RLM नेता और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने पर खतरा मंडराने लगा है। दरअसल बिहार विधान परिषद की 9 सीटों पर होने वाले MLC चुनाव के लिए NDA ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है।
जेडीयू और बीजेपी ने शुक्रवार को 4-4 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। एक सीट पर चिराग पासवान की पार्टी LJP (R) ने अशरफ अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, दीपक प्रकाश का नाम NDA की लिस्ट में नहीं है।
इस फैसले ने पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय की दावेदारी को बड़ा झटका दिया है। NDA कैंडिडेट की लिस्ट आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
दीपक प्रकाश का नाम लिस्ट में नहीं होने पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा, ‘ये एक सामान्य प्रक्रिया है, MLC का चुनाव हो रहा है। थोड़ा इंतजार कीजिए।’
वहीं, मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, ये सवाल बीजेपी के बड़े नेताओं से पूछिए। वो उनके साथ गठबंधन में हैं। RLM से पूछिए वो बताएंगे क्या मामला है।
मंत्री बने रहने के लिए विधान मंडल का सदस्य होना जरूरी
दीपक, बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के 6 महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है।
ऐसा नहीं होने पर उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ता है। ऐसे में MLC चुनाव को दीपक प्रकाश के लिए सदन की सदस्यता हासिल करने का सबसे अहम मौका माना जा रहा था, लेकिन NDA की लिस्ट में नाम नहीं आने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
दीपक प्रकाश को टिकट नहीं मिलने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें शुरू हो गई हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या वे आगे भी मंत्री बने रहेंगे या फिर मंत्रिमंडल में उनकी जगह पर संकट खड़ा हो सकता है।
भाजपा और जदयू ने अपने-अपने कोटे की चार-चार सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित को उम्मीदवार बनाया है।
वहीं, जदयू ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और उपचुनाव के लिए ललन प्रसाद को मैदान में उतारा है। इन नामों की घोषणा के साथ ही स्पष्ट हो गया कि दीपक प्रकाश को MLC चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा।
