नेपाल में जलप्रलय, बिहार में बढ़ी चौकसी: बागमती के किनारे पहुंचे आपदा मंत्री रत्नेश सदा, बेलवा डैम और डुब्बा घाट का लिया जायजा

सीमा पार की प्राकृतिक आपदा के बाद शिवहर प्रशासन अलर्ट; तटबंधों और जलस्तर पर पैनी नजर, डीएम प्रतिमा रानी लगातार कर रहीं निगरानी

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक

शिवहर। नेपाल में अचानक आई प्राकृतिक आपदा और जलप्रवाह की परिस्थितियों ने बिहार के बाढ़ संवेदनशील इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी है। संभावित खतरे को देखते हुए बिहार सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा शिवहर पहुंचे और बेलवा डैम तथा डुब्बा घाट का स्थलीय निरीक्षण कर बागमती नदी एवं उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

मंत्री के निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों से नदी की मौजूदा स्थिति, तटबंधों की सुरक्षा तथा किसी आपात परिस्थिति से निपटने की तैयारियों की जानकारी ली गई।

नेपाल में बढ़ा पानी तो बिहार पर भी नजर

उत्तर बिहार की कई नदियों का जलग्रहण क्षेत्र नेपाल से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा अथवा अचानक जलप्रवाह बढ़ने का प्रभाव बिहार के मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

यही वजह है कि नेपाल में उत्पन्न मौजूदा परिस्थितियों के बाद बिहार सरकार विशेष सतर्कता बरत रही है। बागमती जैसी नदियों के जलस्तर और संवेदनशील तटबंधों की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।

बेलवा डैम पर सरकार की नजर

शिवहर के लिए बेलवा क्षेत्र बाढ़ प्रबंधन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। आपदा प्रबंधन मंत्री ने यहां पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी प्राप्त की।

मंत्री का स्वयं संवेदनशील क्षेत्र में पहुंचना इस बात का संकेत है कि सरकार संभावित बाढ़ की चुनौती को लेकर पहले से तैयारी मजबूत रखने पर जोर दे रही है।

डुब्बा घाट पर भी लिया हालात का जायजा

बेलवा के साथ मंत्री ने डुब्बा घाट क्षेत्र की स्थिति भी देखी। नदी किनारे के क्षेत्रों में जलस्तर में होने वाले बदलाव पर प्रशासन की विशेष नजर है। किसी भी असामान्य स्थिति की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और आवश्यकता पड़ने पर राहत-बचाव तंत्र सक्रिय करने की तैयारी रखी गई है।

डीएम प्रतिमा रानी की निगरानी में प्रशासन अलर्ट

शिवहर की जिलाधिकारी प्रतिमा रानी के नेतृत्व में जिला प्रशासन आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। नदी और तटबंधों की स्थिति के साथ संवेदनशील इलाकों से आने वाली सूचनाओं पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रशासन के सामने प्राथमिकता स्पष्ट है—किसी भी संभावित संकट की स्थिति में समय रहते कार्रवाई हो और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

नेपाल का पानी केवल सीमा नहीं देखता

भारत और नेपाल की खुली सीमा केवल दोनों देशों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को ही नहीं जोड़ती, बल्कि हिमालय से निकलने वाली नदियां भी दोनों देशों को प्राकृतिक रूप से एक-दूसरे से जोड़ती हैं।

नेपाल के पहाड़ों से निकलकर बिहार के मैदानों तक पहुंचने वाली नदियां जीवन और खेती की आधार हैं, लेकिन असामान्य जलप्रवाह के समय यही नदियां बड़ी चुनौती भी बन सकती हैं।

इसलिए नेपाल में पैदा होने वाली किसी गंभीर जल आपदा को उत्तर बिहार से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

संकट आने से पहले तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव

नेपाल की मौजूदा प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर संदेश दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में मौसम और नदियों के बदलते व्यवहार के सामने पूर्व चेतावनी, भारत-नेपाल के बीच समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान, तटबंधों की निगरानी और मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र बेहद महत्वपूर्ण हैं।

आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा का बेलवा डैम और डुब्बा घाट का निरीक्षण इसी सतर्कता की कड़ी है।

नेपाल में प्रकृति की चुनौती सामने है और बिहार उसकी आहट को गंभीरता से देख रहा है। संदेश साफ है—आपदा का इंतजार नहीं, आपदा से पहले तैयारी; क्योंकि बाढ़ के सामने सरहद की लकीरें नहीं, समय पर मिली चेतावनी और मजबूत व्यवस्था ही लोगों की जिंदगी बचाती है।

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