मोतिहारी में नवजात के कथित सौदे ने झकझोरा: करीब ₹2 लाख में खरीद-फरोख्त की चर्चा, पटना के दो समेत पांच गिरफ्तार; बच्चे को लेने पहुंची एंबुलेंस जब्त
विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक
चाणक्य न्यूज़ इंडिया | पूर्वी चंपारण
मोतिहारी। जन्म के बाद जिस नवजात को मां की गोद, परिवार का दुलार और सुरक्षित भविष्य मिलना चाहिए था, उसी मासूम को लेकर पूर्वी चंपारण के पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र से कथित खरीद-फरोख्त का गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी में नवजात को लेकर करीब दो लाख रुपये के कथित सौदे की चर्चा है। हालांकि इस रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पटना के दो लोगों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन गिरफ्तार लोग स्थानीय क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, नवजात को ले जाने के लिए पहुंची बताई जा रही एक एंबुलेंस को भी पुलिस ने जब्त किया है।
पुलिस और चाइल्ड केयर टीम ने बच्चे को बरामद कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। अब जांच का केंद्र केवल कथित लेन-देन नहीं, बल्कि पटना से पकड़ीदयाल तक बने संपर्क, स्थानीय लोगों की भूमिका और एंबुलेंस के इस्तेमाल की पूरी कड़ी भी है।
चोरमा से सामने आया मामला, सूचना मिलते ही हरकत में आई पुलिस
प्राप्त जानकारी के मुताबिक मामला चोरमा निवासी पूजा कुमारी के नवजात बेटे से जुड़ा है। आरोप है कि बच्चे को स्थानीय संपर्कों के माध्यम से दूसरे पक्ष को सौंपने की तैयारी की जा रही थी।
इसकी सूचना मिलने के बाद पुलिस और संबंधित टीम सक्रिय हुई। कार्रवाई के दौरान नवजात को सुरक्षित बरामद किया गया और मामले से जुड़े बताए जा रहे पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।
अब पुलिस यह स्थापित करने में जुटी है कि बच्चे को दूसरे लोगों को सौंपने की कथित योजना की शुरुआत कहां से हुई, दोनों पक्षों के बीच संपर्क किसने स्थापित कराया और इसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी।
करीब ₹2 लाख के कथित सौदे की चर्चा, रकम की पुष्टि बाकी
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू नवजात को लेकर कथित आर्थिक लेन-देन है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बच्चे को लेकर करीब दो लाख रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आ रही है। कार्रवाई के दौरान नकदी मिलने की सूचना भी है।
हालांकि कथित सौदे की वास्तविक राशि और बरामद नकदी की कुल रकम को लेकर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
ऐसे में यह जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा कि क्या रकम का वास्तव में लेन-देन हुआ था? यदि हुआ तो भुगतान किसने किया, रकम किसके पास पहुंची और इसमें किसी मध्यस्थ की भूमिका थी या नहीं।
पुलिस की जब्ती सूची और आगे की जांच इन सवालों की तस्वीर अधिक स्पष्ट कर सकती है।
पटना के दो लोगों की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच की परिधि
पांच गिरफ्तार लोगों में दो के पटना से होने की जानकारी ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि पटना के इन लोगों का पकड़ीदयाल के स्थानीय लोगों से संपर्क कैसे हुआ। वे नवजात के बारे में कैसे जानते थे और यहां तक पहुंचने से पहले किस-किस व्यक्ति से उनकी बातचीत हुई थी।
यदि किसी तीसरे व्यक्ति ने दोनों पक्षों के बीच संपर्क स्थापित कराया था तो उसकी भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी संगठित नेटवर्क की पुष्टि नहीं हुई है। लिहाजा किसी बड़े गिरोह की मौजूदगी को लेकर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
एंबुलेंस बनी मामले की अहम कड़ी
पूरे घटनाक्रम में जब्त एंबुलेंस जांच की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है।
