मोतिहारी वन प्रमंडल, नेत्रिका फाउंडेशन और ‘पर्यावरण संरक्षण गतिविधि’ के सहयोग से हजारों बच्चों तक पहुंचा प्रकृति संरक्षण का संदेश
विशेष संवाददाता श्यामल प्रतीक( रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर)
आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर, जैव विविधता के संकट और तेजी से घटते वन क्षेत्र जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, तब पूर्वी चंपारण की धरती पर एक ऐसा जनआंदोलन आकार ले रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को हराभरा बनाने का संकल्प लिए हुए है। इस अभियान के केंद्र में हैं समाजसेवी एवं पर्यावरणविद् विनय कुमार, जिन्होंने विद्यालयों को पर्यावरण शिक्षा का केंद्र बनाते हुए “पर्यावरण की पाठशाला” अभियान की शुरुआत की।
यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना विकसित करने का एक व्यापक प्रयास है। इस अभियान में मोतिहारी वन प्रमंडल, नेत्रिका फाउंडेशन तथा पर्यावरण संरक्षण गतिविधि का महत्वपूर्ण सहयोग मिल रहा है।
विद्यालयों से शुरू हुआ हरित परिवर्तन
विनय कुमार का मानना है कि यदि पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा बचपन से दी जाए तो वही बच्चे भविष्य में प्रकृति के सच्चे प्रहरी बनेंगे। इसी सोच के साथ वे लगातार जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर छात्रों को जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता के संरक्षण का महत्व समझा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को केवल पौधे वितरित नहीं किए जाते, बल्कि प्रत्येक छात्र से पौधे की नियमित देखभाल का संकल्प भी दिलाया जाता है। उन्हें वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण, स्थानीय प्रजातियों के वृक्ष लगाने तथा गौरैया सहित अन्य पक्षियों के संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाता है।
लगातार चल रहा है हरित अभियान
विनय कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2026 के दौरान कई महत्वपूर्ण अवसरों पर पर्यावरण की पाठशाला एवं पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
20 मार्च – विश्व गौरैया दिवस पर चकिया प्रखंड के UHS बनरझुला में कार्यक्रम।
21 मार्च – अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस पर NPS मलाही टोला, उत्क्रमित मध्य विद्यालय अमवाँ भेरखियाँ तथा GMS बेदिबन मधुबन में जागरूकता एवं पौधारोपण।
4 अप्रैल – GPS लौकान्हा में विद्यार्थियों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प।
11 अप्रैल – पीपरा कोठी के राजकीय बुनियादी विद्यालय में कस्तूरबा गांधी एवं ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर विशेष पर्यावरण पाठशाला।
9 मई – उच्च माध्यमिक विद्यालय भेरखिया में नेत्रिका फाउंडेशन के बैनर तले कार्यक्रम।
3 जुलाई – उत्क्रमित मध्य विद्यालय बैरागी टोला, कोटवा में पर्यावरण की पाठशाला।
5 जुलाई – केबीसी विजेता सुशील कुमार के साथ “सेव स्पैरो एवं पाँच फल लोकल अभियान” के तहत फलदार पौधारोपण।
11 जुलाई – नवसृजित प्राथमिक विद्यालय सिरसियां वृत्ति टोला, कोटवा में पौधारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता।
18 जुलाई – राजकीय प्राथमिक विद्यालय रोहुआ खास, कोटवा में हरित अभियान का विस्तार।
इन कार्यक्रमों में विद्यालय परिवार, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, स्थानीय ग्रामीण तथा वन विभाग के अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल होकर अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप दे रहे हैं।
वन प्रमंडल बना मजबूत सहयोगी

इस पूरे अभियान में मोतिहारी वन प्रमंडल की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। वन विभाग द्वारा पौधों की उपलब्धता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा पर्यावरण संरक्षण संबंधी जानकारी देकर अभियान को मजबूती प्रदान की जा रही है।
वन विभाग और समाज के बीच यह समन्वय इस बात का उदाहरण है कि यदि सरकारी संस्थाएं और सामाजिक संगठन साथ मिलकर कार्य करें, तो पर्यावरण संरक्षण एक जनआंदोलन बन सकता है।
नेत्रिका फाउंडेशन की सक्रिय भूमिका
नेत्रिका फाउंडेशन इस अभियान में केवल सहभागी संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की मजबूत कड़ी बनकर उभरा है। फाउंडेशन विद्यालयों में पर्यावरण शिक्षा, पौधारोपण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
बच्चों को प्रकृति से जोड़ने, स्थानीय जैव विविधता के महत्व को समझाने तथा पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में फाउंडेशन निरंतर कार्य कर रहा है।
विनय कुमार का संदेश
अपने प्रत्येक कार्यक्रम में विनय कुमार बच्चों से एक ही बात कहते हैं—
> “पौधारोपण केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है।”
वे विद्यार्थियों से आग्रह करते हैं कि प्रत्येक बच्चा अपने जन्मदिन पर कम-से-कम एक पौधा लगाए, उसकी देखभाल करे और अपने परिवार तथा गांव को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करे।
एक व्यक्ति से जनआंदोलन तक
पूर्वी चंपारण में विनय कुमार की यह पहल अब धीरे-धीरे एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले रही है। विद्यालयों में लगाए गए पौधे केवल हरियाली नहीं बढ़ा रहे, बल्कि बच्चों के भीतर प्रकृति के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने की सोच भी विकसित कर रहे हैं।
आज उनके अभियान से प्रेरित होकर अनेक शिक्षक, छात्र, अभिभावक और ग्रामीण स्वयं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में आगे आ रहे हैं।
संपादकीय टिप्पणी
पर्यावरण संरक्षण पर भाषण देना आसान है, लेकिन गांव-गांव और विद्यालय-विद्यालय जाकर बच्चों के हाथों में पौधे थमाना, उन्हें उनकी जिम्मेदारी समझाना और वर्षों तक इस अभियान को निरंतर चलाना असाधारण समर्पण का कार्य है।
विनय कुमार का “पर्यावरण की पाठशाला” अभियान पूर्वी चंपारण के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। यदि इस पहल को प्रशासन, शिक्षा विभाग, वन विभाग और समाज का व्यापक सहयोग मिलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब पूर्वी चंपारण हरियाली, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण की नई पहचान बनेगा।
एक पौधा केवल पेड़ नहीं बनता, वह आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखता है। और यही संदेश लेकर विनय कुमार आज बच्चों के बीच उम्मीद के बीज बो रहे हैं।
