सीमा के प्रहरी, नशे के खिलाफ सख्त पहरा

रक्सौल में 47वीं वाहिनी एसएसबी और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में करीब 91.07 किलो संदिग्ध गांजा बरामद; एक व्यक्ति पकड़ा गया, इनोवा और मोबाइल भी जब्त

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
रक्सौल अनुमंडल रिपोर्टर

रक्सौल, पूर्वी चंपारण। भारत–नेपाल सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाली सशस्त्र सीमा बल की 47वीं वाहिनी, रक्सौल की नशे के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भागीदारी सामने आई है। नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बिहार पुलिस के साथ चलाए गए संयुक्त अभियान में मैत्री पुल के पास करीब 91.07 किलोग्राम संदिग्ध गांजा बरामद किया गया। यह कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्र में मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए एसएसबी और स्थानीय पुलिस के समन्वय का उदाहरण है।

साझा अभियान विवरण के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर एसएसबी की 47वीं वाहिनी और बिहार पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। मैत्री पुल के पास हुई इस कार्रवाई में एक व्यक्ति को पकड़ा गया। संदिग्ध मादक पदार्थ के साथ एक टोयोटा इनोवा और एक मोबाइल फोन भी बरामद हुए।

पकड़े गए व्यक्ति और जब्त सामग्री को आगे की कानूनी कार्रवाई तथा जांच के लिए हरैया थाने को सौंप दिया गया। सीमा पर बरामदगी के बाद मामले को संबंधित थाने तक पहुंचाना इस अभियान का अगला महत्वपूर्ण चरण रहा। आगे की जांच से सामग्री के स्रोत, संभावित गंतव्य और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी सामने आ सकेगी।

इस मामले में एसएसबी की भूमिका को उसके व्यापक दायित्वों के संदर्भ में भी समझना जरूरी है। बल के आधिकारिक परिचय के अनुसार, भारत–नेपाल और भारत–भूटान सीमा की सुरक्षा, सीमा पार अपराधों एवं तस्करी की रोकथाम और सीमावर्ती नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास पैदा करना उसकी जिम्मेदारियों में शामिल है। ‘सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व’ के आदर्श के साथ काम करने वाली एसएसबी की नशे के खिलाफ कार्रवाई इसी सीमा सुरक्षा दायित्व से जुड़ती है।

रक्सौल की 47वीं वाहिनी का विशेष उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है कि इस अभियान में उसने बिहार पुलिस के साथ मिलकर खुफिया सूचना पर कार्रवाई की। उपलब्ध विवरण के आधार पर सूचना का उपयोग और दोनों बलों का सहयोग इस अभियान की खास बात है। सीमा पर संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम के लिए ऐसा तालमेल महत्वपूर्ण है। इस कार्रवाई में एसएसबी की सक्रिय भागीदारी और बिहार पुलिस का सहयोग दोनों सामने आते हैं।

भारत–नेपाल सीमा पर सामान्य नागरिकों की आवाजाही और दोनों देशों के संबंधों के बीच सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी संवेदनशील है। नागरिकों में विश्वास बनाए रखते हुए अवैध गतिविधियों की रोकथाम के लिए सतर्कता जरूरी है। इस संदर्भ में एसएसबी की भूमिका का सामाजिक महत्व भी है। सीमा पर मादक पदार्थों की रोकथाम के प्रयास नशा मुक्त समाज के उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाली कार्रवाई के रूप में देखे जा सकते हैं।

नशा मुक्त भारत अभियान को प्रभावी बनाने के लिए ऐसी कार्रवाई के साथ जनजागरूकता और स्थानीय सहयोग भी आवश्यक है। युवाओं, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी इस प्रयास को व्यापक बना सकती है। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जिम्मेदार एजेंसियों तक पहुंचाना और नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना समाज की भागीदारी के ठोस तरीके हैं।

बरामद पदार्थ को उपलब्ध विवरण में ‘संदिग्ध गांजा’ बताया गया है; उसकी अंतिम पहचान जांच से स्पष्ट होगी। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान और बरामद वाहन की भूमिका की जानकारी साझा नहीं की गई है। इन पहलुओं पर निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

मैत्री पुल के पास की यह बरामदगी 47वीं वाहिनी एसएसबी की नशे के खिलाफ भूमिका का उल्लेखनीय उदाहरण है। सीमा पर सतर्कता, बिहार पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई और बरामदगी के बाद तथ्यपरक जांच नशा मुक्त भारत के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण आधार हैं।घटना संबंधी विवरण आपके साझा अभियान संदेश पर आधारित है।

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