अभिषेक पर पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप; घोड़ासहन से रक्सौल और ढाका तक पहले भी सामने आ चुके हैं सीमा-पार नेटवर्क के मामले
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | पूर्वी चंपारण
मोतिहारी/गुवाहाटी। पाकिस्तान से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क की जांच एक बार फिर बिहार के पूर्वी चंपारण तक पहुंची है। असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने पूर्वी चंपारण निवासी 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि वह एक Pakistan Intelligence Operative (PIO) के निर्देश पर काम कर रहा था और सुरक्षा बलों से संबंधित संवेदनशील जानकारी कथित रूप से साझा कर रहा था।
असम STF के मुताबिक कार्रवाई की शुरुआत तेजपुर स्थित Gajraj Military Intelligence से मिले इनपुट के बाद हुई। सूचना विकसित करने के बाद 3 और 4 अक्टूबर की मध्यरात्रि गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर स्थित किराये के मकान से अभिषेक को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और पुलिस द्वारा आपत्तिजनक बताए गए दस्तावेज जब्त किए गए हैं। मामला STF PS Case No. 09/2026 के तहत दर्ज किया गया है।
जांच आगे बढ़ने पर असम STF ने बिहार के बेगूसराय निवासी 39 वर्षीय रितेश कुमार सिंह को भी गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार रितेश पर अभिषेक की कथित गतिविधियों में सहायता करने और सुरक्षा बलों से संबंधित जानकारी पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव तक पहुंचाने में भूमिका होने का आरोप है। जांच एजेंसियां अब कथित नेटवर्क में अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी तलाश रही हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कहा है कि केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर कार्रवाई की गई और गिरफ्तार लोगों में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहा एक पूर्व जवान भी शामिल है। उन्होंने शुरुआती जांच में हनीट्रैप की आशंका का भी उल्लेख किया है।
लेकिन पूर्वी चंपारण के लिए यह पहला मामला नहीं
अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी को एक अलग घटना के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। बीते वर्षों में पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन, रक्सौल और हाल में ढाका से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच में पाकिस्तान से जुड़े कथित नेटवर्क, आतंकी गतिविधियां, जासूसी, नार्को-टेरर या सीमा-पार संपर्क की बात सामने आई।
हालांकि इन सभी मामलों की प्रकृति अलग-अलग रही है और अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि ये सभी नेटवर्क आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए इन्हें एक ही साजिश का हिस्सा बताना उचित नहीं होगा। लेकिन अलग-अलग समय पर सामने आए इन मामलों ने भारत-नेपाल सीमा से जुड़े इस जिले की सुरक्षा-संवेदनशीलता को जरूर रेखांकित किया है।
2016: घोड़ासहन रेलवे ट्रैक पर प्रेशर कुकर IED
पूर्वी चंपारण से जुड़े सबसे गंभीर मामलों में घोड़ासहन रेलवे ट्रैक IED प्रकरण शामिल है। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 1 अक्टूबर 2016 को घोड़ासहन के पास रेलवे ट्रैक पर प्रेशर कुकर IED लगाने का मामला सामने आया था। इस मामले में रेल थाना रक्सौल में प्राथमिकी दर्ज हुई और बाद में मोतिहारी पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद NIA ने जनवरी 2017 में जांच अपने हाथ में ली।
NIA की जांच में पाकिस्तान, नेपाल और भारत से जुड़े कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल की गई। सितंबर 2024 में पटना की विशेष NIA अदालत ने इस साजिश से जुड़े छह आरोपियों को दोषी करार दिया था।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि निशाना कोई व्यक्ति नहीं बल्कि रेलवे जैसी रणनीतिक सार्वजनिक अवसंरचना थी।
2017: रक्सौल से NIA का वांछित फारमुल्लाह अंसारी गिरफ्तार
जून 2017 में पूर्वी चंपारण पुलिस ने रक्सौल के इस्लामपुर इलाके से फारमुल्लाह अंसारी को गिरफ्तार किया था। वह नेपाल के बारा जिले का निवासी था और NIA की मोस्ट वांटेड सूची में था। उस समय पुलिस ने उस पर जाली भारतीय मुद्रा और मादक पदार्थों की तस्करी के साथ पाकिस्तान की ISI से कथित संपर्क होने की बात कही थी।
