भोजपुरी संगीत जगत को मिला नया तोहफा: कल्पना पटवारी और चंदन प्रजापति की आवाज़ में ‘चूड़ी जब खनखन करे लागेला’ का भव्य विमोचन

सैनिकों के त्याग, पारिवारिक संवेदनाओं और भोजपुरी संस्कृति को समर्पित गीत से सामाजिक संदेश देने का प्रयास

रक्सौल/बीरगंज:-भोजपुरी संगीत जगत को सोमवार को एक नई और भावनात्मक प्रस्तुति मिली, जब प्रसिद्ध लोकगायिका कल्पना पटवारी और नेपाल के बीरगंज के युवा कलाकार चंदन प्रजापति की आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया भोजपुरी गीत ‘चूड़ी जब खनखन करे लागेला’ का वीपीसी कॉलेज सभागार में भव्य समारोह के बीच विधिवत विमोचन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, कला और पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने समारोह को यादगार बना दिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भोजपुरी प्रतिष्ठान की अध्यक्ष एवं कन्या माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका अनीता साह थीं, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ लेखक एवं सिद्धार्थ माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक विनोद मेहता ने की। दोनों अतिथियों ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में ऐसे रचनात्मक प्रयासों की सराहना की।

गीत के गायक एवं मुख्य कलाकार चंदन प्रजापति ने बताया कि यह गीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के त्याग, उनके पारिवारिक जीवन और भावनात्मक रिश्तों को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि सुप्रसिद्ध गायिका कल्पना पटवारी की सशक्त और मधुर आवाज़ ने गीत को नई ऊँचाई प्रदान की है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह गीत अपने विषय, संगीत और प्रस्तुति के कारण श्रोताओं के दिलों में विशेष स्थान बनाएगा।

उन्होंने बताया कि एनआर म्यूजिक रिकॉर्ड्स के बैनर तले तैयार इस गीत के निर्माण पर लगभग साढ़े चार लाख रुपये की लागत आई है। उन्होंने भविष्य में भी सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक मूल्यों और भोजपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले गीतों का निर्माण जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर विश्व ज्योतिष महासंघ के एशिया उपाध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, सदस्य विभा साह एवं धीरज साह, भोजपुरी समाज के अध्यक्ष ध्रुव सिंह ठाकुरी, लेखक प्रमोद पांडे ‘हेरंब’, कलाकार निभा यादव, निर्माता नितेश मेहता, राज सोनी, लेखक उमालाल साह, भोजपुरी गायक सुनील पंडित, विभिन्न सोशल मीडिया कलाकारों तथा बड़ी संख्या में पत्रकार एवं संचारकर्मी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार जय यादव ने किया।

विशेष टिप्पणी: ऐसे समय में जब भोजपुरी संगीत पर फूहड़ता के आरोप लगते रहे हैं, सैनिकों के त्याग, परिवार और सामाजिक मूल्यों पर आधारित इस तरह के गीत भोजपुरी संगीत को नई दिशा देने का प्रयास हैं। यदि ऐसे विषयों को श्रोताओं का व्यापक समर्थन मिलता है, तो भोजपुरी संगीत की सकारात्मक और समृद्ध पहचान और मजबूत होगी।

— विशेष रिपोर्ट : श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल संवाददाता

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