पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक आज सम्राट सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। पटना यूनिवर्सिटी सीनेट हॉल के बाहर 350 शिक्षक सहित, कर्मचारी संघ और छात्र संघ मिलाकर करीब 1000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए हैं। विश्वविद्यालय स्वायत्तता के सवाल पर सभी शिक्षक एकजुट हुए हैं। शिक्षक आज सामूहिक अवकाश पर हैं। बिहार सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए जा रहे।
पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक डॉ. दीप नारायण श्रवण ने कहा कि मानसून सत्र में ‘बिहार उच्च शिक्षा विधेयक 2026’ पेश किया जाएगा। इसके विरोध में आज पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ और छात्र संघ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय के पुराने एक्ट के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। अगर पटना विश्वविद्यालय के अंतर्गत मौजूद 10 कांस्टीट्यूएंट कॉलेज को सरकार के अधीन लाया जाएगा तो फिर यहां पर कुछ भी नहीं बचेगा।
पटना यूनिवर्सिटी के जो शिक्षक मेरिट से यहां आते हैं, उन्हें दूर दराज ग्रामीण क्षेत्र में भेज दिया जाएगा जो हमें बर्दाश्त नहीं है। यदि सरकार हमारी बात नहीं मानती है तो आगे हम बड़ा आंदोलन करेंगे। हम लोग विधानसभा का घेराव करेंगे और राजभवन भी मार्च करेंगे। वहीं, दूसरी तरफ सभी परीक्षाएं रद्द होने पर बीएन कॉलेज के छात्रों ने रोड जाम कर दिया है।
वाणिज्य महाविद्यालय की प्रिंसिपल सुहेली मेहता ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज से जुड़े निर्णय अब डीएम-बीडीओ के हाथ में होगा। यह समझा जा सकता है कि तब विश्वविद्यालय की क्या हालत होगी।
कल हम लोग उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर से मिलने गए थे, मगर उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और कहा कि शिक्षकों को इससे क्या दिक्कत है। बिहार में उच्च शिक्षा का ढांचा सभी जगह से अच्छा है और हम चाहते हैं कि वह बरकरार रहे।
‘सरकार अपनी मानसिकता शैक्षणिक संस्थानों पर न सौंपे’
सहायक प्राध्यापक शेखर ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में यूनिवर्सिटी को एक स्वायत्त संस्था मानी गई है। यानी कोई भी सरकार अपनी मानसिकता शैक्षणिक संस्थानों पर न सौंपे। यहां से पढ़े हमारे बच्चे सीधे प्रशासनिक सेवा में जाएंगे।
यदि हम सरकारी तंत्र के मानसिकता से चले और वैसे बच्चे निकाले जो सरकार के ही नक्शेकदम पर चलेंगे। आज अगर यह सरकार के अंतर्गत आता है तो तय है कि वह स्वायत्तता छीन ली जाएगी। जिस अधिनियम को खत्म करने की बात आ रही है, उसी के बदौलत हम सारे शिक्षकों की बहाली हुई है।
हम कॉलेज में पढ़ाते हैं। अगर इसे अलग कर दिया जाए तो हम कहां जाएंगे। हमारी मांग है कि सरकार ने जो भी ड्राफ्ट बनाया है उसे ओपन पटल पर रखे, चर्चा करें उसके बाद ही कोई निर्णय ले।
संघ के महासचिव फरमान अब्बास ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय अधिनियम में बदलाव करने के विरोध में कर्मचारी शिक्षकों के साथ खड़े हैं।
आज कर्मचारी भी सामूहिक अवकाश पर रहते हुए विश्वविद्यालय मुख्यालय में धरना देंगे। उन्होंने कर्मचारियों को आह्वान किया है कि धरना में अधिक संख्या में शामिल होकर सरकार के निर्णय का विरोध करें।
प्रशासनिक फैसले विभाग स्तर पर लिए जाएंगे
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार इस विधानमंडल के मानसून सत्र में उच्च शिक्षा में सुधार और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए ‘बिहार उच्च शिक्षा विधेयक 2026’ पेश करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को सीमित कर डिग्री कॉलेजों को सीधे राज्य सरकार और उच्च शिक्षा विभाग के अधीन लाना है।
शिक्षकों की नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति और प्रशासनिक फैसले अब विभाग स्तर पर लिए जाएंगे। प्रोफेसरों के चुनाव लड़ने, राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करने या समर्थन में लिखने पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रावधान रहेगा।
