पर्यावरण पर रूस–यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों की मार; विनय कुमार और डॉ. कमलेश कुमार बच्चों तथा समाज को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने में जुटे
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
एक ओर रूस–यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े सैन्य संघर्षों के पर्यावरणीय नुकसान चिंता बढ़ा रहे हैं, दूसरी ओर बिहार में पौधारोपण और पर्यावरण शिक्षा के जरिए संरक्षण की कोशिशें जारी हैं। पर्यावरणविद् विनय कुमार और नेत्रिका फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कमलेश कुमार ऐसे प्रयासों से जुड़े हैं। विद्यालयों, बच्चों और परिवारों की भागीदारी से वे प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने में सक्रिय हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम—यूएनईपी—ने 14 अप्रैल 2026 को अपने वक्तव्य में संघर्षों से पैदा होने वाले प्रदूषण, मलबे और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों के विनाश पर चिंता जताई थी। यूक्रेन में काखोवका बांध के विनाश से प्राकृतिक आवासों, वनस्पति समुदायों और प्रजातियों को गंभीर नुकसान का उल्लेख भी किया गया। युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में खतरनाक मलबे और एस्बेस्टस संदूषण का आकलन, पर्यावरणीय नुकसान की जटिलता सामने रखता है।
ईरान से जुड़े संघर्ष के संदर्भ में यूएनईपी ने 13 मार्च 2026 को बताया कि तेहरान सहित तेल प्रतिष्ठानों पर हमलों की पुष्टि हुई है। जलते तेल से उठे भारी धुएं में हानिकारक पदार्थ होने और लोगों के उसके संपर्क में आने पर चिंता जताई गई। संस्था ने आग से पैदा प्रदूषण के मिट्टी, पानी और भूजल तक पहुंचने तथा फसलों को प्रभावित करने की आशंका भी बताई। समुद्री क्षेत्रों में तेल रिसाव की खबरों का भी उल्लेख किया गया।
इस वैश्विक पर्यावरणीय चिंता के बीच विनय कुमार और डॉ. कमलेश कुमार की निरंतर सक्रियता स्थानीय स्तर पर संरक्षण की जरूरत की ओर ध्यान खींचती है। नेत्रिका फाउंडेशन के सहयोग से विद्यालयों में पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में डॉ. कमलेश कुमार की भूमिका और बच्चों को संवाद तथा पौधारोपण से जोड़ने में विनय कुमार की भागीदारी महत्वपूर्ण है। इनकी कोशिश पर्यावरण संरक्षण को बच्चों की समझ और समाज की सहभागिता से जोड़ने की है।
इसी क्रम में समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम स्थित पोदार इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित ‘पर्यावरण की पाठशाला’ में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन पर संवाद हुआ। कार्यक्रम के साझा विवरण के अनुसार, वन प्रमंडल पदाधिकारी राजकुमार शर्मा, समस्तीपुर सदर के अनुमंडल पदाधिकारी राकेश कुमार, प्राचार्य अखौरी नील किशोर सिन्हा, अधिवक्ता डॉ. संजय कुमार बबलू तथा आशा सेवा संस्थान के सचिव अमित कुमार वर्मा ने बच्चों के सामने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। विद्यालय परिसर में बच्चों के साथ पौधारोपण भी किया गया।
बच्चों को प्राकृतिक संसाधनों का महत्व समझाने और उन्हें पौधा लगाने में सहभागी बनाने से पर्यावरण शिक्षा को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम की सफलता के लिए विद्यालय परिवार, डॉ. संजय कुमार बबलू और अमित कुमार वर्मा के सहयोग के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।
चंपारण में आयोजित पिछले कार्यक्रम इस प्रयास की पृष्ठभूमि सामने रखते हैं। 22 अप्रैल 2025 को मोतिहारी के लक्ष्मीपुर स्थित जवाहर इंटरनेशनल स्कूल में नेत्रिका फाउंडेशन और गांधी संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विनय कुमार की उपस्थिति रही थी। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को रघुनाथपुर, तुरकौलिया स्थित आर.एस. पब्लिक स्कूल में मोतिहारी वन प्रमंडल, नेत्रिका फाउंडेशन और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के सहयोग से ‘पर्यावरण की पाठशाला’ सह पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कोटवा के शिवधर अनूठा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का कार्यक्रम बच्चों की प्रत्यक्ष भागीदारी का विशेष उदाहरण है। मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग से आयोजित ‘पर्यावरण की पाठशाला’ सह पौधारोपण में विनय कुमार और शिक्षक ऋषिकेश कुमार के नेतृत्व में बच्चों ने 100 पौधे लगाए। विद्यार्थियों को पर्यावरण अभियान से जोड़ने की उनकी सक्रियता इस आयोजन में भी सामने आई।
मोतिहारी के ‘दी गुरुकुलम’ में नेत्रिका फाउंडेशन और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की ओर से, मोतिहारी वन प्रमंडल के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला से जुड़ा रहा। इसमें डॉ. कमलेश कुमार और डॉ. स्नेहा एस. चौरसिया मुख्य अतिथि रहे तथा विद्यालय से अभिषेक कुमार, पिंकी राय और सुभेन्दु कुमार का सहयोग रहा। इन गतिविधियों में शैक्षणिक संस्थानों, वन विभाग और नागरिक प्रयासों का सहयोग पर्यावरण शिक्षा को आगे बढ़ाने का आधार बना।
विद्यालयों के साथ गांवों और परिवारों तक भी विनय कुमार की भागीदारी पहुंची है। 4 अक्टूबर 2026 को केबीसी विजेता सुशील कुमार के साथ ‘पांच फल लोकल’ अभियान के अंतर्गत उन्होंने कोटवा प्रखंड के गांधी ग्राम जसौली पट्टी में फलदार पौधारोपण किया। सुनील दास, अनिल दास, दिलीप ठाकुर, रमाशंकर ठाकुर, अभिषेक कुमार उर्फ गोलू, तेजेन्द्र कुमार सिंह, रंजन कुमार सिंह और निशांत राज के आवासीय परिसरों में पौधे लगाए गए।
घरों के आसपास फलदार पौधे लगाने की पहल परिवारों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का व्यावहारिक अवसर देती है। पौधों की देखभाल रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बने तो ऐसी गतिविधियों की निरंतरता मजबूत हो सकती है। सुशील कुमार के अभियान में विनय कुमार की भागीदारी हरियाली के लिए सामूहिक प्रयास की इसी दिशा को सामने रखती है।
एक पूर्व कार्यक्रम के साझा विवरण में विनय कुमार ने कहा था, “धरती मां हमारी अनमोल धरोहर है।” उन्होंने पेड़ लगाने और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का संकल्प दिलाया था। इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए पौधारोपण के साथ पौधों की नियमित देखभाल और पर्यावरण शिक्षा की निरंतरता जरूरी है। विद्यार्थियों, शिक्षकों और परिवारों की सहभागिता इस उद्देश्य को मजबूत कर सकती है।
युद्धों से पर्यावरण को पहुंचती क्षति के संदर्भ में धरती के संरक्षण का दायित्व और भी गंभीर हो जाता है। विनय कुमार और डॉ. कमलेश कुमार जैसे व्यक्तियों के प्रयास इसी जिम्मेदारी को स्थानीय जीवन से जोड़ते हैं। बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, विद्यालयों में पर्यावरण संवाद और परिवारों में पौधों की देखभाल को स्थान मिलने से आज की पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली का आधार बन सकती है।
