नेपाल की बाढ़ त्रासदी में WHO बना स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी ढाल, आपात राहत के लिए 1.5 लाख डॉलर जारी

10 हजार परिवारों को तत्काल राहत की जरूरत; WHO ने भेजी ऐसी इमरजेंसी हेल्थ किट जो करीब 10 हजार लोगों की तीन महीने तक स्वास्थ्य जरूरतें पूरी कर सकती है

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | अंतर्राष्ट्रीय

काठमांडू। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से पैदा हुए गंभीर मानवीय और स्वास्थ्य संकट के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बड़ी आपात पहल की है। WHO ने नेपाल के बाढ़ प्रभावित समुदायों की तत्काल स्वास्थ्य एवं अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए South-East Asia Regional Health Emergency Fund (SEARHEF) से 1 लाख 50 हजार अमेरिकी डॉलर की आपात राशि जारी की है।

WHO ने नेपाल की मौजूदा बाढ़ त्रासदी को हाल के वर्षों की सबसे गंभीर आपदाओं में से एक बताते हुए साफ किया है कि संगठन केवल तत्काल राहत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपदा प्रतिक्रिया से लेकर रिकवरी तक नेपाल के साथ सहयोग जारी रखेगा।

WHO South-East Asia Regional Office के Officer-in-Charge डॉ. निलेश बुद्धा के मुताबिक यह आपात राशि तत्काल प्राथमिकताओं को पूरा करने में मदद करेगी और WHO राहत एवं पुनर्बहाली के प्रयासों में नेपाल को सहयोग देता रहेगा।

बाढ़ के कुछ ही घंटों के भीतर सक्रिय हुआ WHO

26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के कुछ ही घंटों के भीतर WHO ने आपात मेडिकल सप्लाई जुटाकर प्रभावित क्षेत्रों के लिए भेजना शुरू कर दिया था।

इसमें Interagency Emergency Health Kit भी शामिल है, जो करीब 10 हजार लोगों की तीन महीने तक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखती है। इसके साथ बहुउद्देशीय टेंट भी भेजे गए। आवश्यकता को देखते हुए WHO ने सर्जिकल मास्क, ग्लव्स, हैंड सैनिटाइजर और अन्य मेडिकल सामग्री भी उपलब्ध कराई है।

730 से अधिक मौतें, करीब 2,500 लोग लापता

WHO की 30 अगस्त की मीडिया रिलीज़ में नेपाल के राष्ट्रीय अधिकारियों की नवीनतम रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि बाढ़ में 730 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, करीब 2,500 लोग लापता हैं और 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इनमें 74 लोगों का उपचार चल रहा है।

बागमती और गंडकी प्रांतों के छह गंभीर रूप से प्रभावित जिलों में करीब 10 हजार परिवारों को तत्काल राहत की आवश्यकता बताई गई है।

स्वास्थ्य ढांचे को भी गंभीर नुकसान

आपदा का असर केवल घरों, सड़कों और आजीविका तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है।

WHO के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित रसुवा जिले में चार स्वास्थ्य संस्थान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि धादिंग में दो स्वास्थ्य संस्थानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण धादिंग और त्रिशूली के दो अस्पतालों तक पहुंच भी प्रभावित हुई है। दुर्गम और संपर्क-विहीन क्षेत्रों में विस्थापित लोगों तक सहायता पहुंचाना अभी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अब बीमारी फैलने से रोकना बड़ी चुनौती

बाढ़ का पानी उतरने के बाद पैदा होने वाले स्वास्थ्य खतरों को देखते हुए WHO नेपाल सरकार और सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर स्वास्थ्य प्रतिक्रिया के समन्वय, रोग निगरानी को मजबूत करने और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने पर काम कर रहा है।

WHO ने चोटों के साथ-साथ डायरिया, सांस संबंधी बीमारियों, दूषित पानी और भोजन से होने वाली बीमारियों तथा मच्छर एवं अन्य वाहकों से फैलने वाले रोगों के जोखिम की ओर भी ध्यान दिलाया है। घर, परिवार और आजीविका खोने तथा विस्थापन की स्थिति प्रभावित समुदायों के मानसिक और मनोसामाजिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती है।

SEARHEF से नेपाल को त्वरित सहारा

जिस South-East Asia Regional Health Emergency Fund (SEARHEF) से नेपाल के लिए 1.5 लाख डॉलर जारी किए गए हैं, वह WHO का क्षेत्रीय आपात वित्तीय तंत्र है। इसका उद्देश्य आपदा और स्वास्थ्य संकट के समय देशों को तेजी और लचीले तरीके से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

WHO के मुताबिक वर्ष 2008 में SEARHEF की स्थापना के बाद नेपाल की मौजूदा आपदा इस फंड द्वारा समर्थित 54वीं स्वास्थ्य आपात स्थिति है।

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बीच WHO की भूमिका अब केवल चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। आपात फंड, मेडिकल किट, रोग निगरानी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता और प्रभावित स्वास्थ्य व्यवस्था की पुनर्बहाली—इन सभी मोर्चों पर WHO नेपाल सरकार के साथ खड़ा है।

बाढ़ ने नेपाल के सामने एक बड़ी मानवीय त्रासदी खड़ी की है, लेकिन इस संकट के बीच WHO की त्वरित स्वास्थ्य प्रतिक्रिया प्रभावित समुदायों तक जीवनरक्षक सहायता पहुंचाने और आपदा के बाद पैदा होने वाले दूसरे स्वास्थ्य संकट को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आई है।

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