यह मामला सीधे वर्तमान असम जासूसी केस से जुड़ा नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि रक्सौल-नेपाल सीमा मार्ग का इस्तेमाल अतीत में विभिन्न प्रकार के सीमा-पार आपराधिक नेटवर्क द्वारा करने के आरोप सामने आते रहे हैं।
दिसंबर 2025: जासूसी केस का आरोपी राजबीर रक्सौल से पकड़ा गया
दिसंबर 2025 में एक और गंभीर मामला सामने आया। पंजाब पुलिस के State Special Operations Cell और पूर्वी चंपारण पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में रक्सौल से राजबीर सिंह उर्फ फौजी को गिरफ्तार किया गया था।
पंजाब पुलिस के मुताबिक राजबीर भारतीय सेना में रह चुका था और उसके खिलाफ अमृतसर के घरिंडा थाने में Official Secrets Act के तहत जासूसी का मामला दर्ज था। पुलिस का आरोप था कि वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में आया और संवेदनशील सैन्य जानकारियां कथित रूप से साझा करता था। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक हैंड ग्रेनेड और 500 ग्राम हेरोइन बरामद होने का भी दावा किया गया था।
पुलिस के अनुसार वह नेपाल के रास्ते देश से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था। यह मामला जासूसी, नार्को-टेरर और भारत-नेपाल सीमा मार्ग—तीनों पहलुओं के एक साथ सामने आने के कारण बेहद महत्वपूर्ण था।
सितंबर 2026: ढाका से सेराज आलम की गिरफ्तारी
वर्तमान असम मामले से कुछ ही दिन पहले, 27 सितंबर 2026 को पूर्वी चंपारण में एक और मामला सामने आया था। पुलिस ने 22 वर्षीय सेराज आलम को ढाका थाना क्षेत्र के बिसरहिया गांव के पास से गिरफ्तार किया। उस पर पाकिस्तान से जुड़े एक कथित आतंकी नेटवर्क से डिजिटल संपर्क रखने का आरोप लगाया गया।
पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में आरोपी के मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों को लेकर जांच आगे बढ़ाने की बात सामने आई थी। इस मामले को भी वर्तमान जासूसी मामले से जोड़ने वाला कोई सार्वजनिक प्रमाण अभी नहीं है, लेकिन समय की निकटता के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए डिजिटल कट्टरपंथ, ऑनलाइन संपर्क और सीमा-पार हैंडलर्स का पहलू महत्वपूर्ण हो गया है।
अब अभिषेक का पूर्वी चंपारण कनेक्शन सबसे महत्वपूर्ण सवाल
असम STF ने अभिषेक कुमार सिंह को स्पष्ट रूप से पूर्वी चंपारण का मूल निवासी बताया है, लेकिन अभी उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं में उसका गांव, प्रखंड और थाना क्षेत्र सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं किया गया है।
ऐसे में जांच का अगला महत्वपूर्ण हिस्सा यह होगा कि अभिषेक की स्थानीय पृष्ठभूमि क्या है, वह पूर्वी चंपारण में कहां का निवासी है, यहां किन लोगों के संपर्क में रहा और उसकी कथित गतिविधियों की शुरुआत कहां से हुई।
मोतिहारी पुलिस की ओर से स्थानीय पते और पृष्ठभूमि का सत्यापन होने के बाद ही इस मामले में पूर्वी चंपारण कनेक्शन की वास्तविक तस्वीर और साफ हो सकेगी।
खुली सीमा की संवेदनशीलता, लेकिन समाज को संदेह की नजर से देखना गलत
पूर्वी चंपारण की लंबी भारत-नेपाल सीमा और रक्सौल जैसा अंतरराष्ट्रीय प्रवेश-द्वार इसे व्यापार, पर्यटन और दोनों देशों के सामाजिक संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। यही खुलापन सुरक्षा एजेंसियों के लिए निगरानी की अतिरिक्त चुनौती भी पैदा करता है।
घोड़ासहन IED प्रकरण, रक्सौल से हुई पूर्व गिरफ्तारियां, ढाका का हालिया डिजिटल नेटवर्क मामला और अब पूर्वी चंपारण निवासी अभिषेक का असम जासूसी मामले में नाम सामने आना सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगातार सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
डिजिटल फॉरेंसिक से खुल सकती हैं अगली परतें
असम मामले में जब्त मोबाइल, SIM कार्ड और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच अब सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव से संपर्क कब स्थापित हुआ, कथित तौर पर कौन-सी जानकारी साझा की गई, संपर्क का माध्यम क्या था और क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं।
यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों को पूर्वी चंपारण के पुराने मामलों से साक्ष्य मिलने पर ही जोड़ा जाए, केवल भौगोलिक समानता के आधार पर नहीं।
फाइनल हेडलाइन
असम जासूसी कांड से फिर चर्चा में पूर्वी चंपारण
अभिषेक पर पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप; घोड़ासहन IED से रक्सौल और ढाका तक पहले भी सामने आए सीमा-पार नेटवर्क