जानकारी के मुताबिक एंबुलेंस नवजात को ले जाने के लिए पहुंची थी। पुलिस ने उसे जब्त कर लिया है। अब सवाल यह है कि एंबुलेंस किसने बुलाई थी, कहां से मंगाई गई थी और नवजात को लेकर उसका अंतिम गंतव्य कहां था।
एंबुलेंस की बुकिंग से संबंधित जानकारी, चालक का बयान और वाहन के मालिक से पूछताछ पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
जीवन बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एंबुलेंस का इस कथित सौदे में सामने आना मामले को और संवेदनशील बनाता है।
मां का निजी अस्पताल में इलाज, नवजात को रखा गया चिकित्सकीय निगरानी में
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक नवजात की मां पूजा कुमारी का चोरमा स्थित एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद इलाज चल रहा है।
वहीं पुलिस और चाइल्ड केयर टीम द्वारा बरामद किए गए नवजात को चाइल्ड केयर सेंटर के आईसीयू में रखकर उपचार किए जाने की जानकारी है।
फिलहाल बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उसकी आगे की देखभाल और अभिरक्षा को लेकर संबंधित बाल संरक्षण इकाइयों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।
पांच गिरफ्तार, लेकिन जांच यहीं खत्म नहीं
इस प्रकरण में पांच लोगों की गिरफ्तारी पुलिस की शुरुआती कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच का आगे बढ़ना जरूरी है।
गिरफ्तार लोगों के आपसी संपर्क, मोबाइल फोन में उपलब्ध बातचीत, कॉल रिकॉर्ड, संभावित डिजिटल लेन-देन और एंबुलेंस की आवाजाही जैसे तथ्य जांच को आगे ले जा सकते हैं।
इन बिंदुओं की तकनीकी जांच किस स्तर तक शुरू हुई है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
सबसे महत्वपूर्ण यह पता लगाना होगा कि यह मामला केवल गिरफ्तार पांच लोगों तक सीमित था या इनके अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति ने दोनों पक्षों को जोड़ने में भूमिका निभाई।
क्या कोई बिचौलिया था? पुलिस जांच से खुलेगी तस्वीर
मामले में किसी बड़े नेटवर्क अथवा संगठित गिरोह की मौजूदगी अभी साबित नहीं हुई है। इसलिए इस स्तर पर इसे किसी संगठित नवजात खरीद-फरोख्त नेटवर्क से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
लेकिन पटना से दो लोगों का पकड़ीदयाल पहुंचना, तीन स्थानीय लोगों की गिरफ्तारी और नवजात को ले जाने के लिए कथित तौर पर एंबुलेंस का पहुंचना—ये ऐसे तथ्य हैं जिनकी आपसी कड़ियों की विस्तृत जांच आवश्यक है।
यदि जांच में किसी मध्यस्थ की भूमिका, पुराने संपर्क अथवा इसी तरह के अन्य मामलों से कोई संबंध सामने आता है तो पुलिस की जांच का दायरा स्वाभाविक रूप से बढ़ सकता है।
इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार बोले—गहन जांच जारी
मामले को लेकर इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार ने बताया कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित सौदे की वास्तविक रकम क्या थी, गिरफ्तार लोगों की अलग-अलग भूमिका क्या थी, एंबुलेंस किसके निर्देश पर पहुंची थी और क्या मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
एक नवजात की बरामदगी से कहीं आगे है यह मामला
फिलहाल सबसे राहत की बात यह है कि नवजात पुलिस और चाइल्ड केयर टीम की कार्रवाई के बाद सुरक्षित बरामद कर लिया गया है और उसका उपचार कराया जा रहा है।
लेकिन यह मामला केवल एक बच्चे की बरामदगी और पांच गिरफ्तारियों पर खत्म नहीं होता।
यदि जांच में खरीद-फरोख्त के आरोप प्रमाणित होते हैं तो प्रशासन के सामने यह समझना भी जरूरी होगा कि आखिर वे कौन-सी परिस्थितियां थीं, जिनमें एक नवजात को कथित आर्थिक सौदे का हिस्सा बनाने की स्थिति पैदा हुई।
यहां कानून के साथ-साथ बाल संरक्षण व्यवस्था की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्योंकि किसी नवजात की पहचान उसकी कथित कीमत से नहीं हो सकती।
