जब सरहद के रखवालों की कलाई पर सजी राखी, भावुक हुआ माहौल—बहनों ने बांधा स्नेह, जवानों ने दिया सुरक्षा का विश्वास

71वीं वाहिनी SSB में रक्षाबंधन का भावुक उत्सव; द गुरुकुलम के बच्चों और ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने जवानों की कलाई पर बांधा रक्षा-सूत्र

विशेष रिपोर्ट | श्यामल प्रतीक

मोतिहारी, 28 अगस्त 2026।

कुछ रिश्ते खून से बनते हैं और कुछ रिश्ते कर्तव्य, विश्वास और सम्मान से। शुक्रवार को 71वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल, मोतिहारी में रक्षाबंधन का पर्व कुछ ऐसी ही भावनाओं का साक्षी बना।

देश की सीमाओं की निगहबानी में तैनात वे जवान, जिनके लिए कई बार त्योहार भी ड्यूटी के बीच गुजर जाते हैं, उनकी कलाई पर जब बहनों और बच्चों ने राखी बांधी तो सरहद की कठोर जिम्मेदारियों के बीच घर और परिवार के स्नेह की एक खूबसूरत अनुभूति जीवंत हो उठी।

71वीं वाहिनी SSB के कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन में वाहिनी मुख्यालय सहित कार्यक्षेत्र की विभिन्न सीमा चौकियों पर रक्षाबंधन का पावन पर्व उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर द गुरुकुलम स्कूल के छात्र-छात्राओं और ब्रह्माकुमारीज की बहनों ने जवानों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा। किसी ने राखी बांधकर जवानों के सुरक्षित रहने की कामना की, तो किसी ने उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त की।

उस क्षण राखी केवल एक धागा नहीं रह गई थी।

वह उन परिवारों का स्नेह थी, जिनसे दूर रहकर जवान देश की सुरक्षा करते हैं।
वह समाज का विश्वास था।
और वह उस मौन रिश्ते का प्रतीक थी, जिसमें एक तरफ सरहद की रक्षा का संकल्प है तो दूसरी तरफ जवानों के सुरक्षित लौटने की प्रार्थना।

जिनकी वजह से त्योहार सुरक्षित हैं, उनके लिए समाज लेकर पहुंचा त्योहार

जब देश अपने घरों में त्योहार मनाता है, तब सीमा पर कोई जवान अपनी जिम्मेदारी निभा रहा होता है। उसकी वर्दी के पीछे भी एक बेटा, एक भाई और एक परिवार की भावनाएं होती हैं।

यही कारण है कि जवानों की कलाई पर बांधा गया रक्षा-सूत्र इस आयोजन को सामान्य रक्षाबंधन समारोह से कहीं आगे ले गया।

भारत-नेपाल की खुली सीमा पर तैनात SSB के जवान सीमा सुरक्षा के साथ सीमावर्ती समाज के बीच विश्वास, सहयोग और भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते आए हैं। ऐसे में यह आयोजन “सीमा के प्रहरी और समाज के साथी” की भावना को साकार करता दिखाई दिया।

राखी के धागे में बंधा देश और उसके प्रहरी का रिश्ता

रक्षाबंधन के इस आयोजन ने एक बेहद खूबसूरत संदेश दिया—

देश की सरहद केवल हथियार और चौकियों से सुरक्षित नहीं होती; उसके पीछे जवानों का त्याग, परिवारों का इंतजार और करोड़ों देशवासियों का विश्वास भी खड़ा होता है।

71वीं वाहिनी SSB के जवानों की कलाई पर सजी राखियां मानो कह रही थीं—

“आप सरहद संभालिए… आपकी सलामती की दुआ में पूरा समाज आपके साथ खड़ा है।”

रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर स्नेह का यह छोटा-सा धागा जवान और समाज के बीच बने उस विशाल रिश्ते की पहचान बन गया, जिसकी बुनियाद सुरक्षा, सम्मान, विश्वास और अपनेपन पर टिकी है।

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