित अतिक्रमण, संदिग्ध आवाजाही तथा सीमा क्षेत्र से जुड़ी अन्य संवेदनशील गतिविधियों पर भी दोनों पक्षों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान हुआ।

गश्ती से पहले रणनीति की मेज पर दोनों बल

इस अभियान की महत्वपूर्ण बात यह रही कि जवानों के सीमा पर निकलने से पहले दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच समन्वय बैठक हुई।

बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार अपराधों से संबंधित सूचनाएं साझा करने तथा जरूरत पड़ने पर बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।

यानी रणनीति स्पष्ट है—अपराध यदि सीमा को रास्ता बनाने की कोशिश करेगा, तो उसका मुकाबला सीमा के दोनों ओर बेहतर समन्वय से किया जाएगा।

अपराध के खिलाफ साझेदारी, नागरिक रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता

भारत और नेपाल की खुली सीमा की सबसे बड़ी विशेषता दोनों देशों के नागरिकों के बीच सहज आवाजाही और ऐतिहासिक संबंध हैं। इसलिए सुरक्षा की चुनौती केवल निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि वैध आवाजाही और आपसी रिश्तों को प्रभावित किए बिना अपराध पर अंकुश लगाना भी है।

SSB और APF की संयुक्त गतिविधियां इसी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं—सामान्य नागरिकों के लिए मित्रता और सहजता, लेकिन संदिग्ध तथा गैरकानूनी गतिविधियों के प्रति सतर्कता।

वर्दियां अलग, लेकिन मकसद साझा

सीमा के एक तरफ भारत की SSB और दूसरी तरफ नेपाल की APF—वर्दी और राष्ट्रीय जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन सीमा पार अपराध को रोकने का उद्देश्य साझा है।

संयुक्त गश्ती के दौरान जब दोनों देशों के जवान एक साथ सीमावर्ती रास्तों पर चलते हैं, तो वह केवल सुरक्षा बलों की मौजूदगी नहीं दिखाता; वह आपसी विश्वास, सूचना साझेदारी और सीमा प्रबंधन में सहयोग का भी संदेश देता है।

पार्टी कमांडर उप निरीक्षक गगन सिंह के मुताबिक, संयुक्त गश्ती और समन्वय बैठक से दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच विश्वास और तालमेल मजबूत होता है तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।

भारत-नेपाल मित्रता की सरहद पर सुरक्षा की नई तस्वीर

भारत और नेपाल का रिश्ता सीमा चौकियों तक सीमित नहीं है। सीमावर्ती परिवारों, बाजारों, संस्कृति और सामाजिक रिश्तों ने दोनों देशों को लंबे समय से जोड़े रखा है। इसलिए इस सीमा की सुरक्षा भी केवल एक देश की चिंता नहीं रह जाती।

71वीं वाहिनी SSB और APF नेपाल की संयुक्त गश्ती इसी साझी जिम्मेदारी की तस्वीर पेश करती है।

संदेश साफ है—भारत-नेपाल की खुली सीमा दोनों देशों की मित्रता और विश्वास की पहचान बनी रहेगी, लेकिन तस्करी और सीमा पार अपराध के लिए इस खुलेपन का दुरुपयोग रोकने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बल सतर्क और समन्वित हैं।

कवर लाइन

“सीमा के दोनों ओर वर्दियां अलग हैं, लेकिन निगाह एक ही लक्ष्य पर है—भारत-नेपाल की सरहद सुरक्षित रहे, मित्रता मजबूत रहे और अपराध के लिए कोई जगह न बचे।”

— श्यामल प्रतीक | विशेष रिपोर्ट

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