हद है! टाइपिंग टेस्ट में फेल हुआ फिर भी इंटरव्यू… और बन गए कोर्ट में रीडर

सिविल कोर्ट बहाली में फर्जीवाड़ा, हाईकोर्ट में याचिका

बिहार की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की खबरें तो आम थीं, लेकिन अब न्याय के मंदिर यानी अदालतों की बहाली भी सवालों के घेरे में है। मामला विभिन्न सिविल कोर्ट में ‘कोर्ट रीडर सह डिपोजिशन राइटर’ की नियुक्ति से जुड़ा है। विज्ञापन संख्या 03/2022 के जरिए 1132 पदों पर बहाली निकाली गई थी। आरोप है ऑकि पूरी चयन प्रक्रिया के दौरान नियमों को दरकिनार कर अपात्रों को नौकरी दे दी गई।

इस गड़बड़ी के खिलाफ अब पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका संख्या 19081/2024 दायर की गई है। इस बहाली के लिए तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पटना को संयोजक बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश हैं (के. मंजुश्री और तेजप्रकाश पाठक मामले) कि बहाली प्रक्रिया के बीच में नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। वरीय अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव के अनुसार, नियमों के साथ यह खिलवाड़ पूरी तरह अवैध है।

90% अंक जरूरी था, पर 80% वालों का हुआ इंटरव्यू

विज्ञापन की शर्तों के मुताबिक, कंप्यूटर टाइपिंग में 90% शुद्धता अनिवार्य थी। लेकिन खेल यहीं शुरू हुआ। सूचना के अधिकार में मनीष कुमार को मिले जवाब ने घोटाले की पोल खोल दी। टाइपिंग टेस्ट में जो अभ्यर्थी फेल हो गए थे या जिन्हें 80% तक ही अंक मिले, उन्हें भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। हद तब हो गई जब टाइपिंग में फेल होने वाले इन ‘खास’ लोगों को नौकरी भी दी गई। वहीं जिन्होंने टाइपिंग की शर्त पूरी की, उन्हें बाहर कर दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *