कलम पर हमला अब पड़ेगा भारी, पत्रकारों की सुरक्षा पर बिहार पुलिस मुख्यालय सख्त

रिपोर्टिंग में बाधा, दुर्व्यवहार या अनावश्यक हस्तक्षेप पर होगी कार्रवाई; दोषी पुलिसकर्मियों पर भी चलेगा अनुशासन का डंडा

विशेष रिपोर्ट | अनिल कुमार चौधरी
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | बिहार

पटना। बिहार में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र समाचार संकलन को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के सभी वरीय पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और मीडियाकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार, उन पर हमले अथवा रिपोर्टिंग एवं छायांकन में अनावश्यक बाधा से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के वैधानिक कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी पुलिस पदाधिकारी या कर्मी के खिलाफ पत्रकार से दुर्व्यवहार अथवा पूर्वाग्रहपूर्ण कार्रवाई की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मी के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

DGP तक पहुंचा पत्रकार सुरक्षा का मुद्दा

बताया गया है कि राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष निशिकांत राय ने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर पत्रकारों के सामने आने वाली सुरक्षा संबंधी समस्याओं से अवगत कराया था।

ज्ञापन में समाचार संकलन और छायांकन के दौरान पत्रकारों के साथ हुई हिंसक घटनाओं, पुलिस द्वारा कथित अनावश्यक हस्तक्षेप तथा पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई थी।

इसके बाद पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए।

मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

पुलिस मुख्यालय ने कहा है कि प्रेस और मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए पुलिस अधिकारी अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों को पत्रकारों और मीडियाकर्मियों के साथ नम्र, संयमित और सम्मानजनक व्यवहार करने का निर्देश दें।

समाचार संकलन, घटनास्थल की रिपोर्टिंग और छायांकन के दौरान पत्रकारों को नियमानुसार आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही यह भी कहा गया है कि पत्रकारों के खिलाफ केवल पूर्वाग्रह अथवा उनके पत्रकारिता कार्य से नाराज होकर किसी प्रकार की निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

कानून-व्यवस्था जरूरी, लेकिन मनमानी नहीं

पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था या सुरक्षा संबंधी वास्तविक परिस्थितियों में आवश्यक पुलिस कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन वह पूरी तरह नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

पत्रकारों के कार्य में बिना आवश्यकता हस्तक्षेप से बचने तथा संवेदनशील परिस्थितियों में भी संतुलित और पेशेवर व्यवहार करने को कहा गया है।

शिकायत दबेगी नहीं, होगी जांच

पत्रकारों, बुद्धिजीवियों और मीडियाकर्मियों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत मिलने पर उसे गंभीरता से लेने का निर्देश दिया गया है।

ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारी या कर्मी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

सभी जिलों को पत्रकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सतर्कतामूलक, सुरक्षात्मक और नियमानुकूल कदम उठाने को भी कहा गया है।

पुलिस मुख्यालय ने गृह विभाग के संकल्प ज्ञापांक-3663, दिनांक 2 मई 2017 के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

मैदान में होगी असली परीक्षा

यह आदेश पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश जरूर है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जिलों, थानों और घटनास्थलों पर इसे कितनी गंभीरता से लागू किया जाता है।

पत्रकार अपराध, भ्रष्टाचार, आंदोलन, चुनाव, प्रशासनिक कार्रवाई, सीमा क्षेत्र, आपदा और कई संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्टिंग करते समय जोखिम उठाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा केवल व्यक्ति की सुरक्षा नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से भी जुड़ा विषय है।

अब पुलिस मुख्यालय ने संदेश साफ कर दिया है—

“पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार, रिपोर्टिंग में अनावश्यक बाधा और सुरक्षा शिकायत की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।”

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